भाग -6
रुक!!! कबीर की आवाज कमरे में गूँज गई आरव का हाथ हवा में ही रुक गया blade बस कुछ इंच दूर था
कबीर अचानक बनावटी दुखी चेहरा बनाकर आगे बढ़ा—
“रुक जा आरव मुझे मीरा से आखिरी बार कुछ बात करनी है”
आरव गुस्से में— कबीर! ये मजाक का टाइम नहीं है!
लेकिन कबीर उसकी बात ignore करके मीरा के सामने खड़ा हो गया
कबीर ने गहरी साँस ली और बोलना शुरू किया— बेचारी का ये हाल देखा नहीं जा रहा है वैसे तो ये पहले भी खड़ुस थी लेकिन जैसे भी थी हमारी साथी थी।
मीरा का इंसानी हिस्सा हलका-सा react हुआ entity चुप थी… जैसे observe कर रही हो
कबीर जारी रहा— हर वक्त सड़ी हुई शक्ल बनाकर घूमती रहती थी ,और तेरे जाने के बाद इतना सारा खाना कौन खाएगा? अकेले ही पुरा महिने का राशन खा जाती थी, अब कौन खाएगा😭
आरव— ये क्या कर रहा है
कबीर— अरे भाई, emotional moment है disturb मत कर
फिर वो थोड़ा और करीब आया— और बेचारी एक boyfriend भी नहीं बना सकी , बनाती भी कैसे तेरी शक्ल देखकर ही लड़के भाग जाते थे
अचानक कमरे में पूरी शांति छा गई
आरव… freeze।
मीरा… freeze।
और वो entity वो भी चुप हो गई जैसे कुछ समझने की कोशिश कर रही हो।
कबीर ऊपर से बकवास कर रहा था लेकिन अंदर ही अंदर नहीं क्योंकि उसके होंठ बहुत हल्के-हल्के हिल रहे थे
मंत्रोच्चारण, धीमा steady बिना आवाज के उसकी उंगलियाँ धीरे-धीरे पीछे की तरफ गईं बैग के अंदर और उसने एक छोटी-सी bottle पकड़ ली
एक सेकंड बस एक सही मौका entity का ध्यान थोड़ा सा ही हटा
और उसी पल
छपाक!! कबीर ने पूरी bottle मीरा के ऊपर फेंक दी
जैसे ही वो liquid मीरा के शरीर पर गिरा— एक जोरदार चीख पूरे कमरे में गूँज गई
“AAAAAAAHHHHH!!!”
मीरा जमीन पर गिर गई उसका शरीर बुरी तरह कांपने लगा entity की आवाज बदल गई- ये क्या है… ये क्या किया तुमने!!!
कबीर पीछे हटते हुए—Welcome to India… ये है गंगा जल 😏
जहाँ-जहाँ वो पानी गिरा था वहाँ से धुआँ उठने लगा मीरा के शरीर से काली परछाइयाँ अलग होने लगीं जैसे कोई जल रहा हो
आरव की आँखें चौड़ी हो गईं—तू… तू ये साथ लेकर आया था?
कबीर— भाई तू scientist है तो मैं भी किस फैमिली से हूँ याद है न basic cheezein साथ रखता हूँ 😌
entity अब पूरी तरह unstable हो चुकी थी— तुम मुझे ऐसे नहीं रोक सकते मैं मैं
उसकी आवाज टूटने लगी
मीरा की अपनी आवाज वापस आई— आरव अभी अभी मौका है
आरव तुरंत समझ गया उसने blade पर पकड़ मजबूत की
लेकिन इस बार उसका target मीरा नहीं था उसने जमीन पर एक नया symbol बनाना शुरू किया तेजी से बिना रुके
कबीर— ओह अब समझ आया तू क्या कर रहा है
अचानक entity हँसी - तुम सोचते हो… ये जीत है?
मीरा का चेहरा फिर से बदलने लगा— तुमने मुझे चोट पहुँचाई है लेकिन खत्म नहीं किया
कमरे की दीवारें फिर से हिलने लगीं आरव ने आखिरी line पूरी की symbol activate होने वाला था
मीरा बीच में थी entity आधी बाहर आधी अंदर
कबीर चिल्लाया— जल्दी कर!!! ये ज्यादा देर नहीं टिकेगा!!
