यह “अधूरी मोहब्बत” का तीसरा अध्याय है। पिछले अध्याय में आपने देखा कि दूरी के बावजूद राधा और अर्जुन एक-दूसरे को भूल नहीं पाए। समय आगे बढ़ गया, लेकिन उनकी यादें अब भी उनके दिलों में जिंदा थीं। शायद किस्मत अभी भी उनकी कहानी को एक नया मोड़ देना चाहती थी।
समय धीरे-धीरे बीतता गया। राधा अब पहले से ज्यादा शांत रहने लगी थी। वह अपने काम और जिम्मेदारियों में खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करती, लेकिन कभी-कभी अचानक अर्जुन की याद उसके दिल को छू जाती।
एक दिन शाम को राधा अपनी सहेली के साथ मंदिर गई। वह मन ही मन थोड़ा सुकून ढूंढ रही थी। मंदिर का शांत वातावरण, घंटियों की आवाज और अगरबत्ती की खुशबू उसके मन को थोड़ा सुकून दे रही थी।
राधा ने भगवान के सामने हाथ जोड़कर आँखें बंद कर लीं। उसके मन में कई भावनाएँ उमड़ रही थीं। उसने बस यही प्रार्थना की कि उसकी जिंदगी में जो भी हो, उसे स्वीकार करने की ताकत मिले।
जब उसने आँखें खोलीं और पीछे मुड़ी, तो सामने खड़ा चेहरा देखकर वह कुछ पल के लिए ठिठक गई।
वह अर्जुन था।
राधा को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। इतने सालों बाद अचानक उसे अपने सामने देखकर उसके दिल की धड़कन तेज हो गई।
अर्जुन भी राधा को देखकर कुछ पल के लिए चुप रह गया। शायद दोनों ही समझ नहीं पा रहे थे कि इतने समय बाद क्या कहें।
कुछ देर की खामोशी के बाद अर्जुन ने धीरे से कहा,
“कैसी हो राधा?”
राधा ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया,
“ठीक हूँ… तुम कैसे हो?”
दोनों मंदिर के बाहर सीढ़ियों पर बैठ गए। कुछ देर तक वे बस पुराने दिनों को याद करते रहे। बचपन की बातें, स्कूल की शरारतें और वह पार्क जहाँ वे अक्सर साथ बैठा करते थे।
राधा को याद आया कि कैसे अर्जुन छोटी-छोटी बातों पर उसे हँसाने की कोशिश करता था। वह याद करके हल्का सा मुस्कुरा दी।
अर्जुन ने वह मुस्कान देख ली। उसने धीरे से कहा,
“तुम आज भी पहले जैसी ही लगती हो।”
राधा ने उसकी बात सुनकर नजरें झुका लीं। उसके दिल में कई भावनाएँ एक साथ उमड़ रही थीं, लेकिन वह उन्हें शब्दों में नहीं कह पा रही थी।
कुछ देर बाद अर्जुन ने धीमी आवाज में पूछा,
“राधा… क्या तुम्हें कभी मेरी याद आती है?”
राधा ने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में हल्की नमी थी। उसने धीरे से कहा,
“कुछ यादें ऐसी होती हैं जो कभी भूलती नहीं।”
यह सुनकर अर्जुन कुछ पल के लिए चुप हो गया। शायद दोनों ही समझ रहे थे कि समय बहुत बदल चुका है।
मंदिर की घंटियाँ फिर से बजने लगीं। शाम ढलने लगी थी। राधा उठकर जाने लगी।
अर्जुन ने बस इतना कहा,
“अपना ख्याल रखना।”
राधा ने हल्की मुस्कान दी और धीरे-धीरे वहाँ से चली गई।
अर्जुन वहीं खड़ा उसे जाते हुए देखता रहा। उसके मन में कई सवाल थे—
क्या उनकी कहानी सच में खत्म हो चुकी है, या किस्मत अभी भी उनके लिए कुछ और लिख चुकी है?
राधा बिना पीछे देखे वहाँ से चली गई।
अर्जुन देर तक वहीं खड़ा उसे जाते हुए देखता रहा।
उसके मन में बस एक ही सवाल था—
क्या यह मुलाकात सिर्फ एक इत्तेफाक थी… या किस्मत
उनकी अधूरी मोहब्बत को फिर से पूरा करना चाहती है?
आगे क्या होगा जानने के लिए पढ़ें – “अधूरी मोहब्बत Chapter 4”. 📖💔