भाग - 4 धीरे-धीरे आवाज़ें वापस आने लगीं पहले एक हल्की सीटी जैसी गूंज फिर टूटती लकड़ियों की आवाज और फिर—किसी के खांसने की
कबीर ने आँखें खोलीं चारों तरफ धुआँ था दीवारें आधी टूट चुकी थीं
“अगर ये स्वर्ग है तो maintenance बहुत खराब है”
उसने उठने की कोशिश की—“आह… नहीं ये definitely स्वर्ग नहीं है”
थोड़ा आगे उसे आरव दिखा वो जमीन पर पड़ा था… बिल्कुल हिल नहीं रहा था।
कबीर घबराया—“आरव! ओए उठ! 😭 आरव तुम हमें ऐसे छोड़ कर नहीं जा सकते”
कबीर ने उसका pulse check किया धीमा लेकिन था “ठीक है तू अभी मरा नहीं है लेकिन अगर जल्दी नहीं उठा तो मैं तुझे खुद मार दूंगा”
उसने राहत की सांस ली लेकिन तभी उसे याद आयी मीरा की
कमरा अब खाली था वो entity गायब थी साथ में मीरा भी
सिर्फ एक चीज़ बची थी फर्श पर जला हुआ circle और उसके बीच में एक अजीब-सा निशान जैसे किसी ने अंदर से बाहर निकलने की कोशिश की हो
कबीर धीरे से बोला—“ये अच्छा sign नहीं है”
कुछ मिनट बाद आरव होश में आया उसने तुरंत पूछा “मीरा कहाँ है?”
कबीर—अगर मुझे पता होता तो मैं यहाँ खड़ा नहीं होता
आरव उठते हुए—“entity?”
कबीर—Gone या शायद upgraded version में चली गई
दोनों कुछ सेकंड चुप रहे फिर आरव ने कहा—हमें राहुल को check करना होगा
नीचे हॉल में राहुल अब भी उसी कुर्सी पर बैठा था लेकिन इस बार कुछ अलग था वो हिल भी नहीं रहा था
कबीर धीरे से पास गया— भाई अगर तू prank कर रहा है ना तो बता दूँ ये बहुत बुरा prank है
कोई जवाब नही आरव ने उसकी आँखों के सामने हाथ हिलाया कोई reaction नहीं फिर उसने उसकी गर्दन देखीएक काला निशान जैसे किसी ने अंदर से पकड़कर दबाया हो
अचानक राहुल का सिर धीरे-धीरे ऊपर उठा उसकी आँखें खुलीं पूरी तरह काली
कबीर पीछे हट गया— ओह ये तो हमने सोचा ही नहीं
राहुल की आवाज आई— तुमने सोचा ये खत्म हो गया?
आरव का चेहरा सख्त हो गया—नहीं मैंने सोचा ये बस शुरू हुआ है
राहुल हँसा लेकिन वो हँसी उसकी नहीं थी
“तुमने मेरे एक हिस्से को तोड़ा लेकिन अब आज़ाद हैं”
कबीर—मतलब… ये DLC pack में आया है क्या?
आरव ने उसे चुप कराया— “कितने हैं?”
राहुल की मुस्कान और चौड़ी हो गई— तुम गिन नहीं पाओगे
अचानक— ऊपर से एक हल्की-सी आवाज आई
जैसे कोई धीरे-धीरे चल रहा हो।
ठक… ठक…
कबीर—ये मीरा हो सकती है
आरव—या कुछ और
लेकिन तभी सीढ़ियों पर खून की एक पतली लकीर दिखी ताजा ऊपर की तरफ जाती हुई
आरव ने flashlight उठाई - हमें ऊपर जाना होगा
कबीर—हाँ… क्योंकि obviously हमने अभी तक काफी danger नहीं देखा
दोनों धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ने लगे पीछे राहुल अब भी बैठा था लेकिन उसकी मुस्कान अब और भी बड़ी हो चुकी थी
जैसे ही आरव और कबीर ऊपर पहुँचे दरवाज़ा अपने-आप बंद हो गया
अंदर दीवारों पर खून से कुछ लिखा था—
“ONE LEFT”
कबीर ने फुसफुसाया—“एक… क्या?”
तभी तभी से एक आवाज आई बहुत धीमी बहुत जानी-पहचानी “आरव…”
वो मीरा की आवाज थी लेकिन उसमें कुछ अलग लग रही थी
आरव ने धीरे से कहा—मीरा…?
और तभी flashlight blink हुईऔर एक सेकंड के लिए उनके सामने खड़ी आकृति दिखी आधा चेहरा मीरा का और आधा कुछ और
अगले एपिसोड में:क्या मीरा बच सकती है… या वो अब पूरी तरह बदल चुकी है?“ONE LEFT” का असली मतलब क्या है?और राहुल… क्या वो सिर्फ एक host है… या कुछ बड़ा?