कृषांत ठाकुर (Hero) — 25 वर्ष का, सख्त मिज़ाज, कम बोलने वाला, लेकिन अंदर से बहुत सी बातें छिपाए हुए।
श्रव्या सिंह (Heroine) — 23 वर्ष की, नई-नई जॉइन करने वाली, मासूम, डरपोक और बहुत संवेदनशील।
श्रव्या के हाथ में अपॉइंटमेंट लेटर है। वो एक बड़े और पुराने से ऑफिस बिल्डिंग के सामने खड़ी है —
Disney Enterprises.
श्रव्या (धीरे से खुद से) बोली -
वाह... इतना बड़ा ऑफिस! लेकिन थोड़ा... पुराना सा लग रहा है।
वो अंदर जाती है। चारों तरफ शांति है, सिर्फ टाइपिंग की आवाज़ें। रिसेप्शन पर बैठी लड़की उसे ऊपर जाने को कहती है।
रिसेप्शनिस्ट बोली -
आप मिस्टर कृषांत ठाकुर की team member हैं न? वो 7th फ्लोर पर हैं।
श्रव्या लिफ्ट में चढ़ती है और फ्लोर नंबर गिनने लगती है
श्रव्या (सोचते हुए) बोली -
1... 2... 3... 4... 5... 6... 7... 8... 9... अरे! ये तो नौ फ्लोर हैं?
वो 7th फ्लोर पर उतरती है। ऑफिस में सब नॉर्मल लगता है ।कृषांत अपने केबिन में फाइलें देख रहा है। दरवाज़ा खटकता है।
कृषांत (बिना देखे) बोला -
अंदर आइए।
श्रव्या घबराते हुए अंदर आती है।
श्रव्या बोली -
S sir, मैं श्रव्या... आपकी नई team member।
कृषांत सिर उठाता है। गहरी नज़रें, बिना मुस्कुराए देखता है।
कृषांत बोला -
समय पर आई हो। उम्मीद है काम भी उतना ही ईमानदारी से करोगी।
श्रव्या (हल्की मुस्कान के साथ) बोली -
जी sir... वैसे sir, बाहर तो 9 फ्लोर हैं, लेकिन आपने 7th फ्लोर बोला..
कृषांत का चेहरा सख्त हो जाता है।
कृषांत (तेज़ आवाज़ में) बोला -
ध्यान रहे, उन दो फ्लोर से तुम्हारा कोई लेना-देना नहीं है। यहाँ सिर्फ 7 फ्लोर हैं। बाकी... भुला दो।
श्रव्या सिहर जाती है।
श्रव्या (धीरे से) बोली -
ज जी... Sir।
कृषांत उसे देर रात तक ऑफिस में काम करने को कहता है। बाकी सब जा चुके हैं। घड़ी रात के 10 बजा रही है। श्रव्या फाइलें टेबल पर रख रही होती है तभी उसे लिफ्ट के पास से किसी के चलने की आवाज़ आती है।
श्रव्या (धीरे से) बोली -
क कौन है वहाँ?
कोई जवाब नहीं। वह दरवाज़े के पास जाती है और देखती है — लिफ्ट खुली है, पर कोई नहीं। अंदर ‘8’ और ‘9’ फ्लोर की लाइटें हल्की जल रही हैं, जबकि वो फ्लोर बटन ब्लॉक होने चाहिए।
श्रव्या (हैरान होकर) बोली -
पर... कृषांत sir ने तो कहा था कि सिर्फ 7 फ्लोर हैं...
अचानक एक ठंडी हवा चलती है, लिफ्ट अपने आप बंद हो जाती है।
अगली सुबह श्रव्या सब बताने कृषांत के पास जाती है।
श्रव्या (डरी हुई आवाज़ में) बोली -
Sir, कल रात मैंने 8th और 9th फ्लोर की लाइट्स देखीं। वहाँ कोई था शायद...
कृषांत (गुस्से में) बोला -
कहा ना तुमसे — उस बात में मत पड़ो! अगर अपनी नौकरी रखनी है तो उस मंज़िल का नाम भी मत लो!
श्रव्या चुप हो जाती है, लेकिन उसके चेहरे पर डर साफ झलक रहा है।
एक रात कृषांत अपने केबिन में अकेला होता है। श्रव्या फाइल देने आती है, तभी देखती है कि कृषांत किसी की फोटो देख रहा है — एक लड़की की। पीछे लिखा है “Employee of 9th Floor.”
श्रव्या (धीरे से) बोली -
S sir... ये कौन हैं?
कृषांत चौंक जाता है, फोटो तुरंत छुपा देता है।
कृषांत (थोड़ा भारी मन से) बोला -
वो... मेरी असिस्टेंट थी। तीन साल पहले... इसी ऑफिस में मरी थी।
श्रव्या (सिहरते हुए) बोली -
मरी...? कैसे?
कृषांत बोला -
वो 9th फ्लोर पर गई थी। वहाँ जो हुआ... किसी को नहीं पता। बस... तब से उस फ्लोर को सील कर दिया गया।
कृषांत की आंखों में दर्द है। समृद्धि धीरे से बैठ जाती है।
अगली सुबह श्रव्या ऑफिस पहुँचती है। कृषांत अपने केबिन में नहीं होता। ऑफिस का माहौल थोड़ा अजीब है — सब लोग फुसफुसा रहे हैं।
श्रव्या (धीरे से एक सहकर्मी से) बोली -
सुनिए... एक बात पूछनी थी... वो जो प्रिशा नाम की लड़की थी... जो 9th फ्लोर की एम्प्लॉई थी... वो कौन थी?
