Episode 4: जाल बिछ चुका है
रात गहरी हो चुकी थी।हवेली के गलियारे अब और भी सुनसान लग रहे थे।भार्गवी अपने कमरे में वापस आ चुकी थी—
लेकिनउसकी आँखों में नींद नहीं…योजना चल रही थी।वो खिड़की के पास खड़ी थी,जब अचानक—
📱 फोन वाइब्रेट हुआ।
उसने तुरंत फोन उठाया।स्क्रीन पर कोई नाम नहीं था।बस एक नंबर।उसने बिना हिचक कॉल रिसीव की।
“हेलो…”दूसरी तरफ से धीमी, लेकिन सख्त आवाज़ आई—“हवेली में घुस गई हो…”भार्गवी की आँखें हल्की सिकुड़ीं।“हाँ।
”“अब बस…शिकार के लिए जाल बिछाना बाकी है।”कुछ सेकंड की खामोशी।“और याद रखना—एक गलती… और सब खत्म।”कॉल कट।भार्गवी ने फोन नीचे किया।उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आई।
👉 “खेल शुरू हो चुका है…”सुबह—हवेली का माहौल पहले जैसा ही था,लेकिन भार्गवी के लिए अब हर चेहराएक शक था।वो सीढ़ियों से नीचे उतर रही थी,तभी—“दीदी…”एक धीमी, मासूम आवाज़ सुनाई दी।भार्गवी रुकी।उसने मुड़कर देखा—एक लड़का…करीब 20–22 साल का…आँखों में बचपना,चेहरे पर हल्की मुस्कान।“आप नई आई हो ना…?
”वो धीरे-धीरे उसकी तरफ आया।“मेरा नाम… मिहान है।”भार्गवी की नजर एक पल के लिए नरम पड़ गई।“मिहान…”तभी पीछे से एक नौकरानी फुसफुसाई—“छोटे मालिक हैं…थोड़े… अलग हैं।
”भार्गवी समझ गई।मिहान ने उसका हाथ पकड़ लिया—“आप मेरे साथ खेलोगी?”उसकी आँखों में सच्चाई थी…कोई चाल नहीं।भार्गवी हल्का-सा झुकी।“हाँ… खेलेंगे।
”उसकी आवाज़ में पहली बारममता थी।कुछ देर बाद—आँगन में मिहान बैठा था,और भार्गवी उसके बाल संवार रही थी।“सब मुझे डांटते हैं…”मिहान धीरे से बोला।“क्यों?”“कहते हैं मैं… ठीक नहीं हूँ।”भार्गवी का हाथ रुक गया।
“तुम बिल्कुल ठीक हो,”उसने नरमी से कहा।मिहान मुस्कुरा दिया।दूर खड़ा—मिहिर ये सब देख रहा था।उसकी आँखों में पहली बारsoftness आई।
तभी—
📱 फोन फिर वाइब्रेट हुआ।
भार्गवी ने नजर घुमाई—और थोड़ा दूर जाकर कॉल उठाया।“हाँ, बॉस।”आवाज़ धीमी थी।“अंदर क्या चल रहा है?”“जितना सोचा था… उससे ज्यादा गंदा है।”“सावधान रहो।हमारी पहचान नहीं खुलनी चाहिए।”“वो मेरी जिम्मेदारी है।
”“और याद रखो—हम सिर्फ एक केस नहीं…पूरे नेटवर्क को खत्म करने आए हैं।”कॉल कट।भार्गवी की आँखों में अबआग थी।शाम—मिहान अचानक दर्द से चिल्लाने लगा।“आआह…!
”हवेली में हड़कंप मच गया।“क्या हुआ इसे?!”रानी राठौड़ घबरा गई।“फिर से वही दौरा…”नौकरानी बोली।मिहिर परेशान खड़ा था—लेकिन कुछ कर नहीं पा रहा था।
तभी—“डॉक्टर को बुलाइए,”भार्गवी ने सख्त आवाज़ में कहा।“हमारे यहाँ का डॉक्टर—”रानी ने कहा।“नहीं,”भार्गवी ने बात काट दी।“मैं अपने डॉक्टर को बुलाऊंगी।”सब चौंक गए।“तुम?”मिहिर ने सवाल किया।“हाँ,”उसने सीधे उसकी आँखों में देखते हुए कहा।
👉 “मुझे पता है क्या करना है।”कुछ देर बाद—एक लड़की हवेली में दाखिल हुई।सिंपल कपड़े…लेकिन आँखों में confidence।“डॉ. राधिका,”उसने खुद ही कहा।भार्गवी ने उसे देखा—एक पल के लिए…दोनों की नजरें मिलीं।
👉 जैसे वो सिर्फ डॉक्टर नहीं…कुछ और भी हो।राधिका ने हल्की-सी मुस्कान दी।“पेशेंट कहाँ है?”कमरे में—राधिका मिहान को चेक कर रही थी।“टेंशन और डर की वजह से हालत बिगड़ती है,”उसने कहा।“इसका ख्याल रखना होगा।”मिहान ने धीरे से भार्गवी का हाथ पकड़ लिया—“आप जाओ मत…”भार्गवी बैठ गई।“मैं यहीं हूँ।”दरवाज़े पर खड़ा मिहिर—ये सब देख रहा था।
उसके चेहरे पर पहली बारविश्वास की हल्की झलक थी।लेकिन—खेल अभी खत्म नहीं हुआ था।
रात—भार्गवी अपने कमरे में अकेली थी।उसने आईने में खुद को देखा।धीरे से बोली—
“अब जाल बिछ चुका है…”“बस…
शिकार खुद फँसेगा।”
🔥 END HOOKउसी पल—दरवाज़े के बाहर किसी की परछाईं दिखी।और एक धीमी आवाज़ आई—
👉 “मुझे पता है…तुम कौन हो।”
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आप सबका इतना प्यार और support देखकर दिल से खुशी होती है 💖
मेरी story “झांसी: सौदा, कर्ज़ और बदला” अब एक नए मोड़ पर पहुँच चुकी है… और यकीन मानो, आगे जो होने वाला है वो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा 😏🔥
अगर आपने अभी तक Episode 2 और 3 नहीं पढ़े हैं, तो जल्दी से पढ़ लीजिए… क्योंकि कहानी अब सिर्फ कहानी नहीं रही, ये एक game बन चुकी है 🎭
और हाँ, पढ़ने के बाद मुझे जरूर बताना —
आपको क्या लगता है, भार्गवी सच में कौन है? 🤔
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कृष्णा आपको ढेर सारी खुशियाँ दें 💙
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Piyu 7soul ❤️📘📖📝