VISHAILA ISHQ - 11 in Hindi Mythological Stories by NEELOMA books and stories PDF | विषैला इश्क - 11

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विषैला इश्क - 11

(निशा और बेटी आद्या नागलोक से लौटती हैं, जहां आद्या का हथेली पर नागचिह्न उसे “नाग रक्षिका” बनाता है। सनी की माँ हेतल, निशा की कमजोरी को लेकर चिंता में है, जबकि सनी परिवार को सुरक्षित दूर ले जाने की तैयारी कर रहा है। साधु सनी को आधे मानव-आधे नाग के खतरों और गरुण भस्म की चेतावनी देता है। सनी को पता चलता है कि निशा पर एक नाग का संकट मंडरा रहा है, जो गर्भवती स्त्रियों को निशाना बनाता है। अब सनी को समय रहते अपने परिवार की रक्षा करनी है, क्योंकि अंधेरा सिर्फ रात नहीं, खतरे का संकेत भी है। अब आगे)

नागों के बीच

कार की रफ्तार बहुत तेज़ थी। निशा घबराकर आद्या की ओर देखती हुई बोली, "कार थोड़ा धीरे चलाओ..."

पर तेज़ इंजन की गर्जना और सनी के भीतर उठ रहे तूफान के बीच उसकी आवाज़ हवा में खो गई। सनी कुछ सुन नहीं पा रहा था।

गति बढ़ती गई, और निशा ने देखा कि जैसे-जैसे कार दौड़ रही थी, आद्या के चेहरे की चमक और हथेली पर उभरता नागचिह्न और गहरा होता जा रहा था। उसकी नीली आँखों की रोशनी तीव्र और भयानक होती जा रही थी। निशा की चीख गले में अटक गई, वह बस सहमी चुप बैठी रही।

अनाथालय में पली-बढ़ी निशा के लिए सनी और आद्या ही उसका पूरा संसार थे। लेकिन वह डर रही थी — अगर सनी को आद्या की नागरक्षिका की सच्चाई पता चली, तो क्या वह उन्हें छोड़ देगा? यही सवाल उसके होठों पर चुप्पी का पर्दा डाल रहा था।

कार के भीतर उसकी धड़कनें तेजी से दौड़ रही थीं। बार-बार आद्या की ओर देख-देखकर वह खुद से लड़ रही थी।

सनी के मन में भी कुछ और ही चल रहा था। बस एक ही मकसद — निशा और आद्या की सुरक्षा। वह यह नहीं जानता था कि कार की तेज़ रफ्तार दोनों के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती है।

तभी सनी ने महसूस किया कि निशा कुछ कह रही है। वह चौकन्ना हुआ, आद्या की ओर देखा, फिर आराम से ब्रेक दबाकर कार को सड़क किनारे रोक दिया।

निशा के चेहरे पर घबराहट और आंसू दोनों साथ-साथ थर-थरा रहे थे। सनी फौरन कार से बाहर निकला, पिछली सीट तक पहुंचा और निशा को कसकर गले लगा लिया। बहुत कुछ था जो वह कह नहीं पा रहा था।

निशा कांपती हुई आद्या को और कसकर थामे हुए थी। आद्या के हाथों का नागचिह्न चमक रहा था, और उसकी नीली आँखों में आग की लपटें सुलग रही थीं। सनी ने आद्या को गोद में लेने की कोशिश की, पर निशा उसे छोड़ने को तैयार नहीं थी।

काँपती आवाज़ में सनी बोला, "पापा थक गए हैं। अब कार मम्मी चलाएगी। पापा तो आद्या से बातें करेंगे।"

सच तो यह था कि वह खुद डर गया था। उसकी बेचैनी दोनों पर भारी पड़ रही थी।

निशा अब भी काँप रही थी, पर उसने देखा कि सनी को नागचिह्न नहीं दिख रहे थे, न ही नीली आँखें। एक गहरी सांस लेकर उसने महसूस किया जैसे कोई भारी बोझ उसके सीने से उतर गया हो।

