यहां पुने वापस आने के बाद पांच छह महीने तक त्रिशा और राजन दोनों की शादीशुदा जिंदगी बहुत सुखमय बीत रहा थी लेकिन फिर धीरे धीरे कभी ऑफिस पार्टी के नाम पर, कभी दोस्त के जन्मदिन के नाम पर, कभी दोस्त की शादी के नाम पर बस बीच बीच में एक आधा बार राजन का फिर से शराब पीकर घर आना शुरू हो गया।
त्रिशा को राजन का शराब पीकर आना और घर आकर फिर उससे कहा सुनी करना, उस पर जोर जबर्दस्ती करना अच्छा नहीं लगता था पर वो करे भी तो क्या करे। त्रिशा और उसकी सास राजन की इस आदत को सुधारना चाहती है पर दोनों के ही हाथ में कुछ नहीं है। दोनों ने अपनी अपनी तरफ से उसे समझा कर देख लिया पर नशा उतर जाने के बाद वो हर बार उनसे वादा करता की आगे से ऐसा नहीं होगा और थोड़े दिन बाद फिर वह वही करता।
पहले उसे उम्मीद थी कि शायद राजन उसके प्यार से सुधर जाएगा पर अब धीरे धीरे त्रिशा ने भी उसे उसके हाल पर छोड़ दिया। वो उसे समझा समझा कर थक चुकी है इसलिए पिछली दो बार से वह राजन के शराब पीकर आने पर उस से झगड़ा या बहस करने की जगह अपनी सांस के कमरे में या फिर हाॅल में आकर सो जाती है।
त्रिशा की सास भी अपने बेटे को समझा समझा कर थक चुकी थी पर जब बेटे पर उनका कोई जोर नहीं चला तो उन्होंने बहु को समझने का प्रयास किया। वो अक्सर त्रिशा को दिलासा देती की बच्चा कर लो, बच्चा होने के बाद जब राजन पर जिम्मेदारियों का बोझ पड़ेगा तो वो खुद ही सुधर जाएगा। और त्रिशा को भी उनकी यह बात सही लगती। कहीं न कहीं अब उसके मन में भी यह उम्मीद जाग चुकी थी कि पिता बन ने के बाद राजन पूरी तरह से सुधर जाएगा।
धीरे धीरे उनकी शादी को ऐसे ही साल सा बीत गए। दिन पर दिन दोनों का रिश्ता और मजबूत होता जा रहा था। हां अगर इसमें में राजन के शराब के नशे में किए हुए कारनामों को छोड़ दे तो सब अच्छा ही था।
ऐसा लग रहा यह कि मानो यह त्रिशा के जीवन का रूटीन सा बन गया हो। हर पंद्रह दिन में राजन कम से कम एक बार तो शराब पी ही लेता और फिर घर आकर पहले तमाशा होता, फिर प्रेम और पुरुषार्थ का संघर्ष होता, उस समय राजन को नशे की हालात में त्रिशा की ना हां कुछ नहीं सुनाई देती और अगले दिन नशा उतरने के बाद राजन को अपने किए पर पछतावा होता, त्रिशा उस से कुछ दिन गुस्सा रहती पर हर बार की तरह राजन अपनी बातों से त्रिशा को एक दो दिन में ही मना लेता।
त्रिशा ने भी राजन के इस रुप और व्यवहार की आदत सी डाल ली थी। अब उसे नशे में उसके किए गए किसी भी तरह के व्यवहार या शब्दों से कोई फर्क नहीं पड़ता था। अब तो उसने विरोध भी करना बंद कर दिया था क्योंकि वो जितना विरोध करती राजन उसके साथ उतने बल का प्रयोग करता इसलिए अब वह खुद ही अपने आप को राजन को सौंप देती और राजन अपने मन की करने के बाद आराम से सो जाता और वो भी थक कर सो जाती।
धीरे धीरे त्रिशा को अब इन सबका बुरा लगान भी बंद हो चुका है। अब उसके साथ जो होता वो बस इसी तसल्ली के साथ स्वीकार कर लेती कि जो भी हो रहा है वो नशे की हालात में हो रहा है हमेशा ऐसा ही कोई होता रहेगा। कम से कम होश में आने के बाद तो राजन उसकी केयर करता है, उससे प्यार करता है, उसका सम्मान करता है।
ऐसे ही किसी एक दिन रात के समय अपना सारा काम निबटाने के बाद जब त्रिशा राजन के लिए दूध लेकर कमरे में आई तो राजन तब भी अपने काम में लगा हुआ है। त्रिशा ने दूध का गिलास राजन को पकड़ाया और राजन ने भी गिलास पकड़ा और फिर अपने काम में लग गया। त्रिशा भी अपने कपड़े बदलने चली गई।
त्रिशा थोड़ी देर में अपने कपड़े बदल कर आई और बैड पर बैठ गई। वह बैठे बैठे राजन को ही देखने लगी जो अपने काम में लीन था। कुछ समय बाद राजन को इस बात का अहसास हुआ कि त्रिशा लगातार उसे ही देखती जा रही है। इसलिए उसने अपने लैपटॉप से नजरे हटा कर त्रिशा की ओर देख कर पूछा," क्या हुआ????? सब ठीक है ना??????"
"हां सब ठीक है!!!!!! पर यह बताओ तुम्हारा काम और कितना रह गया है।।।।" त्रिशा ने राजन से पूछा।
" मुझे तो थोड़ा टाईम और लगेगा!!!!!! लेकिन तुम सो जाओ!!!!! थक गई होगी ना सुबह से लगी रहती हो तुम!!!!! पर क्यों क्या हुआ???? कोई बात है क्या????" राजन लैपटॉप उठा कर त्रिशा के पास बिस्तर पर ही आ कर बैठ गया।
" हां बात तो है!!!!!!!! पर तुम पहले अपना काम कर लो क्योंकि मुझे नहीं लगता कि जो बात मैं तुम्हें बताना चाहती हूं उसके बाद तुम कोई काम कर पाओगे!!!!!" त्रिशा ने जवाब दिया।
"अच्छा ऐसा क्या??????? ऐसी कौन सी बात है जिसे सुनकर मैं काम नहीं कर पाऊंगा?????" राजन ने अचंभित होकर पूछा।
"अरे आप पहले काम कर लो ना फिर मैं आपको तसल्ली से बताऊंगी सब!!!!!" त्रिशा ने राजन को कहा।
"यार अब तो तुम बता ही दो क्योंकि तुमने सस्पेंस इतना बना दिया है कि अब मेरा काम में मन लगेगा ही नहीं!!!!!" राजन ने लैपटॉप बंद करके साईड में रखते हुए कह।
" अरे लेकिन काम आपका?????" त्रिशा ने कहा।
" अरे काम वाम तो देखा जाएगा!!!!! पहले होम मिनिस्ट्री की बात सुनी जाएगी ना!!!!!!" राजन ने त्रिशा की ओर सरकते हुए कहा और फिर जब वह त्रिशा के पास आ गया बिल्कुल तो अपना सिर त्रिशा की गोद में रखते हुए उसने पूछा," हांजी तो अब बताईए क्या बात है?????"