I will come quietly - Part 1 in Hindi Love Stories by Std Maurya books and stories PDF | चुपके-चुपके आऊँगा - भाग 1

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चुपके-चुपके आऊँगा - भाग 1

लेखक -एसटीडी मौर्य ✍️

कटनी मध्य प्रदेश 

दूरभाष +917648959825

यह कहानी कुछ ही दिन पहले की है।

एक दिन मैं अपनी डायरी में कहानी लिख रहा था। तभी मेरी खिड़की के पास एक बिल्ली आ गई। वह “म्याऊँ-म्याऊँ” कर रही थी।
मैंने उसे प्यार से “पूसी” कहकर बुलाया। वह बिल्ली बिना डरे मेरे पास आ गई और कुछ पल मेरे पास बैठी रही। थोड़ी देर बाद वह उठकर चल दी। मैं उसे बुलाता रह गया, लेकिन वह नहीं रुकी।
फिर भी मैं उसके पीछे-पीछे चल पड़ा। कुछ दूर जाकर वह एक घर के सामने रुक गई। मुझे लगा कि शायद वह लौटकर मेरे पास आएगी, लेकिन जब मैं उसके करीब पहुँचा तो वह पास के घर के अंदर चली गई।
मैं खुद को रोक नहीं पाया और उसके पीछे-पीछे उस घर के अंदर चला गया। उस घर में चार लोग थे। बिल्ली जाकर उसी घर में रहने वाली एक लड़की के पास बैठ गई।
मैं सोचने लगा कि शायद यह बिल्ली इन्हीं की होगी। तभी उस लड़की ने मुझे देख लिया।
वह पूछने लगी —
“आप कौन हैं? आपको क्या चाहिए?”
मैं थोड़ी देर सोच में पड़ गया कि क्या जवाब दूँ। फिर मैंने कहा —
“मैं रास्ते से जा रहा था, मुझे प्यास लगी थी। क्या मुझे थोड़ा पानी मिल सकता है?”
लड़की बोली —
“ज़रूर! आप रुको, मैं पानी लेकर आती हूँ।”
वह किचन में गई और पानी लेकर आई।
“लीजिए, पानी।”
मैं मन ही मन सोच रहा था कि मैं इतना झूठ क्यों बोल रहा हूँ। उसी सोच में फिर खो गया।
तभी लड़की ने मेरे हाथ को छूकर कहा —
“आप कहाँ खो गए हैं?”
मैं अचानक होश में आया। मैंने पानी लिया और पी लिया, जबकि मुझे प्यास भी नहीं लगी थी।
फिर मैं वहाँ से चला आया। घर आकर मैं उसी लड़की के बारे में सोचने लगा।
काश उससे फिर मुलाकात हो जाए।
वह कितनी प्यारी और मासूम थी। उसके होंठ गुलाब जैसे थे और उसकी जुल्फें चेहरे पर बहुत सुंदर लग रही थीं।
रात को जब मैं सोने गया, तब भी उसी लड़की के बारे में सोच रहा था। यही सोचते-सोचते मुझे नींद आ गई।
फिर सपने में क्या देखता हूँ — वही बिल्ली फिर मेरे पास आ गई। मैं खुशी से झूम उठा।
वह फिर वही करने लगी — कुछ देर मेरे पास बैठी और फिर चल दी। मैं उसके पीछे-पीछे चल पड़ा।
मैं फिर उसी घर पहुँच गया और वहाँ वही लड़की मिली।
वह हँसते हुए बोली —
“आज भी आप आ गए? आज क्या चाहिए?”
मैंने कहा —
“सच बताऊँ या झूठ?”
लड़की बोली —
“सच बताइए।”
मैंने कहा —
“आप मुझे पसंद हो… मैं आपको देखने आया हूँ।”
लड़की हँसकर बोली —
“पागल हो क्या?”
मैंने हँसते हुए कहा —
“हाँ, पागल हूँ… मगर तुम्हारे इश्क में।”
लड़की बोली —
“मैं बहुत बुरी लड़की हूँ।”
मैंने कहा —
“कोई बात नहीं, मुझे तुमसे प्यार है।”
लड़की मुस्कुराकर बोली —
“अभी नहीं… सोचकर बताऊँगी।”
इतने में उसकी दादी आ गईं।
दादी ने मुझसे पूछा —
“बेटा, तुम कौन हो?”
मैं फिर सोचने लगा कि क्या जवाब दूँ। फिर मैंने कहा —
“यह बिल्ली सड़क पर थी, मैं इसे यहाँ छोड़ने आया था।”
दादी बोलीं —
“ठीक है बेटा। यह बिल्ली मेरी नातिन की जान है।”
मैंने पूछा —
“आपकी नातिन का नाम क्या है?”
दादी बोलीं —
“प्रियांशी।”
यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ। कम से कम उसका नाम तो पता चल गया।
फिर मैं खुशी-खुशी वहाँ से चला आया।
सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैं उदास हो गया। मुझे समझ आया कि यह सब तो सपना था।
वह लड़की तो बस मेरे सपनों की हसीना थी।
मैं उठकर अपने काम की तैयारी करने लगा, क्योंकि मुझे समाज में फैली नफरत के खिलाफ एक सामाजिक कहानी लिखनी थी।
मैं फ्रेश होकर आया। मम्मी ने खाना बनाया और मुझे खाने के लिए दिया। मैंने खाना खाया और अपने कमरे में चला गया।
अलमारी से अपनी डायरी निकाली और लिखने बैठ गया। मैंने सैकड़ों शब्दों में समाज की बातें लिख दीं।
तभी अचानक सच में वही बिल्ली मेरे पास आ गई…
और मुझे अपने सपने की बात याद आने लगी।
मैं सोचने लगा —
क्या यह वही बिल्ली है जो मैंने सपने में देखी थी?
और जैसे सपने में हुआ था, वैसे ही सब कुछ सच में होने लगा…

