----------------- टाम ज़िंदा है --------------17 वी किश्त पर आधारित....
कल की तरा आज भी वही से सूरज डूब रहा था। वही हलचल थी। बज़ारो मे भीड़ भड़का था। कोई इधर कोई उधर भाग रहा था। जिंदगी की भागदौड़ मे हम तन्हाई के सिवा कुछ नहीं लेते। "कया खरीद ते हो किसी गरीब के पास से, पता नहीं... जज्बात एक दिन का सास भी नहीं ले पाते... शायद। ललचारी देखी है आपनी, सब कुछ होते भी कुछ नहीं होता... बस यही सोच सब को खंगाल रही है... तोड़ रही है... एक शॉप मे बैठा हर कोई ऐसा लगा जैसे यही सोच रहा है। ये मेरी कल्पना थी या सच। जिंदगी कब कैसे आपने मंसूबो को पूरा करा लेतीं है।" एक चाये चाचा " किसी ने आवाज उच्ची मारी... " हाँ जरूर--" चाये की चुस्की लेते, मंज़ूर साहब ने कहा... " बहुत खूब कहना,एक शेयर अर्ज है,"--" आख़र तक वो साथ रहे, हमारे और उनके हाथो मे हाथ रहे, कमबख्त कब वो निकले, बेवफा एक मौत की तरा -----" चाचा की शॉप मे ताड़िया की जहन्नाहट थी। चाचा ने कहा " किधर रहे मंजूर सहाब " फिर चुस्की की लम्बी आवाज,
चुप, " चाचा आपना कोई ठिकाना है, जिधर मर्जी निकल जाओ... फिर खुद ही हस पड़ा। मै पांच साल बाद लौटा हूँ... ऐसे जैसे बम्बे की गलिया सकरी, दिल और भी सकरे हो गए। चाचा तेरे साथ वाला खाली तोड था प्लाट था। " फिर चाचा हसने लगे। ---" अब तो जहाँ पिशाब करने को भी जगह नहीं..." सारी शॉप हसने लगी। उसके बाद चुपी लग गयी। कयो मंजूर साहब जा चुके थे। एक शक्श बोला ---" चाचा बंदा बला ही है, रौनक लाकर चुप करा के चला गया।
-----" हाँ बेटा ऐसा ही है आपना मंजूर सहाब.... " चाचा जैसे सीना तान करके खड़ा हो। एक दम से सनाटा कयो चार वर्दी वाले जीप से उतर चाचा की दुकान मे।
" चाचा वो करीम रोल और चार कप चाये दो.... " जो वहा गुंडा टाइप लडके थे, चले गए थे। किसी डर के कारण। ये कोई समझ ही नहीं सका, ये कोड थे... एक कप चाये उन तक पहुंच गयी। " मतलब आज कुछ बम्बे के लोकल इलाके मे कुछ बड़ा होने वाला है। ये खबर उन पुलिस वालो के पास थी।
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" भवानी सिंह हाजिर है, सर " वायरल मेसिज था। सब पता चलने के बाद पुलिस गश्त लोकल बम्बे की सरहदी दादरी इलाके मे गश्त कर रही थी। तभी किसी और से धाएं धाएं का खौफ शब्द सास की तरा निकला। जलती हुई रिवाल्वर से दो कारो की लोहे की परते उदेड़ कर अमरीश के बढिगार्ड मोके पर ही दम तोड गए। बस उस वक़्त अमरीश साहब नहीं थे उनके जवाई थे जो बहुत जख्मी हालत मे थे... गोली कहा से आयी किधर चली गयी।कुछ भी कहना अभी कोई छ्ल की प्रकिति या दुश्मनी कुछ भी कह सकते हो। भवानी सिंह मोके पे हाजिर थे... ज़ब एम्बुलेंस की चीखे हॉस्पिटल की गुहार लगा रही थी। रास्ता दे रहे सब के सब..... पर एक ट्रक ने आकर एक ऐसी एम्बुलेंस मे टकर मारी... उसमे अमरीश के दोहते एक लड़का जवाई मोके पर ही मारे गए। ये कैसा अपसुगन था। हर कोई ठहरे हुए था।
वक़्त जैसे थम गया था......... (चलदा )