Devil, You Are Mine - 10 in Hindi Love Stories by Miss Anonymous books and stories PDF | Devil, You Are Mine - 10

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Devil, You Are Mine - 10

आगे...!

श्रुति के सामने वो मास्क वाला लड़का था। श्रुति उसे घूरते हुए बोली- देखिए मिस्टर मैंने ये टैक्सी रोकी है। तो बेहतर होगा आप ऊतर जाएं।।

वो लड़का ठीक से सिट पर बैठते हुए शांति से- टैक्सी मैंने रोकी है। तो जिसे यहां से जाना चाहिए वो तुम हो।

श्रुति ने दांत पीस लिए, फ्लाइट थोड़ी डिले हो गई थी जिस वजह से शाम हो गई थी। श्रुति वैसे तो उससे और झगड़ना चाहती थी मगर समय देखकर उसे ये ठीक नहीं लगा। वैसे भी उसे होटल पहुंचने में एक से डेढ़ घंटे लगने वाले थे।। अगर ये टैक्सी चली गई तब पता नहीं उसे कोई गाड़ी कब मिलेगी।

ये सब सोचकर श्रुति बची हुई जगह पर बैठते हुए बोली- मैं कहीं नहीं जाने वाली...।

टैक्सी ड्राइवर अपने सर को पकड़ कर बोला- अरे मैडम जी- सर जी आप दोनों बैठो...हम तुम दोनों को तुमरी मंजिल तक पहुंचाए देंगे। तो बताओ तुम्रे दुनों को कहां जाना है?

दोनों एक साथ- होटल कोहिनूर... अपनी बात कहकर दोनों एक-दूसरे को घूरने लगे। ड्राइवर खुश होते हुए- देखा आप दोनों की मंजिल एक है फिर भी झगड़ रहे थे।। सफ़र साथ तय करिए इसके माइने ही बदल जाएंगे।वो टैक्सी आगे बढ़ा देता है।।

वो लड़का और श्रुति दोनों अपने अपने में बिजी थे। वो लड़का अपना फोन चला रहा था तो श्रुति बाहर के नज़ारे देख रही थी।

टैक्सी ड्राइवर अचानक बोला- का मैडमजी पहली बार आई हो का इहां?

श्रुति मुस्कुराई और एक गहरी सांस लेकर बोली- जी नहीं हम तो हर साल कम-से-कम एक बार बनारस जरूर आंतें हैं। हमारा बस चलता तो हम यहीं बस जाते मगर हमारे परिवार वाले यहां नहीं आना चाहते हैं। उसकी आवाज़ में थोड़ी मायूसी थी।

टैक्सी ड्राइवर- काहे मैडम? इस पावन धरती पर काहे नहीं आना चाहते?

श्रुति के होंठों पर एक दर्द भरी मुस्कान थी। वो बाहर देखते हुए बोली- उनका कहना है कि इस जगह ने उनसे उनका सबकुछ छिन लिया है....! फिर मन में- मगर मुझे इस जगह ने कुछ बहुत खास दिया।।

उसकी गोल- गोल बातें ड्राइवर के समझ से बाहर थी। वो आगे कुछ न कहते हुए ड्राइव करने लगा और रेडियो ऑन कर दिया।

श्रुति बाहर देखते हुए बज रहे गाने को सुनने लगी। वहीं वो लड़का चुपचाप अपने आंखें बंद करके सर सीट पर टिका दिया‌।

गाने सुनते हुए श्रुति की आंख लग गई।पूरे फ्लाइट के दौरान वो गाने सुनते हुए आई थी और जैसे ही उसकी आंख लगी मगर उसे उस मास्क वाले लड़के ने जगा दिया था।।

करीब दो घंटे बाद,
           वो टैक्सी एक बड़े से बिल्डिंग के गेट के सामने रूकती है। वो लड़का कार से उतरकर अपना लगेजा लेता है और टैक्सी ड्राइवर को पैसे देकर होटल के अंदर चला गया।

वहीं वो टैक्सी ड्राइवर थोड़ा तेज आवाज में बोला- मैडमजी उठिए हम पहुंच गए हैं।

श्रुति उसकी आवाज़ सुनकर आंखों खोलती है। फिर आसपास देखकर वो अपने हाथों को आपस में रब करके अपने फेश पर रखती है। फिर पर्श से पैसे निकाल कर टैक्सी ड्राइवर को देती है और अपना बैग कंधे पर डालकर टैक्सी से उतर गई। टैक्सी वाला वहां से निकल गया।

श्रुति मुस्कुराई और आगे बढ़ गई। पता नहीं इस जगह में ऐसा क्या था जो उसकी होंठों पर से हंसी जाने का नाम ही नहीं लेती थी। वो इस जगह में दिल से खुश होती थीं।ना की लोगों को दिखाने के लिए।।

