inteqam, bhag- 14 in Hindi Love Stories by Mamta Meena books and stories PDF | इंतेक़ाम - भाग 14

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इंतेक़ाम - भाग 14

एक दिन  निशा रसोई में काम कर रही थी उसकी सास अपने कमरे में थी, विजय ऑफिस गया हुआ था और रोमी वह भी घर में नहीं थी,,,,

तभी निशा की बेटी फ्रिज में से आइसक्रीम निकाल कर लाई और अपने भैया से कहने लगी कि भैया देखो मैं आइसक्रीम ले आई चलो अब हम आइसक्रीम खाते हैं,,,,,

तब उसके भैया ने कहा  गुनगुन तुम्हारी तबीयत पहले ही ठीक नहीं है तुम्हें हमेशा जुकाम रहता है और ऊपर से तुम आइसक्रीम खाने की जिद कर रही हो छोड़ो यह आइसक्रीम तुम यह नहीं खाओगी,,,,, 

यह  सुनकर गुनगुन जिद करते हुए बोली नहीं भैया मुझे आइसक्रीम खाना है प्लीज मुझे खाने दो,,,,,

यह सुनकर दीपू बोला ठीक है लेकिन इतनी सारी नहीं मैं तुम्हें थोड़ी सी निकाल कर दे देता हूं समझी तुम,,,,,

आगे दीपू कुछ कहता तभी गुनगुन सारी आइसक्रीम उनसे छीनकर भागते हुए बोली नहीं भैया मुझे पूरी खानी है,,,, 

उधर दीपू उसके पीछे भाग रहा था कि गुनगुन रुको मम्मा ने मना किया है ना तुम्हें कोई भी ठंडी चीज खाने के लिए तुम्हारी तबीयत अक्सर खराब रहती है और तुम आइसक्रीम खाने की जिद कर रही हो,,,,,

बच्चों की आवाज सुनकर निशा रसोई में सोच रही थी हो सकता है दोनों बच्चे खेल रहे हैं,,,,,

तभी भागती हुई गुनगुन आइसक्रीम लिए बाहर से अंदर हॉल में आती हुई रोमी से टकरा गई,,,,

रोमी से टकराने की वजह से सारी आइसक्रीम रोमी के कपड़ों पर गिर गई जिससे रोमी के कपड़े खराब हो गए,,,,,

यह देखकर गुनगुन काफी डर गई और डरते हुए रोमी को देखते हुए बोली सॉरी आंटी वह मैं,,,वह मैं,,, 

यह सुनकर रोमी गुस्से बोली दिखाई नहीं देता मेरे सारे कपड़े खराब कर दिए,,,,

यह कहकर उसने एक थप्पड़ गुनगुन के देने के लिए जैसे ही अपना हाथ उठाया वैसे ही उसका हाथ दीपू ने पकड़ लिया और बोला नहीं आंटी मेरी बहन को मारो मत उससे गलती से आइसक्रीम आपके कपड़ों पर गिर गई उसकी तरफ से मैं माफी मांगता हूं,,,,,,

यह सुनकर रोमी को और गुस्सा आ गया और उसने बाल पकड़कर उसने एक जोरदार धक्का दीपू के दे दिया और गुनगुन के बाल पकड़कर खींचते हुए बोली तुम्हें अभी मजा चखाती हूं मेरी इतनी महंगी ड्रेस खराब कर दी,,,,, 

यह  कहकर वह फिर गुनगुन के थप्पड़ देने के लिए जैसे ही अपना हाथ उठाया उसका हाथ निशा ने पकड़ा और गुस्से में उसका हाथ झटक ते हुए और गुनगुन को उसके चंगुल से छुड़ाकर दीपू को खड़ा करते हुए बोली तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुमने मेरे बच्चों पर हाथ उठाने की हिम्मत कि,,,,,,,

यह सुनकर रोमी गुस्से में बोली इन्होंने मेरे सारे कपड़े खराब कर यह तुम्हें पता है यह मेरी कितनी महंगी ड्रेस थी तुम जैसी भिखारीइन इतनी महंगी ड्रेस की कीमत क्या समझोगे रोमी गुस्से में बोली,,,,

यह सुनकर निशा गुस्से में बोली उनसे यह सब गलती से हुआ है और मेरे बच्चों ने अपनी गलती के लिए तुमसे माफी मांग ली फिर भी तुम ने उन्हें मारने की हिम्मत की,,,,,,,

तब रोमी बोली हां मारूंगी पता नहीं किस नाली के गंदे कीड़े हैं पता नहीं विजय का नाम हो रहा है और किस हरामि का खून इनकी रगों में दौड़ रहा हैं,,,,,

रोमी का इतना कहना था कि एक जोरदार तमाचा रोमी के गाल पर पड़ा, तमाचा देने के बाद निशा बोली खबरदार रोमी आज तक मैंने बहुत कुछ बर्दाश्त किया तुमने जो कहा मैंने बर्दाश्त किया लेकिन अब और नहीं मैं तुम्हारी जबान खींच लूंगी अगर तुमने कुछ और बोला तो,,,,,,,