सब अचानक चुप हो जाते हैं। कुछ लोग इधर-उधर देखने लगते हैं जैसे कोई सुन लेगा। एक वरिष्ठ कर्मचारी धीरे से बोलता है।
Employee 1 (धीरे से) बोला -
प्रिशा बहुत खूबसूरत थी... बिलकुल तुम्हारी तरह। मासूम... हँसमुख... और बहुत ही नेक दिल लड़की।
श्रव्या बोली -
फिर... उसके साथ क्या हुआ?
Employee 2 बोला -
वो यहाँ के एक और एम्प्लॉई, संतोष से प्यार करती थी। दोनों शादी करने वाले थे।
श्रव्या (हैरानी से) बोली -
तो फिर... वो मरी कैसे?
सबकी आँखों में डर झलकने लगता है।
Employee 1 (कंपकंपाती आवाज़ में) बोला -
कृषांत sir... प्रिशा को अपनी बहन मानते थे। बहुत प्रोटेक्ट करते थे। पर एक रात...
वो रुक जाता है, जैसे कुछ बोलने से डर रहा हो।
श्रव्या बोली -
क्या हुआ उस रात?
Employee 2 (धीरे से) बोला -
उस रात रिया 9th फ्लोर पर गई थी... वहीं संतोष भी था... और फिर... दोनों मर गए। कोई नहीं जानता कैसे। अगले दिन दोनों की लाशें मिलीं — एकदम पास-पास।
श्रव्या सन्न रह जाती है।
श्रव्या (हिलती आवाज़ में) बोली -
कृषांत sir को... कुछ पता नहीं था?
Employee 1 बोला -
वो बस इतना बोले कि ‘9th फ्लोर अब किसी के लिए नहीं है।’ तब से वो फ्लोर बंद है।
इतनी देर में अचानक पीछे से आवाज़ आती है — कृषांत की सख्त और भारी आवाज़।
कृषांत (तेज़ आवाज़ में) बोला -
क्या चल रहा है यहाँ?
सारे एम्प्लॉई डर के मारे उठ खड़े होते हैं।
Employee 2 बोला -
न...नहीं sir, हम बस... काम की बात कर रहे थे।
कृषांत (गुस्से में) बोला -
काम की बात या फिर पुरानी बकवास बातें? मैंने कितनी बार कहा है, उस नाम को कोई नहीं लेगा!
सारे एम्प्लॉई डर कर निकल जाते हैं। सिर्फ श्रव्या वहीं खड़ी रहती है। कृषांत उसकी तरफ देखता है, उसकी आँखों में गुस्सा और दर्द दोनों हैं।
कृषांत (धीरे लेकिन ठंडी आवाज़ में) बोला -
तुम भी... उसी की बात कर रही थीं?
श्रव्या (धीरे से, काँपती आवाज़ में) बोली -
S sir... मैं बस जानना चाहती थी कि रिया के साथ क्या हुआ था... वो आपकी बहन जैसी थी न?
कृषांत की आँखें लाल हो जाती हैं। वो धीरे-धीरे उसके करीब आता है।
कृषांत बोला -
हाँ... थी। लेकिन दुनिया को जो दिखता है, वो पूरा सच नहीं होता।
श्रव्या बोली -
मतलब...?
कृषांत अचानक टेबल पर हाथ मारता है। फाइलें बिखर जाती हैं।
कृषांत (तेज़ आवाज़ में) बोला -
बस! अब और सवाल मत करना, श्रव्या! जो हुआ, वो दफन हो चुका है। और अगर तुम्हें अपनी नौकरी प्यारी है, तो उस नाम को अपनी ज़ुबान से दोबारा मत निकालना!
श्रव्या डर के मारे पीछे हट जाती है।
श्रव्या (धीरे से) बोली -
जी... Sir।
कृषांत कुछ पल तक उसे देखता रहता है — जैसे उसके भीतर कुछ टूट रहा हो। फिर वो केबिन से बाहर चला जाता है। श्रव्या वहीं खड़ी है, उसकी आँखों में डर भी है और जिज्ञासा भी।
रात को ऑफिस खाली हो जाता है। श्रव्या अकेली बैठी है। तभी 9th फ्लोर से किसी के गाने की हल्की आवाज़ आती है — "तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा तो नहीं..."
श्रव्या का दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है। वो धीरे से लिफ्ट की तरफ जाती है।
लिफ्ट अपने आप खुल जाती है... अंदर स्क्रीन पर दिखता है — “9th Floor.”
वो घबराकर पीछे हटती है।
तभी लिफ्ट से हल्की ठंडी हवा निकलती है और किसी लड़की की धीमी आवाज़ आती है —
श्रव्या... मत डरो...
हर दफ़्तर में अफ़वाहें होती हैं... पर कुछ अफ़वाहें ज़िंदा नहीं, भटकती हैं... 👻
आपको क्या लगता है -
कृषांत क्या छुपा रहा था ?
प्रिशा और संतोष की मौत कैसे हुई ?
क्यों उन दोनों को मारा गया ?
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