वो होटल के बड़े से गार्डन को देखने हुए होटल की बिल्डिंग ओर जा रही थी। कुछ देर बाद उसने रिशेप्शन पर खड़ी लड़की से रूम कार्ड ली और वहां से लिफ्ट की तरफ़ बढ़ गई। ये देखकर की लिफ्ट बंद होने वाली है वो तेज़ी से उस ओर बढ़ी और हाथ से गेट बंद होने से रोक दिया।।

लिफ्ट की गेट वापस खुल गई। वो बिना किसी पर ध्यान दिए अंदर चली गई और एक तरफ खड़ी हो गई। दरअसल वो रूम कार्ड देख रही थी... क्योंकि वो हरबार से कुछ अलग था।।

एक मिनट बाद उसने सर उठाकर ऊपर देखा तो सामने वही मास्क वाला लड़का और उसके साथ एक लड़की खड़ी थी।

श्रुति की नजर उसके आईडी कार्ड पर गई। वो उसे देखकर मन में बोली- ओह शायद ये नई मैनेजर है। मगर क्या इसमें दिमाग़ नहीं है। ये किस तरह से कपड़े पहने है और चेहरे पर। इतना मेकअप क्यों पोत रखा है। ये सब सोचते हुए उसके होंठों का पाउट बना हुआ था जिससे वो बहुत क्यूट दिख रही थी जिसका पता उसको खुद भी नहीं था।।

वहीं वो होटल मैनेजर काफी गुस्से में थी। उसने बहुत मुश्किल से इस लड़के को सेडियुस करने का मौका मिला था जिसे उसने श्रुति के वजह से खो दिया था।।  उसे एक स्टाफ मेंबर से पता चला था की वो बहुत अमिर है और विदेश में रहता है....उसे वैसे भी ये पोस्ट टेमप्रोरेरी मिली थी। वो एक मामूली सी वर्कर थी जो बस किसी तरह अमिर होना चाहती थी। उसे श्रुति पर हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था मगर वो कुछ कर नहीं सकती थी।

वहीं वो मास्क वाला लड़का जब से श्रुति अंदर आई थी। उसको इग्नोर कर रहा मगर अचानक उसकी नज़र उसके चेहरे पर पड़ी जो पाउट में बहुत क्युट लग रहा था। मास्क के पिछे उसके होंठों पर हल्की सी स्माइल आ गई। जिसका एहसास होते ही उसने श्रुति के तरफ़ से अपनी नजरें हटा ली।

कुछ मिनटों बाद वो लिफ्ट उस होटल के सबसे लगजूरियस फ्लोर पर रूकी। इस फ्लोर पर केवल दो कमरें थे। जो काफी बड़े और खूबसूरत थे। ये केवल बहुत ही ज्यादा इम्पोर्टेंट लोगों के लिए था। यहां पर रहने वाले लोग या तो बहुत अमिर होते थे या किसी खास ओहदे पर होते थे।

श्रुति को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी की वो को वी.वी. आई . सूट है। उसने तो बस  नोर्मल लोगों की तरह कुछ दिन के स्टे के लिए रूम बुक किया था।वो भी अपने खुद के पैसों से क्योंकि उसका मानना था कि जब वो कमाती नहीं है तो फिजूल खर्च भी उसे नहीं करना चाहिए।। 

उसने चुपचाप की कार्ड से रूम नंबर मिलाया और रूम अनलॉक कर उसके अंदर चली गई और दोनों के मुंह पर दरवाजा बंद कर दिया।।

उसके जस्ट सामने के कमरे पर रूम नंबर 1501 था। जो की उस मास्क वाले लड़के का था। मैनेजर को फुल इग्नोर मारकर वो लड़का अपना लगेज लेकर अपने कमरे में गया और उसके मुंह पर दरवाजा बंद कर दिया।

वो लड़की पैर पटकते हुए वहां से निकल गई। कमरे में अपना लगेज एक तरफ कर उस लड़के ने पानी का‌ बोटल उठाया और अपना मास्क निकाल कर पानी पिने लगा।।
पानी पिकर उसने बोटल रखा और खुद से कहा- रावत अब तुम्हें इशान मलिक से कौन बचाएगा??? कहते हुए उसका चेहरा बहुत कोल्ड था।

वहीं श्रुति ने बैग उतारकर सोफे पर फेंका और अपना सर्ग उतार कर सोफे पर फेंक दिया। उसने बैग से एक शोर्ट्स और टी शर्ट निकाला और वॉशरूम में चली गई। कुछ देर बाद वो बाहर आई और बिस्तर पर औंधे मुंह गिर गई।

To be continued.....