Mout ki Dastak - 42 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 42

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 42

रात के दो बजे थे, गाँव के बाहर पुराने श्मशान के पास से संजय अपनी बाइक लेकर गुज़र रहा था। हवा असामान्य रूप से ठंडी थी, जबकि दिन भर चिलचिलाती गर्मी पड़ी थी। सड़क के दोनों ओर सूखे पेड़ ऐसे खड़े थे जैसे काली परछाइयाँ हथेलियाँ फैलाकर उसे रोकना चाहती हों। अचानक बिना किसी वजह के उसकी बाइक झटके खाकर रुक गई, जैसे किसी ने पीछे से पकड़कर जकड़ लिया हो। उसने घबराकर दो‑तीन बार किक मारी, पर इंजन ने कोई जवाब नहीं दिया।

तभी उसके पीछे से एक धीमी, ठंडी आवाज़ आई—“मुझे घर छोड़ दोगे…?”

संजय के शरीर में सिहरन दौड़ गई। उसने धीरे‑धीरे मुड़कर देखा। कुछ ही दूरी पर सफेद कपड़ों में भीगी‑सी एक औरत खड़ी थी। उसके बाल चिपके हुए थे, जैसे अभी‑अभी किसी ने उसे पानी से खींचकर बाहर निकाला हो। चेहरा आधा बालों में छिपा था, मगर दिखाई देने वाला हिस्सा पीला और निर्जीव लग रहा था।

“म…मैं गाँव की तरफ ही जा रहा हूँ, बैठ जाओ,” संजय ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर कहा। औरत बिना कुछ बोले धीरे से उसके पीछे बैठ गई। जैसे ही वह बैठी, बाइक अचानक खुद ही स्टार्ट हो गई, जबकि संजय ने किक भी नहीं मारी थी। यह देखकर उसका दिल और ज़ोर से धड़कने लगा।

पूरा रास्ता उसे महसूस होता रहा कि किसी की ठंडी साँस उसके कान के बिल्कुल पास चल रही है, जैसे कोई बहुत धीरे से फुसफुसाकर कुछ कहना चाहता हो, पर शब्दों में बदल नहीं पा रहा हो। उसने कई बार रियर‑व्यू मिरर में देखने की कोशिश की, पर हर बार आईने में केवल खाली सीट दिखाई देती। पीछे मुड़ने की हिम्मत उसमें नहीं थी, बस वह हैंडल कसकर पकड़े तेज़ी से गाँव की तरफ भागता रहा।

गाँव के मोड़ पर पहुँचते ही औरत की आवाज़ फिर आई—इस बार उतनी धीमी नहीं, बल्कि साफ़ और अजीब‑सी खुशी से भरी,

“यहीं रोक दो… बाकी रास्ता मैं उड़कर चली जाऊँगी…”

संजय के हाथ खुद‑ब‑खुद ब्रेक पर चले गए। बाइक रुकते ही उसने डरते‑डरते पीछे मुड़कर देखा। सीट खाली थी। सड़क सुनसान, दूर तक कोई इंसान नहीं। मगर उसके कानों में अभी भी वही वाक्य गूँज रहा था—“बाकी रास्ता मैं उड़कर चली जाऊँगी…”

अगले ही पल सड़क के ऊपर से एक काली‑सी परछाईं तेजी से गुज़री और श्मशान की दिशा में गायब हो गई। संजय के गले से चीख भी नहीं निकली, वह बस वहीं सड़क किनारे बैठ गया।

कहते हैं, उस रात के बाद से संजय ने कभी रात में बाइक लेकर उस रास्ते से जाना बंद कर दिया। लेकिन कई लोगों ने दावा किया कि अगर कोई भी व्यक्ति रात के दो बजे उस पुराने श्मशान वाले मोड़ से गुज़रता है, तो उसकी बाइक अचानक भारी हो जाती है… और पीछे से एक धीमी आवाज़ सुनाई देती है—

“मुझे घर छोड़ दोगे… बाकी रास्ता मैं उड़कर चली जाऊँगी…”


अगर आप लोगों मेरी यह कहानी पसंद आई हो तो प्लीज कमेंट जरूर कीजिएगा और कहानी के बारे में जरूर बताइएगा अगर अच्छी लड़की तो भी बताया और कल बुरी लगी तो भी बताया मैं उसे सुधारनेक कोशिश करूंगी और हो सके तो फॉलो जरूर करना धन्यवाद राधे-राधे