Trisha - 43 in Hindi Women Focused by palvisha books and stories PDF | त्रिशा... - 43

Featured Books
  • HITLER: The Death Note

    (ഈ കഥ തികച്ചും സാങ്കല്പികവും, വായനകാരൻ്റെ വിനോദത്തിനും മാത്ര...

  • ഗൗരി

    നിലാ വെളിച്ചം കെട്ടികിടക്കുന്ന താമര പൂക്കൾ നിറഞ്ഞ ഒരു കുളത്ത...

  • ചെല്ലമ്മ

    തിരുവിതാംകൂറിൻ്റെ പഴയ ഒരു ശംഖ് മുദ്ര പതിപ്പിച്ച കവാടം കടന്ന്...

  • ചോലനായ്ക്കർ - 2

    മുന്നിൽ നഗരം ഒരു വന്യമൃഗത്തെപ്പോലെ വായ പിളർന്നു നിൽക്കുന്നു....

  • The Night Bride - 3

    ചുറ്റും കുറ്റാകൂരിരുട്ട്..കണ്ണ് എത്രയേറെ സ്‌ട്രെയിൻ ചെയ്തിട്...

Categories
Share

त्रिशा... - 43

त्रिशा और राजन की खुशी पर डाॅक्टर के चैक अप के बाद अंतिम मोहर लग गई। डाॅक्टर मित्तल एक अधेड़ सी उम्र की महिला, उन्होनें त्रिशा का चैक अप कर उसकी प्रेग्नेंन्सि  को कंफर्म किया और बताया कि वह डेढ़ मंथ प्रेंग्नेंट है।  इसके साथ ही उन्होनें त्रिशा को कुछ दवाईयां और दवाईयों के साथ साथ अपनी सेहत का ध्यान रखने की सलाह भी दी और हर महीने चैक अप कराने को भी कहा। 

डाॅक्टर से सब कुछ समझने पूछने के बाद कैबिन से‌ बाहर आते ही राजन‌ ने एक बार‌ फिर खुशी‌ से त्रिशा को गले लगा लिया और उसके माथे को चूमते हुए उसे इस खूबसूरत से पल के लिए धन्यवाद दिया। 

दोनों पति पत्नी खुशी खुशी अपने घर लौट आए और उन्होंने अपनी अपनी फैमिली को भी यह खुश खबरी सुनाई। राजन की मां, कल्पना, कल्पेश, सुदेश, मानस, मोनिका सब खुशी के मारे फूले नहीं समा रहे थे। त्रिशा के घरवालों का तो मन कर रहा था कि वो अभी अपनी बेटी के पास चले जाए। 

बस फिर क्या था कल्पना और कल्पेश ने राजन और उसकी मां से गुजारिश की कि वह त्रिशा को शुरुआती दिनों में या फिर  प्रेंग्नेंसी के अंतिम दिनों में वहां  भेज दे ताकि उसका पूरा ध्यान रखा जा सके। वैसे भी राजन की मां को खुद ही अक्सर बीमार रहती है ऐसे में ज्यादा काम कर नहीं पाती। फिर भी उन्होंने शुरू में घर का काम ओर बहु का भरपूर ध्यान रखने की कोशिश तो की पर जब यह ना हो पाया तो अंत में यही तय किया गया कि त्रिशा अभी चार महीने यही पुने में रहेगी और फिर पांचवां महीना लगते ही कानपुर अपने घर वापस चली जाएगी। 

सबकुछ तय हो जाने के बाद त्रिशा के ससुराल और मायके दोनों जगह अब तो बस वहीं वहीं रह गई थी ऐसा लग रहा है। राजन तो राजन उसकी सांस भी त्रिशा को हमेशा काम करने पर डांट लगाते रहते है और उसे हमेशा काम से ज्यादा आराम करने को‌ कहते है। और कभी कभी तो कल्पना से उसकी शिकायत लगा देते है और फिर वो भी उसे डांट देती है। 

इतना ही नहीं त्रिशा के घर में अब सारा काम तीनों लोगों में बट गया है जिससे त्रिशा पर काम का ज्यादा प्रेशर ना पड़े और इतना ही नहीं राजन ने तो पूरे फ्रिज और किचन को फलों और ड्राई फ्रूट से और ना जाने कौन कौन सी चीजों से भर दिया है ताकि जब उसका जो मन करे वो खा सके। और उसकी सांस भी इस समय उसकी पूरी सेवा में है रोज कुछ नया नया उसे बना कर खिलाती है ताकि उसका मन उब ना जाए खाने से।  