आरव ने हाथ उठाया
लेकिन तभी मीरा ने उसकी तरफ देखा और धीरे से कहा
“अगर ये गलत हुआ तो मैं नहीं बचूँगी”
आरव की आँखें एक सेकंड के लिए हिल गईं और उसी पल
entity ने control वापस लेना शुरू किया
कमरा काँप रहा था दीवारों की दरारें बढ़ती जा रही थीं मीरा बीच में खड़ी थी आधी इंसान आधी अंधेरा आरव का हाथ हवा में रुका हुआ था बस एक activation बाकी था
कबीर - जल्दी कर आरव! ये ज्यादा देर hold नहीं करेगा!
आरव - अगर मैंने अभी activate किया तो मीरा भी trap में आ जाएगी
मीरा (कमजोर आवाज में) - करो मेरे बारे में मत सोचो
entity (हँसते हुए) - देखो इंसान खुद ही अपना फैसला आसान कर देता है
आरव की आँखें तेजी से चारों तरफ घूमीं दीवारें symbol गंगा जल के निशान और फिर उसकी नजर मीरा के पैरों पर गई जहाँ गंगा जल गिरा था वहाँ एक छोटा सा साफ दायरा बन गया था बाकी जगह अंधेरा था
आरव - कबीर! गंगा जल बचा है?
कबीर - थोड़ी सी क्यों?
आरव - मुझे 5 सेकंड चाहिए बस 5!
कबीर - भाई यहाँ EMI नहीं चल रही 5 सेकंड बहुत होते हैं!
आरव अचानक आगे बढ़ा entity गरजी
“तुम फिर गलती कर रहे हो!!”
मीरा का शरीर झटका खा रहा था आरव ने lightning speed में मीरा के चारों तरफ circle पूरा किया—
लेकिन इस बार खून नहीं गंगा जल से कबीर समझ गया
कबीर - ओह तू dual trap बना रहा है
आरव - Exactly.
entity चीखी— नहीं!!!
आरव ने जोर से हाथ नीचे मारा— Activate!
जमीन पर बना खून वाला symbol चमका और गंगा जल वाला circle भी activate हो गया दोनों के बीच मीरा खड़ी थी
कबीर (तेजी से बोलते हुए) - ये… ये उसे split कर रहा है!
आरव - हाँ entity को अंदर और बाहर दोनों जगह एक साथ नहीं रहने देगा
मीरा चीखी उसके शरीर से काली परछाइयाँ जबरदस्ती बाहर खींची जाने लगीं।
entity चिल्लाई— तुम मुझे बाँट नहीं सकते!!!
आरव - मैं तुझे बाँट नहीं रहा मैं तुझे अलग कर रहा हूँ।
एक तरफ मीरा गिरती हुई कमजोर।
दूसरी तरफ— काली entity जो बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी
लेकिन गंगा जल का circle उसे जला रहा था
अचानक— खून वाला symbol flicker करने लगा।
कबीर - ओह नहीं ये unstable हो रहा है!
आरव - hold करो इसे!
कबीर - मैं engineer हूँ भगवान नहीं!!
मीरा ने आखिरी ताकत से कहा
मीरा - आरव अभी अभी खत्म करो
आरव ने दाँत भींचे— उसने दोनों circles के बीच हाथ रखा
सीधे उस अंधेरे के अंदर।
कबीर - पागल हो गया है क्या!!!
आरव चिल्लाया— निकलजाआआ!!!
और जोर से हाथ झटका एक तेज़ रोशनी ने पुरे कमरे को घेर लिया साथ ही कानों को फाड़ देने वाली चीख और फिर
सब शांत मीरा जमीन पर गिरी हुई थी पूरी तरह normal उसकी आँखें वापस पहले जैसी हो गई उसकी साँसें steady
कबीर धीरे से बोला
कबीर - ये… सच में हो गया?
आरव चुप था वो सामने देख रहा था
जहाँ entity थी वहाँ अब कुछ नहीं था सिर्फ एक काला धब्बा… जो धीरे-धीरे दीवार में समा रहा था
कबीर - ये… भाग गया?
आरव धीरे से - नहीं, ये… shift हुआ है
तभी नीचे से आवाज आई राहुल की लेकिन इस बार
उसकी आवाज और गहरी थी
राहुल - अब सच में one left
कबीर - भाई ये level अभी खत्म नहीं हुआ🥺
आरव ने मीरा की तरफ देखा
फिर नीचे की तरफ
आरव - नहीं ये अभी शुरू हुआ है।