" बात ऐसी है जी कि अब ना.......
आपको ना.......
शराब पीनी........ छोड़नी क्या बिल्कुल बंद करनी पड़ेगी.........क्यो........" त्रिशा ने धीरे धीरे अपनी बात कहनी शुरु की।
"यार त्रिशा, मैनें तुमसे पहले भी कहा है कि मैं जानबूझ के नहीं पीता हूं!!!!!!!! वो बस मुझे दोस्तों के साथ थोड़ी बहुत पीनी पड़ जाती है!!!!!!!!" राजन ने त्रिशा की बात को बीच में रोकते हुए अपनी सफाई देते हुए दुखी मन से कहा।
फिर राजन ने त्रिशा का हाथ अपने हाथ में लिया और उसकी आंखों में देखकर उससे कहने लगा, "तुम तो जानती हो यार, तुमने तो देखा है ना कि मैं कितनी कोशिश करता हूं ना पीने क......."
पर राजन अपनी बात पूरी करता उससे पहले ही त्रिशा ने राजन के हाथेलिओं को अपनी हथेलियों में लेते हुए बोला," आपको पीना छोड़ना पड़ेगा हर हाल में क्योंकि अब आप पर सिर्फ मेरी जिम्मेदारी नहीं है आप पर एक और जिम्मेदारी आने वाली है क्योंकि आ.........प अब....... पा........पा बनने...... वाले है..........."
अपनी बात कहने के बाद त्रिशा शरमाते हुए अपनी आंखे नीचे करके बैठ गई और राजन की प्रतिक्रिया का इंतजार करने लगी। लेकिन अपने आपको मिली अभी अभी इस ताजी खबर के बाद वह थोड़ा सदमे में है। वह खुशी के मारे इतने सकते में आ गया है कि अपनी प्रतिक्रिया देना ही भूल गया और ऐसा ही जस का तस होकर वहीं बैठा रहा।
जब पांच मिनट तक राजन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो शर्माना छोड़कर त्रिशा ने ही राजन का हाथ पकड़ कर झटक कर उसे वर्तमान में वापस लाने कि कोशिश करते हुए कहा," क्या हुआ?????? कुछ बोलो तो सही??????? क्या आपको खुशी नहीं हुई?????"
अपना आखिरी वाक्य कहने के बाद त्रिशा खुद ही टेंशन में आ गई और उसके मन में एक ख्याल ने दस्तक दी कि," कहीं ऐसा तो नहीं कि राजन अभी इस नई जिम्मेदारी के लिए तैयार ना हो?????? तो ऐसे में अब ......."
पर त्रिशा का विचार पूरा हो पाता उससे पहले ही सदमे से बाहर आए राजन ने खुशी के मारे कस कर त्रिशा को गले लगा लिया और बड़े प्यार से उसके बालों को सहलाने लगा और बोला," माफ करना यार वो मुझे तुमने एकदम से बताया ना तो मैं समझ ही नहीं पाया कि कैसे रिएक्ट करुं?????"
फिर उसे अपने से अलग कर उसकी ओर देखते हुए राजन ने अपनी दोनों हथेलियों से उसके चेहरे को प्यार से पकड़ते हुए उससे पूछा," पर यार त्रिशा तुम सही कह रही हो ना?????? मतलब तुम कोई मजाक तो नहीं कर रही हो ना मेरे साथ??????" राजन ने नर्वस होकर त्रिशा की आंखों में देखा।
"मैं सच कह रही हूं!!!!!!!!" त्रिशा ने धीमी सी आवाज में शर्माते हुए कहा और फिर खुद शर्माते हुए राजन के सीने से लग गई और राजन भी बड़े प्यार से उसकी पीठ सहलाने लगा और बोला, " मैं वादा करता हूं त्रिशा मैं अब से पूरी कोशिश करुंगा कि तुम्हें और हमारे बच्चे का पूरा ध्यान रखूंगा और तुम दोनों को हमेशा खुश रहूंगा और बहुत बहुत बहुत प्यार करुंगा!!!!!!!!" इतना कहते हुए राजन ने त्रिशा का माथा चूम लिया। लेकिन फिर उसे कुछ याद आया और त्रिशा को बिस्तर पर लिटाते हुए बोला,
" अच्छा चलों अब लेट जाओ आराम से और रुकना मैं अभी आता हूं!!!!!!" इतना कहकर राजन कमरे से चला गया।
राजन के जाने के बाद त्रिशा बिस्तर पर लेटी लेटी यह सोचने लगी कि आखिर राजन अचानक कहां चला गया है। वह सोच ही रही थी कि तभी राजन कमरे में लौट आया। उसके हाथ में दूध का गिलास है। वह त्रिशा के पास आया और उसने उसे उठाकर बिठाया फिर गिलास उसे पकड़ाते हुए कहा," आज तक तुम हमेशा दो गिलास दूध निकालती थी रात में, मेरे कहने पर भी तुम दूध नहीं पीती थी पर आज से मैं तुम्हारी एक भी नहीं सुनने वाला। आज से रोज एक गिलास दूध पीना है तुम्हें और यह बताओ तुमने इस बारे में किस किस को बताया है????"
"सबसे पहले आपको बताना चाहती थी मैं!!!!" त्रिशा ने मुसकाते हुए कहा।
"अच्छा!!!!!!!!" राजन ने फिर से प्यार से त्रिशा का माथा चूम लिया।
"हां तो फिर मैं कल आधे दिन की छुट्टी ले रहा हूं हम पहले कल डाॅक्टर के पास जाएंगे और फिर सबको इस बारे में बताएंगे!!!!!!! ठीक है!!!!!" राजन ने त्रिशा को दूध पिलाते हुए कहा।
दूध पीने के बाद राजन ने त्रिशा को लिटा दिया और फिर अपने हाथों से त्रिशा के सिर को थपथपाकर उसे सुलाने लगा और त्रिशा भी उससे लिपट कर आराम से उस प्यार भरे सानिध्य को पाकर वह सो गई और राजन वहीं बैठ कर पहले अपना काम खत्म किया और फिर त्रिशा से चिपक कर वह भी सो गया।
कल सुबह सब कुछ रोज की तरह ही हुआ। त्रिशा ने रोज की तरह अपने सारे काम निबटाने में लगी हुई है। राजन भी रोज की तरह आॅफिस चला गया और जैसे उसने तय किया था ठीक वैसे ही वह दोपहर में लौट आया और फिर वह दोनों डाॅक्टर के पास गए।