Karma - One Man's Story in Hindi Short Stories by Bikash parajuli books and stories PDF | कर्मा – एक इंसान की कहानी

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कर्मा – एक इंसान की कहानी

सपनों का सफ़र

बिहार के एक छोटे से गाँव दरभंगा में राहुल मिश्रा नाम का एक साधारण लड़का रहता था।
परिवार ग़रीब, लेकिन सपने बहुत बड़े।
पिता हरिनारायण मिश्रा खेतों में मज़दूरी करते, माँ सरिता दूसरों के घरों में काम करतीं।

राहुल की आँखों में सिर्फ़ एक सपना था —
"अपने परिवार की तक़दीर बदलनी है।"

राहुल पढ़ाई में बहुत तेज़ था। उसका सपना था IAS अफ़सर बनने का।
लेकिन घर की हालत इतनी ख़राब थी कि कई बार स्कूल की फ़ीस भी नहीं भर पाता था।

एपिसोड 2 : दोस्ती, प्यार और उम्मीदें

कॉलेज में राहुल की मुलाक़ात नेहा से हुई।
नेहा शहर की अमीर फैमिली से थी, खूबसूरत, समझदार और महत्वाकांक्षी।

धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती गहरी हो गई।
लाइब्रेरी में पढ़ाई, कैन्टीन में चाय, एक-दूसरे के सपनों की बातें —
राहुल को लगता था कि नेहा ही उसकी दुनिया है।

नेहा अक्सर कहती —
"राहुल, एक दिन तुम बहुत बड़े इंसान बनोगे। मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।"

राहुल मानता था कि सच्चा प्यार हर मुश्किल में साथ देता है।

एपिसोड 3 : तूफ़ान की शुरुआत

जब राहुल ग्रेजुएशन के आख़िरी साल में था, घर की हालत और बिगड़ गई।
पिता बीमार पड़ गए, माँ के पास दवा के भी पैसे नहीं थे।

राहुल ने कई पार्ट-टाइम जॉब्स कीं, लेकिन फिर भी फ़ीस भरना मुश्किल हो गया।
वो नेहा से मदद की उम्मीद रखता था, लेकिन नेहा ने साफ़ कह दिया —
"राहुल, मैं चाहकर भी मदद नहीं कर सकती। पापा को हमारा रिश्ता पसंद नहीं।"

राहुल समझ नहीं पाया कि प्यार में शर्तें कैसे हो सकती हैं।

एपिसोड 4 : धोखा

कठिन समय था।
राहुल रात-दिन मेहनत कर रहा था, मगर नेहा की लाइफ़ बदल गई थी।

एक दिन राहुल को पता चला कि नेहा की सगाई हो रही है —
एक बड़े बिज़नेसमैन के बेटे करण मल्होत्रा से।

राहुल हैरान था।
वो भागा-भागा नेहा के पास पहुँचा और बोला —
"नेहा, तुम ऐसा कैसे कर सकती हो? तुमने तो कहा था कि हम हमेशा साथ रहेंगे!"

नेहा की आँखों में कोई पछतावा नहीं था।
उसने ठंडे स्वर में कहा —
"राहुल, प्यार से पेट नहीं भरता। मैं तुम्हारे साथ ग़रीबी में नहीं मर सकती।"

उस दिन राहुल का दिल, उसके सपने, उसकी दुनिया — सब बिखर गए।

एपिसोड 5 : कर्म का संकल्प

राहुल टूट चुका था, मगर उसने हार नहीं मानी।
उसने ख़ुद से वादा किया —
"अब मैं किसी को अपने हालात पर हँसने नहीं दूँगा।
अब मैं सिर्फ़ अपने कर्म पर भरोसा करूँगा।"

वो दिल्ली चला गया।
दिन में कॉल सेंटर में नौकरी, रात को लाइब्रेरी में पढ़ाई।
नींद, आराम, दोस्तों की मौज — सब त्याग दिया।

राहुल की मेहनत रंग लाई।
चार साल बाद, उसने IAS परीक्षा पास कर ली।
गाँव के लोग, जो कभी उसे "ग़रीब का बेटा" कहते थे,
अब गर्व से कहते —
"ये हमारा राहुल है, हमारे गाँव का पहला IAS अफ़सर!"

एपिसोड 6 : कर्म का खेल

पाँच साल बाद।
राहुल अब एक सम्मानित IAS अफ़सर था।
नई गाड़ी, बड़ा बंगला, और समाज में इज़्ज़त।

एक दिन उसे एक प्राइवेट कंपनी के इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट के लिए मीटिंग में बुलाया गया।
वहीं उसकी नज़र एक महिला पर पड़ी।
वो थी नेहा।

नेहा अब पहले जैसी नहीं थी।
उसकी आँखों के नीचे काले घेरे, चेहरे पर थकान, और माथे पर चिंता की लकीरें।
बातों से पता चला कि करण ने शादी के दो साल बाद ही उसे छोड़ दिया था।
नेहा अकेली और कर्ज़ में डूबी थी।

एपिसोड 7 : कर्म का बदला

मीटिंग के बाद नेहा राहुल के पास आई।
उसकी आँखों में आँसू थे।
"राहुल… अगर मैंने उस वक़्त तुम्हें नहीं छोड़ा होता,
तो शायद आज मेरी ज़िंदगी अलग होती।"

राहुल ने शांत स्वर में कहा —
"नेहा, उस वक़्त तुम्हें मेरे सपनों पर भरोसा नहीं था।
लेकिन मुझे अपने कर्म पर भरोसा था।
तुमने आसान रास्ता चुना, मैंने सही रास्ता।
कर्मा ने हम दोनों को वही दिया, जो हमने चुना।"

नेहा फूट-फूट कर रो पड़ी।
राहुल चला गया, लेकिन उसके दिल में कोई ग़ुस्सा नहीं था।
क्योंकि वो जानता था —
कर्म सबसे बड़ा न्यायाधीश है।

एपिसोड 8 : कहानी की सीख

धोखा देने वाला पछताता है, मेहनत करने वाला जीतता है।

किस्मत नहीं, कर्म इंसान की ज़िंदगी बदलता है।

प्यार बिना भरोसे अधूरा है।

कहानी का संदेश

 “जो बोओगे, वही काटोगे।
दुनिया भले साथ न दे,
लेकिन कर्म कभी धोखा नहीं देता।”