यह सब देखकर मैं थोड़ा परेशान रहने लगा।
इसी तरह दो दिन बीत गए। मैं उस लड़की को चुपके-चुपके देखने चला जाया करता था।
एक दिन तो मैं पकड़ा ही गया। मैं उसकी खिड़की से झाँक रहा था, तभी वह लड़की बाहर थी और उसने मुझे देख लिया।
लेकिन वह लड़की भी कम नहीं थी। वह भी मुझे चुप-चुपकर देखा करती थी, पर कभी बताती नहीं थी।
जब उसने मुझे पकड़ लिया, तो वह सीधे मेरे पास आई और अचानक मेरे होठों पर किस कर लिया। मैं तो जैसे सदमे में रह गया।
इतना ही नहीं, वह मुझे किस देकर तुरंत घर के अंदर चली गई। उसके होंठों की लिपस्टिक का निशान मेरे गाल और होठों पर रह गया।
जब मैं वापस घर लौटा तो मेरी छोटी बहन अंकिता ने मुझे देख लिया।
वह मुझे चिढ़ाने लगी और बोली —
“भैया, सच-सच बताओ… आप भाभी से मिलने गए थे न?”
वह अंदर-ही-अंदर मुस्कुरा रही थी, क्योंकि उसने मेरे चेहरे पर लिपस्टिक का निशान देख लिया था।
मैंने झूठ बोलते हुए कहा —
“अरे पगली, ऐसा कुछ नहीं है।”
अंकिता बोली —
“मुझे पागल मत बनाओ। एक बार आईने में खुद को देखो।”
मैं तुरंत आईने के पास गया। जब मैंने अपना चेहरा देखा तो सच में लिपस्टिक का निशान लगा हुआ था।
यह देखकर मुझे बहुत शर्म आने लगी और मैं अपनी बहन से मुँह छिपाने लगा।
यह देखकर अंकिता और मज़ाक उड़ाने लगी। फिर बोली —
“सच-सच बताओ भाभी का नाम क्या है? नहीं तो मैं पापा को बता दूँगी कि भैया भाभी से मिलने गए थे।”
आखिरकार मुझे सारी बात अंकिता को बतानी पड़ी।
यह सब सुनकर अंकिता खुश हो गई और बोली —
“मुझे भी भाभी से मिलना है।”
वह जिद करने लगी —
“भैया, मुझे भाभी से मिलाओ।”
मैंने कहा —
“ठीक है, तुझे मिलवा दूँगा। जिद मत कर।”
अंकिता बोली —
“ठीक है, मुझे उनसे मिलना ही है।”
यह सुनकर वह भी खुशी से झूमने लगी।
अगले दिन तो वह मुझसे पहले ही तैयार हो गई।
फिर मुझसे बोली —
“आप कब तैयार होंगे? आपको पता है न कि आज कहाँ जाना है?”
मैंने कहा —
“पता तो है, लेकिन पापा पूछेंगे कि तुम दोनों कहाँ जा रहे हो, तो हम क्या जवाब देंगे?”
अंकिता बोली —
“कोई बात नहीं, मैं बहाना बना दूँगी।”
मैंने पूछा —
“कौन-सा बहाना?”
अंकिता बोली —
“यही कि हम अपने दोस्त के घर जा रहे हैं। आज उसका जन्मदिन है, उसे सरप्राइज देने।”
यह कहकर वह पापा से बोल भी आई।
फिर मैंने अपनी बाइक बाहर निकाली और मैं और मेरी बहन दोनों साथ में चल पड़े।

आगे की कहनी अगले भाग में जारी 💯