पिछले अध्याय में राधा ने अर्जुन को सच बता दिया… उसकी शादी हो चुकी थी।
अर्जुन के दिल में उठी उम्मीद एक पल में टूट गई।
दोनों जानते थे उनका प्यार सच्चा था, मगर किस्मत ने उनका साथ नहीं लिखा था।
अब सवाल था — क्या ये जुदाई हमेशा के लिए थी, या कहानी में अभी कोई मोड़ बाकी था… 💔
अर्जुन आसमान की तरफ देखता रहा। उसकी आँखों में नमी थी, पर आँसू बाहर नहीं आ रहे थे। राधा की आवाज़ अब भी उसके कानों में गूंज रही थी — “मैं इस रिश्ते को नहीं तोड़ सकती…”
वह कुछ देर वहीं खड़ा रहा, फिर धीरे-धीरे कदम बढ़ाकर वहाँ से चल पड़ा। हर कदम उसे भारी लग रहा था, जैसे दिल पर बोझ बढ़ता जा रहा हो।
रास्ते भर अर्जुन खामोश रहा। आसपास की भीड़, गाड़ियों का शोर… सब कुछ उसे दूर-दूर सा लग रहा था। उसे याद आया वही रास्ता, जहाँ कभी वह और राधा साथ चलते थे, छोटी-छोटी बातों पर हँसते थे। आज वही रास्ता उसे खाली लग रहा था।
घर पहुँचकर उसने दरवाज़ा बंद किया और बिना लाइट जलाए कुर्सी पर बैठ गया। कमरे में अंधेरा था, लेकिन उसके दिल में उससे भी ज्यादा सन्नाटा था। उसने धीरे से अपना फोन निकाला और राधा की पुरानी तस्वीर देखने लगा। उसकी मुस्कान देखकर अर्जुन की आँखें भर आईं। उसने तस्वीर को देखते हुए कहा, “काश… सब कुछ पहले जैसा हो सकता।”
रात भर अर्जुन करवटें बदलता रहा। हर बार आँख बंद करता, राधा का चेहरा सामने आ जाता। उसे समझ आ रहा था कि राधा ने जो कहा, वह गलत नहीं था। वह अपने नए रिश्ते की जिम्मेदारी निभा रही थी। लेकिन दिल था कि मानने को तैयार नहीं था।
सुबह होते ही अर्जुन बाहर निकल गया। बिना सोचे वह उसी पार्क में पहुँच गया, जहाँ दोनों अक्सर मिला करते थे। वही बेंच खाली पड़ी थी। अर्जुन जाकर बैठ गया और दूर पेड़ों को देखने लगा। हवा का हल्का झोंका आया, जैसे पुरानी यादों को फिर से जगा गया हो।
उसी वक्त पास में खेलता एक छोटा बच्चा गिर गया। अर्जुन तुरंत उठा और उसे संभालने लगा। बच्चा रोते-रोते अचानक मुस्कुरा दिया। उस मासूम मुस्कान ने अर्जुन के दिल को हल्का सा सुकून दिया। उसे लगा कि जिंदगी में दर्द के साथ-साथ छोटी-छोटी खुशियाँ भी होती हैं, बस उन्हें महसूस करना पड़ता है।
अर्जुन ने गहरी साँस ली और आसमान की तरफ देखा। उसने मन ही मन कहा, “शायद कुछ रिश्ते साथ नहीं चल पाते… पर दिल से कभी खत्म नहीं होते।”
उस दिन अर्जुन ने खुद को संभालने का फैसला किया। उसने तय किया कि वह अपने दर्द को अपनी कमजोरी नहीं बनने देगा। वह काम में ध्यान देने लगा, दोस्तों से मिलने लगा, लेकिन दिल के एक कोने में राधा की याद हमेशा के लिए बस गई थी।
उधर राधा भी अपनी नई जिंदगी में खुद को ढालने की कोशिश कर रही थी। लेकिन कभी-कभी अचानक उसे अर्जुन की याद आ जाती। वह समझ चुकी थी कि कुछ फैसले सही होते हुए भी दिल को चोट दे जाते हैं।
शाम ढल रही थी। आसमान नारंगी रंग में रंग गया था। अर्जुन ने आखिरी बार ऊपर देखा और हल्की सी मुस्कान दी। दर्द अब भी था, लेकिन उसके साथ एक अजीब सी शांति भी थी।
उसे समझ आ गया था कि कुछ रिश्ते साथ नहीं चलते, पर दिल में हमेशा जिंदा रहते हैं। उसने धीरे से खुद से कहा, “राधा… तुम मेरी कहानी का हिस्सा रहोगी, भले ही मेरी जिंदगी का नहीं।”
अर्जुन वहाँ से उठकर आगे बढ़ गया। उसके कदम धीमे थे, लेकिन इस बार उनमें टूटन कम और हिम्मत ज्यादा थी।
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी…
अर्जुन आगे बढ़ तो गया, लेकिन दिल के सवाल अभी भी अधूरे थे।
क्या किस्मत फिर से राधा और अर्जुन को आमने-सामने लाएगी… या उनकी राहें हमेशा के लिए अलग हो जाएँगी?
जानने के लिए पढ़ें — अध्याय 6 ✨📖