"इतना लंबा रास्ता मुझे याद नहीं," उसने धीरे से कहा। सनी मुस्कुराया और बोला, "बस पाँच किलोमीटर सीधा जाना है।"

निशा सड़क पर ध्यान लगाए थी, लेकिन मन में सवाल उठ रहे थे —

"ये लोग आखिर क्या चाहते हैं? मुझे किडनैप किया गया, पर कैसा किडनैप? न कोई यातना, न कोई मांग... बल्कि मदद मिली, आद्या के जन्म तक साथ रहे। फिर क्यों लौटे? क्या वे आद्या को वापस ले जाना चाहते हैं? या कुछ अधूरा रह गया है?" उसकी उंगलियाँ स्टीयरिंग पर कस गईं।

"नहीं! मैं आद्या को अब नहीं जाने दूंगी। मेरी बेटी कोई नागरक्षिका नहीं!"

कार दौड़ती रही, लेकिन घर का कोई नामोनिशान नहीं था। साइड मिरर में देखा — खाली रास्ता। सांस कुछ हल्की हुई।

पर पीछे पलटते ही निशा की आँखें फटी की फटी रह गईं।

सनी की आँखें बंद थीं, चेहरा असहज रूप से शांत।

"सनी!" उसने धीरे से पुकारा, पर कोई जवाब नहीं।

हिस्स्स्स्स... शीशे के पास हलचल हुई।

आधे मानव-आधे नाग का भयावह स्वरूप धीरे-धीरे बढ़ रहा था, उसकी आँखें अंगारों की तरह जल रही थीं।

निशा की सांस अटक गई। हाथ स्टीयरिंग पर जम गया।

"ये वही है जिसने आद्या को पहली बार नागरक्षिका कहा था..." वह कुछ बोलने को थी कि आद्या जाग उठी — उसकी आँखें फिर नीली हो गईं।

नाग कार के शीशे के करीब आ रहे थे।

तभी पीछे से सनी की सख्त आवाज़ गूँजी — "पीछे हटो!"

सनी ने गरुड़ भस्म निकालकर मिरर में दिख रहे नाग पर फेंका। भभकते धुएँ के बीच वह नाग झटके में पीछे हट गया।

"आद्या को संभालो," सनी बोला और आद्या को निशा की गोद में थमाकर बाहर आया।

पर बाहर धुंध के भीतर अनगिनत आधे मानव-आधे नाग खड़े थे, उनकी नीली चमक में क्रोध साफ झलक रहा था।

सनी ने गरुड़ भस्म कसकर पकड़ लिया, लेकिन वह जानता था — इतनी थोड़ी सी भस्म से यह नागदल नहीं रुकेगा। यह लड़ाई केवल बाहर की नहीं, अंदर की भी थी।

कार का दरवाज़ा खुलते ही सनी चिल्लाया, "निशा! अंदर रहो! दरवाज़ा बंद रखना और आद्या को बाहर मत निकालना!"

निशा की आँखों में आंसू थे। वह चीखना चाहती थी, लेकिन आवाज़ गले में अटक गई।

कार के शीशे पर नागों की परछाइयाँ मंडरा रही थीं, हर पल नए खतरे और रहस्य के साथ।

...

1. आद्या के हाथों पर उभरता नागचिह्न उसके और नागलोक के बीच किस रहस्यमयी संबंध का संकेत देता है?

2. आधे मानव-आधे नाग का सच क्या है, और इसका सनी और निशा के परिवार से क्या गहरा नाता है?

3. सनी के पास मौजूद गरुड़ भस्म से क्या सच में आद्या और निशा को बचाया जा सकता है, या यह तो बस खतरे का पहला इशारा है?

आगे जानने के लिए पढ़ते रहिए "विषैला इश्क"