Ishq aur Ashq - 70 in Hindi Love Stories by Aradhana books and stories PDF | इश्क और अश्क - 70

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इश्क और अश्क - 70

अगस्त्य का यह रूप कोई नया नहीं था…
यह वही था, कोई अलग इंसान नहीं।
और चाहे अगस्त्य हो या वर्धन, दोनों अपनी ज़िद के पक्के थे…
इसका मतलब था—सय्युरी को अगस्त्य के सवालों के जवाब देने ही होंगे।
सय्युरी ने धीरे से कहा,
“ठीक है… जाओ फिर।”
अगस्त्य की आँखों में दृढ़ निश्चय जाग रहा था…
और उसने सीधे पूछा,
“मुझे वो रास्ता बताओ, जिससे प्रणाली पारस के लिए गरुड़ पुष्प लेने गई थी!”
सय्युरी अजीब सा मुँह बनाते हुए उसकी तरफ देखी—
“तुम्हें उस रास्ते से क्यों जाना है?”
अगस्त्य के हाथ धीरे से कस गए…
उसकी साँसें तेज हो गईं… और आँखों में एक ऐसी ज़िद की चमक थी—
जो सिर्फ एक ही बात कह रही थी—रात्रि के लिए कोई समझौता नहीं।
सय्युरी उसे देख रही थी… जैसे परख रही हो—
यह इंसान सिर्फ दृढ़ निश्चयी ही नहीं…
बल्कि उसके भीतर एक ऐसी आग भी जल रही है, जो उसकी सीमाएँ तोड़ देगी।
“भला एक राजा को कब से अपने राज्य में जाने के लिए किसी की मदद की ज़रूरत पड़ने लगी…
तुम्हारा अपना घर है… हक़ से जाओ…”
—सय्युरी ने बहुत ही आत्मविश्वास के साथ कहा।
उसकी आवाज़ में यक़ीन था…
जैसे वह केवल कह नहीं रही थी… बल्कि उसे उसकी पहचान याद दिला रही थी।
अगस्त्य की आँखें एक पल के लिए उस पर टिक गईं…
फिर उसने तेज साँस भरी—
“मैं कोई राजा नहीं हूँ उस जगह का…
मेरा कोई रिश्ता नहीं है उस जगह से…”
—उसने गुस्से से कहा।
और दो कदम पीछे हट गया…
जैसे वह उस सच से भी दूर जाना चाहता हो…
जो उसके भीतर कहीं दबा हुआ था।
सय्युरी धीरे से उसके पास आई…
और उसके कंधे पर हाथ रख दिया—
“उस जगह को तुमने त्यागा है…
उस जगह ने कभी तुम्हें त्यागा ही नहीं…”
उस स्पर्श में कोई ज़ोर नहीं था…
पर उसकी बात ने सीधे उसके भीतर कुछ हिला दिया।
अगस्त्य की नज़र झुक गई…
उसकी मुट्ठी धीरे से बंध गई…
सय्युरी ने उसकी ओर देखते हुए फिर कहा—
“तुम कभी आम थे ही नहीं…
तो अगर तुम्हें सच में गरुड़ लोक जाना है…
तो अपनी शक्तियों का आवाहन करो…”
कुछ पल के लिए सब कुछ शांत हो गया…
अगस्त्य समझ चुका था—
इंसानों की तरह गरुड़ लोक जाना संभव नहीं है।
यह रास्ता… अलग था।
और शायद… वह भी।
उसने धीरे से आँखें बंद कीं…
अंदर एक अजीब सी कसक थी—
जैसे वह सिर्फ शक्तियों को नहीं…
अपने सच को जगाने जा रहा हो।
न चाहते हुए भी…
उसने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया—
उसकी साँसें गहरी होने लगीं…
उसके आस-पास की हवा भारी होने लगी…
और अगले ही पल—
जैसे उसके अंदर दबा हुआ कुछ…
जाग उठा।



अगस्त्य ने झटके से अपनी आँखें खोली…
आँखें बंद करके अपनी साँसों को संभालने की कोशिश की।
“नहीं… मैं अपनी शक्तियाँ नहीं इस्तेमाल कर सकता…
इन शक्तियों की वजह से आज मेरी और Ratri की कहानी इतनी दर्द भरी है…”

—अगस्त्य ने अपने कान बंद करते हुए आँखें मींच लीं,
जैसे वह अपने ही अतीत से बचना चाहता हो…
उसकी उँगलियाँ काँप रही थीं, और सीने में उठता दर्द उसके हर शब्द में साफ झलक रहा था।

तभी उसके कानों में सिसकियाँ गूँजने लगीं…
दर्द भरी, टूटती हुई आवाज़ें—
“मैं तुम्हें कभी याद नहीं करना चाहती…
मैं चाहती हूँ… मैं तुम्हें भूल जाऊँ…”
इन शब्दों के साथ ही badalon ke garajne ki awaaz गूँज उठी,
जैसे प्रकृति भी उस दर्द की गवाह हो,
जैसे आसमान भी उनके बिछड़ने का शोक मना रहा हो।
अगस्त्य का चेहरा कस गया…
उसकी भौंहें सिकुड़ गईं, साँसें तेज हो गईं…
उसने ज़ोर से सिर हिलाया—


“नहीं! नहीं करूँगा मैं ऐसा कुछ…”
Sayyuri उसके पास आई, उसकी आवाज़ में एक अजीब सा विश्वास था—
एक ऐसा विश्वास जो सच को छुपाता नहीं, बल्कि उसे सामने लाता है।
“Agastya… Garud lok सालों से तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है…
वहाँ की स्वर्ण दीवारें, वो महल… सब तुम्हारे इंतज़ार में हैं…
तुम राजा हो वहाँ के…”
अगस्त्य ने तुरंत उसकी बात काट दी,
उसकी आँखों में दर्द और इनकार साफ था—
“वहाँ का राजा Kanishk है…”
उसकी आवाज़ में सिर्फ सच नहीं,
बल्कि अपनी पहचान से भागने की एक बेचैन कोशिश भी थी,
जैसे वह उस जिम्मेदारी से दूर जाना चाहता हो जो कभी उसकी थी।
इधर A. V.
Hospital के corridor में A. V. बेचैनी से इधर-उधर चल रहा था।
ICU के बाहर जलती हुई red light हर गुजरते पल के साथ उसकी बेचैनी बढ़ा रही थी।
हर बीतता सेकंड उसे भारी लग रहा था, मानो समय भी थम-सा गया हो।
उसने अपने हाथों को जोड़कर आँखें बंद कीं,
जैसे किसी अनजानी शक्ति से प्रार्थना कर रहा हो—
“Ratri… तुम्हें कुछ नहीं होगा…
Agastya तुम्हें ज़रूर बचा लेगा…”
उसकी आवाज़ धीमी थी, पर विश्वास से भरी हुई…
जैसे वह खुद को ही दिलासा दे रहा हो।
तभी ICU का दरवाज़ा हल्का सा खुला,
और एक doctor बाहर आया।
A. V. तुरंत उसकी तरफ बढ़ा—
“Doctor, Ratri कैसी है?”
Doctor का चेहरा गंभीर था—
“उनकी condition अभी भी critical है…
अगले कुछ घंटे बहुत important हैं।”
A. V. ने गहरी साँस ली,
उसकी नज़र ICU के शीशे पर टिक गई,
जहाँ machines के बीच Ratri ज़िंदगी के लिए लड़ रही थी…
और कहीं दूर, Agastya अपने अतीत और अपनी पहचान से।