Inteqam - 18 in Hindi Love Stories by Mamta Meena books and stories PDF | इंतेक़ाम - भाग 18

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इंतेक़ाम - भाग 18

निशा को रहने का ठिकाना तो मिल गया था लेकिन अब उसे काम की चिंता थी, इसलिए काम की तलाश में वह अपनी जान पहचान के जो अगल बगल में लोग रहते थे उनके यहां काम मांगने गई,,,,

तभी एक पड़ोस में रहने वाली आंटी ने निशा को बताया कि उसकी बेटी किसी कंपनी में काम करती है  महीने के 15000 मिलते हैं अगर तुम चाहो तो उससे बात करो,,,,

यह सुनकर  निशा खुश होते हुए बोली जी आंटी आप जरूर बात करना आपकी बड़ी मेहरबानी होगी,,,,

शाम को वह आंटी अपनी बेटी रीटा के साथ निशा के पास आई और बोली कि रीटा ने फोन पर अपने बॉस से बात कर ली है तुम सुबह ही उसके साथ इसके ऑफिस चले जाना,,,,,

यह सुनकर रीटा निशा का हाथ अपने हाथों में लेकर बोली तुम चिंता मत करना निशा तुम मेरे साथ चलना पगार भी ठीक है,,,,,

यह सुनकर निशा बोली तुम्हारी बड़ी मेहरबानी है मुझ पर मैं तुम्हारा एहसान जिंदगी भर नहीं भूल पाऊंगी,,,,

तब रीटा बोली इसमें एहसान की क्या बात है कुछ देर दोनों ने बातें की फिर रीटा अपनी मां के साथ वापस अपने घर चली गई,,,,

निशा भी अब खुश थी कि उसे चलो काम तो मिल ही जाएगा वही उसे चिंता सता रही थी कि अगर किसी कारण बस उसे काम नहीं मिला तो क्या होगा,,,,

दूसरे दिन  निशा रीटा के साथ उसके ऑफिस चली गई रीटा के साथ निशा को देखकर ऑफिस के सभी लोग निशा की तरफ घूर घूर कर देखने लगे,,,,

रीटा निशा को लेकर अपने बॉस के ऑफिस में गई और बोली गुड मॉर्निंग सर,,,,

उसके बॉस जो उसकी तरफ पीठ कर किसी फाइल में नजर गढ़ाई हुए थे वह उसकी तरफ मुड़ते हुए बोले गुड मॉर्निंग गुड मॉर्निंग,,,,,

तभी उसकी नजर निशा पर पड़ी निशा को देखकर वह अपनी सुध बुध खो बैठे जैसे उसने इतनी सुंदर लड़की अपनी जिंदगी में पहली बार देखी हो वह निशा को एकटक देख कर ही जा रहे थे,,,,

निशा यह सब देख कर अपने आप से नजरें बचा रही थी फिर हड़बड़ा कर निशा बोली गुड मॉर्निंग सर,,,,,

निशा की आवाज सुनकर रीटा के बॉस अपने ख्यालों से बाहर आए और बोले गुड मॉर्निंग गुड मॉर्निंग,,,,,

तब रीटा बोली सर कल मैंने आपको फोन पर बताया था ना कि मेरी एक फ्रेंड को जॉब की सख्त जरूरत है, यह मेरी फ्रेंड है निशा और इसे जॉब की सख्त जरूरत है,,,,,

यह सुनकर उसके बॉस बोले यह समझो इसे जॉब मिल गई यह सुनकर निशा को बहुत खुशी हुई, तब उसके बॉस निशा की तरफ देखते हुए बोले रीटा अब तुम जाओ और तुम अपना काम करो जब तक मैं निशा को उसका काम समझा देता हूं,,,,,

अपने बॉस की बात सुनकर रीटा केबिन से बाहर चली गई तब बॉस निशा की तरफ देखते हुए बोले आपको जॉब की जरूरत है,,,,,

यह सुनकर निशा हड़ बढ़ाते हुए बोली हां हां सर मुझे बहुत जरूरत है, आपकी बड़ी मेहरबानी है मैं आपका एहसान कभी नहीं भूलूंगी,,,,,,,

यह सुनकर निशा के बॉस बोले इसमें एहसान की क्या बात है और यह कहकर उसने निशा का हाथ अपने हाथों में ले लिया और उसे शहलाते हुए बोले कि यह तो हमारा फर्ज था तुम अपना फर्ज बखूबी से निभा ना और हम अपना समझी ना मैं क्या कह रहा हूं,,,,,,

यह सुनकर निशा अपना हाथ झटके से छुड़ाते हुए बोली यह क्या कर रहे हो सर आप,,,,,
और यह कहकर वह जाने लगी तो उसके बॉस ने उसका रास्ता रोक कर कहा देखो निशा तुम्हें जॉब की सख्त जरूरत है और मुझे तुम्हारी तुम्हें देखकर ऐसा लगा है कि जैसे मैं कहीं खो सा गया हूं पागल हो गया हूं मैं तुम्हें देखकर,,,,,,

यह कहकर उसने निशा का हाथ फिर से पकड़ना चाहा लेकिन निशा ने अपना हाथ झटक कर छुड़ाते हुए वहां से जाने लगी तो, उसके बॉस ने उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और बोले कहां जा रही हो जानेमन,,,,,

यह सुनकर निशा को गुस्सा आ गया और उसने एक जोरदार तमाचा अपने बॉस के गाल पर रख दिया, तमाचा इतना तेज था कि उसकी आवाज साफ बाहर काम कर रहे लोगों को भी सुनाई दी,

सब लोग अपनी बॉस की रंगीनियों के बारे में अच्छी तरह जानते थे इसलिए सब समझ गए कि जरूर अंदर बॉस ने कुछ ना कुछ गलत करने की कोशिश की है और सब हैरानी से केबिन की तरफ देखने लगे,,,,

उसका बॉस कुछ कह पाता उससे पहले ही निशा बोली मुझे अपने काम से ज्यादा अपनी इज्जत प्यारी है और हां मैं भूखी मर जाऊंगी लेकिन अपनी इज्जत पर कभी आंच नहीं आने दूंगी, तुम जैसे हैवान ना जाने कितनी बेबस और बेसहारा औरतों को देखकर उस का नाजायज फायदा उठाने की कोशिश करते हैं,,,,,,

निशा की आवाज साफ साफ बाहर सुनाई दे रही थी निशा के बॉस कुछ कहते उससे पहले ही निशा पैर पटक ते हुए बाहर आ गई,,,,,

उसे गुस्से में देख कर रीटा घबराते हुए उसके पास आकर बोली क्या हुआ निशा,,,,

यह देखकर निशा कुछ नहीं बोली और पैर पटकती हुई ऑफिस से बाहर आ गई और सीधे बंगले पर आ गई,