Mout ki Dastak - 37 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 37

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 37

भूतिया हवेली का रहस्य पटना के बाहरी इलाके में, गंगा नदी के किनारे एक पुरानी हवेली खड़ी थी। लोग इसे 'काली हवेली' कहते थे। सालों से खाली पड़ी, दीवारें काली पड़ चुकीं, खिड़कियां टूटी हुईं। रात के अंधेरे में वहां से आने वाली आवाजें—कभी हंसी, कभी रोना—गांव वालों को डराती रहतीं। लेकिन शहर से आया एक युवा पत्रकार, राहुल, को यह सब झूठ लगता था। वह एक ब्लॉग चलाता था, जहां सच्ची घटनाओं पर कहानियां लिखता। 'भूत-प्रेत सब अंधविश्वास है,' वह कहता। एक दिन, पुरानी खबरों में काली हवेली का जिक्र मिला—सत्तर साल पहले एक अमीर जमींदार की बेटी गायब हो गई थी। राहुल ने फैसला किया, वह रात वहां गुजारेगा और सबूत लाएगा।राहुल ने अपना कैमरा, रिकॉर्डर और टॉर्च पैक किया। दोस्तों ने मना किया, 'वहां मत जाना, भाई। वो हवेली निगल जाती है।' लेकिन राहुल हंसा, 'मैं साइंस का छात्र हूं, भूतों में विश्वास नहीं।' शाम ढलते ही वह गाड़ी से हवेली पहुंचा। दरवाजा खुला था, जैसे कोई इंतजार कर रहा हो। अंदर कदम रखते ही ठंडी हवा चली। फर्श पर धूल की मोटी परत, दीवारों पर मकड़ियों के जाले। राहुल ने टॉर्च जलाई। मुख्य हॉल में एक बड़ा सा चित्र टंगा था—एक खूबसूरत लड़की का। नीचे लिखा था, 'रानी बाई, 1955'। राहुल ने फोटो खींची। अचानक, ऊपर से कदमों की आहट सुनाई दी। 'कौन है?' वह चिल्लाया। जवाब नहीं मिला। दिल धड़कने लगा, लेकिन वह ऊपर चढ़ा।सीढ़ियां चरमरातीं। दूसरे मंजिल पर एक कमरा था, दरवाजा बंद। राहुल ने धक्का दिया। अंदर अंधेरा। टॉर्च की रोशनी में एक पुराना पलंग, आईना और एक डायरी दिखी। डायरी खोली। पहला पेज: 'मैं रानी हूं। पापा मुझे शादी के लिए मजबूर कर रहे हैं। मैं भाग जाऊंगी।' राहुल पढ़ता गया। रानी का प्रेमी एक गरीब चित्रकार था, जिसे जमींदार ने मार डाला। रानी ने बदला लेने की कसम खाई। आखिरी पेज अधूरा: 'आज रात... वो आएगा... मैं...' राहुल को लगा, कोई सांस ले रहा है। पीछे मुड़ा। कमरे में कोई नहीं। लेकिन आईने में एक छाया दिखी—एक औरत की, सफेद साड़ी में। राहुल भागा, लेकिन दरवाजा बंद हो गया। 'खोलो!' वह चिल्लाया। हवा में फुसफुसाहट: 'रह जा... मेरे साथ।'राहुल ने दरवाजा तोड़ा। नीचे आया। घड़ी रात के 12 बजी। बाहर बारिश शुरू हो गई। फोन सिग्नल गया। अब फंस गया। हॉल में बैठा, डायरी पढ़ता रहा। रानी ने लिखा था, 'हर पूर्णिमा को वो आता है—मेरा प्रेमी। लेकिन अब वो भूत है।' राहुल को नींद आई। सपने में रानी दिखी। 'मदद करो, राहुल। मेरी डायरी पूरी करो। सच्चाई बताओ।' सुबह हुई। राहुल जागा। डायरी उसके हाथ में। आखिरी पेज पूरा लिखा था—उसके ही हाथ के लफ्जों में: 'मैंने पापा को जहर दे दिया। अब वो मुझे सताते हैं।' राहुल डर गया। यह कैसे?दिन चढ़ा। राहुल बाहर निकला। गांव वाले इकट्ठे। 'तू जिंदा! चमत्कार!' एक बूढ़े ने कहा, 'रानी की आत्मा अच्छी है। वो सच्चाई चाहती है।' राहुल ने ब्लॉग पर पोस्ट किया। हिट हो गया। लेकिन रात को फिर सपना आया। रानी बोली, 'और गहरा जाओ। तहखाना देखो।' राहुल लौटा। तहखाने का दरवाजा हॉल के नीचे था। ताला टूटा। अंदर सीढ़ियां। टॉर्च से रोशनी डाली। निचले कमरे में हड्डियां बिखरीं। एक कंकाल, चेन से बंधा। पास एक चाबी। राहुल ने छुआ, बिजली का झटका लगा। visions आए—रानी का प्रेमी चित्रकार, जमींदार द्वारा कैद, पीटा जाता। रानी आती है, छुरी से मार देती जमींदार को। लेकिन प्रेमी मर चुका। रानी पागल हो जाती। खुद को दीवार में चुनवाती।राहुल भागा। लेकिन ऊपर रानी खड़ी। 'तुम्हें चुना है मैंने। मेरी कहानी पूरी करो।' राहुल चिल्लाया, 'मैं करूंगा!' रानी गायब। सुबह राहुल पुलिस को ले आया। हड्डियां जांच हुईं—चित्रकार की। जमींदार का कंकाल भी मिला। केस सॉल्व। राहुल फेमस। लेकिन रातें मुश्किल। हर रात रानी आती। कभी हंसती, कभी रोती। 'अभी खत्म नहीं,' वह कहती। राहुल ने दोस्त नीता को बताया। नीता आर्कियोलॉजिस्ट थी। दोनों हवेली गए। नीता ने कहा, 'यहां और राज है। रानी की डायरी में कोड है।' उन्होंने डायरी डिकोड की। एक चित्र—हवेली का नक्शा। गुप्त कमरा!तीसरी मंजिल पर छिपा कमरा। दीवार हटाई। अंदर सोना-चांदी, और रानी का शव—सूखा। लेकिन आंखें खुलीं। नीता चिल्लाई। रानी की आत्मा प्रकट। 'ये खजाना गांव का है। जमींदार ने लूटा। बांट दो।' आत्मा शांत हो गई। लेकिन राहुल को लगा, कुछ बाकी। एक रात, पूर्णिमा। हवेली में। रानी आखिर बार: 'मेरा प्रेमी इंतजार कर रहा। अब हम मुक्त।' हवा चली। रोशनी। सुबह हवेली ढह गई। सब खत्म। राहुल ने किताब लिखी—'काली हवेली की सच्चाई'।