अधूरी मोहब्बत — अध्याय 7: त्याग और तक़दीर ✨
अस्पताल की सफेद दीवारें और दवाइयों की तीखी गंध अर्जुन को बेचैन कर रही थी। समीर अंदर ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रहा था और बाहर राधा टूटी हुई हालत में बेंच पर बैठी थी। उसके आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
अर्जुन आगे बढ़ा और डॉक्टर से कहा, "मेरा ब्लड ग्रुप समीर से मैच करता है, आप मेरा खून ले सकते हैं।"
राधा ने चौंककर अर्जुन की तरफ देखा। उसकी आँखों में कृतज्ञता (gratitude) भी थी और एक गहरा पछतावा भी। जब अर्जुन स्ट्रेचर पर लेटा समीर को खून दे रहा था, तो उसे महसूस हुआ कि प्यार सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं है; कभी-कभी प्यार का मतलब उस इंसान की खुशी की रक्षा करना भी होता है जिसे आप चाहते हैं, भले ही वह खुशी किसी और के साथ हो।
करीब दो घंटे बाद डॉक्टर ने आकर खबर दी, "समीर अब खतरे से बाहर हैं। सही समय पर खून मिल जाने की वजह से उनकी जान बच गई।"
राधा ने राहत की सांस ली और अनजाने में ही अर्जुन का हाथ थाम लिया। पर अगले ही पल उसे अपनी मर्यादा का अहसास हुआ और उसने हाथ पीछे खींच लिया।
अगले कुछ दिन अर्जुन अस्पताल में ही रुका रहा। उसने समीर की देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ी। जब समीर को होश आया, तो उसे सब सच पता चला। वह अर्जुन का शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहा था। लेकिन वह यह नहीं जानता था कि जिस शख्स ने उसकी जान बचाई है, वही उसकी पत्नी का पहला और सच्चा प्यार भी है।
एक शाम, जब समीर सो रहा था, राधा और अर्जुन अस्पताल की बालकनी में खड़े थे। डूबता हुआ सूरज क्षितिज पर लालिमा बिखेर रहा था।
"तुमने ऐसा क्यों किया अर्जुन?" राधा ने धीरे से पूछा। "तुम चाहते तो वहाँ से जा सकते थे।"
अर्जुन ने दूर देखते हुए जवाब दिया, "राधा, मैंने तुमसे मोहब्बत की है, कोई सौदा नहीं। तुम्हारी माँग का सिंदूर सलामत रहे, यही मेरी मोहब्बत की जीत है। अगर आज समीर को कुछ हो जाता, तो तुम कभी खुद को माफ नहीं कर पातीं, और मैं तुम्हें टूटते हुए नहीं देख सकता।"
राधा की आँखों से एक आँसू छलक कर नीचे गिरा। उसने महसूस किया कि अर्जुन का व्यक्तित्व उसके प्यार से भी कहीं ज्यादा ऊंचा है।
तभी समीर की आवाज़ अंदर से आई। वह राधा को पुकार रहा था। राधा जाने के लिए मुड़ी, पर एक पल के लिए रुकी और अर्जुन की ओर बिना देखे कहा, "अर्जुन, शायद इस जन्म में हम सिर्फ एक-दूसरे की यादों में रहने के लिए ही बने थे।"
अर्जुन वहीं खड़ा रहा। उसने देखा कि राधा समीर के पास जाकर उसका हाथ थाम लेती है। उसे अहसास हुआ कि उसने आज अपनी मोहब्बत को पूरी तरह से खो दिया है, लेकिन अपनी इंसानियत को जीत लिया है।
वह चुपचाप अस्पताल से बाहर निकल आया। ठंडी हवा के झोंके ने उसका स्वागत किया। उसके चेहरे पर अब कोई मलाल नहीं था, बस एक सुकून भरी मुस्कान थी।
पर क्या कहानी यहीं खत्म हो गई?
कुछ महीनों बाद अर्जुन के घर एक लिफाफा आया, जिसमें समीर की तरफ से एक खत था। उस खत में कुछ ऐसा लिखा था जिसने अर्जुन के पैरों तले ज़मीन खिसका दी।
क्या समीर को सच का पता चल गया था? और क्या वह राधा को आज़ाद करने वाला था?
जानने के लिए पढ़ें — अध्याय 8 ✨📖
अध्याय 7 का शीर्षक: त्याग की जीत (The Victory of Sacrifice)