इन्हीं सबके बीच त्रिशा और उसकी सास तो सबसे ज्यादा खुश इसी बात से है कि जब से राजन को पिता बनने का अहसास हुआ है उसने अपनी आदतों को सुधार लिया है। अब वो घर देर से नहीं आता, ना ही शराब पीकर आता है और अब तो उसने चीखना चिल्लाना, बिना बात गुस्सा करना, त्रिशा के साथ किसी भी प्रकार की बहस या जोर जबर्दस्ती कुछ नहीं। 

अब त्रिशा को भी यही उम्मीद थी कि राजन पूरी तरह से सुधर चुका है और अब फाइनली उनकी लाइफ में सब ठीक होगा। इसी तरह से सेवा करते कराते साढ़े चार महीने बीत गए। इन सभी महीनों में राजन हमेशा त्रिशा को छुट्टी लेकर मंथली चैक अप के लिए लेकर जाता और भगवान की कृपा से अभी तक सब ठीक ही रहा है।

एक बार जब डाॅक्टर ने त्रिशा को ट्रैवलिंग की परमिशन दे दी तो फिर बिना देर करते हुए राजन त्रिशा को उसके घर छोड़ आया जहां हाल उसके ससुराल से भी ज्यादा ही महान हो रखा था। लोग उसे बैड से हिलने भी नहीं देते थे। सारे दिन बैठे बैठे और लेटे वह बोर हो जाती थी। उसके टाईम पास का बस एक ही साधन था मानस और मोनिका का पांच महीने का बेटा कान्हा।  

जब तक मोनिका काम में लगी रहती वह कान्हा को उसकी बुआ त्रिशा के पास छोड़ जाती और फिर बस त्रिशा उसका ख्याल रखते रखते अपनी प्रैक्टिस करती। वो जब जब कान्हा को देखती तो उसके मन में एक सवाल आता कि उसके पास  बेटा आएगा या बेटी। त्रिशा को वैसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और उसे सबने बोला भी है कि पहली बार तो क्या टेंशन है बेटा हुआ तो बढ़िया है और नहीं हुआ तो अगली बार कोशिश कर लेना। उसमें क्या है। 

त्रिशा को इस समय बस इसी बात की तसल्ली है कि कोई उसे इन सब के लिए फोर्स नहीं कर रहा और राजन ने भी खुद उससे कहा है कि चाहे बेटा हो या बेटी दोनों ही मेरे अपने होगें और दोनों का ही ख्याल मैं रखूंगा तो इस बारे में सोच कर परेशान होने का क्या ही फायदा। वैसे यहां आने के बाद भी राजन की देखभाल में कोई कमी आई नहीं है वह आज भी रोजाना दिन में तीन टाईम उसे फोन‌ करता है और घंटे भर उससे बातें करता है। पूरी रिपोर्ट लेता है कि उसने रेस्ट किया या नहीं, फ्रूट्स खाए या नहीं, जूस पिया या नहीं। 

ओर ऐसे ही देखते देखते त्रिशा की डिलीवरी का समय नजदीक आ गया और जैसे ही राजन को इस बात का अहसास हुआ उसने अपने ऑफिस में पेटरनेटी लीव  के लिए अप्लाई कर‌ दिया और जैसे ही उसे मंजूरी मिली वो अपनी मां के साथ कानपुर आ गया। जहां राजन की मां अपनी मां यानी राजन की नानी के यहां रुकी वहीं राजन दोनों घरों में आता जाता रहता और रात में कभी यहां तो कभी वहां रुक जाता।  

राजन के आने के एक हफ्ते बाद ही त्रिशा को आधी रात हाॅस्पिटल में एडमिट कराना पड़ा। उसे लेबर पेन शुरू हो चुका था इसलिए सब फटाफट हॉस्पिटल पहुंच चुके थे। राजन, मानस, कल्पेश, कल्पना और राजन की मां सभी त्रिशा के वार्ड में जाने के बाद बाहर खड़े थे। वैसे तो त्रिशा की डिलीवरी नार्मल ही होनी थी पर फिर भी पहली पहली बार है तो सभी लोग थोड़े से नर्वस और घबराए हुए है और राजन के चेहरे पर तो चिंता साफ झलक रही है।