Mout ki Dastak - 30 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 30

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 30

।पुरानी हवेली का रहस्य

रांची के बाहरी इलाके में, घने जंगलों के बीच एक पुरानी हवेली खड़ी थी। लोग इसे 'भूतिया हवेली' कहते थे। सालों से खाली पड़ी यह हवेली रात के समय अजीब सी आवाजें निकालती थी – कभी हंसी, कभी रोने की आवाज, कभी कदमों की थपथपाहट। गाँव वाले कहते, "वहाँ मत जाना, वरना भूत तुम्हें ले जाएगा।"अर्जुन एक युवा फोटोग्राफर था, जो रांची में रहता था। उसे पुरानी इमारतों की तस्वीरें खींचना बहुत पसंद था। एक दिन उसके दोस्त ने बताया, "भाई, भूतिया हवेली की फोटोज लेने जाओगे? वहाँ अमेजिंग शॉट्स मिलेंगे।" अर्जुन हँसा, "भूत-प्रेत सब बकवास है। मैं कल ही चला जाऊँगा।"अगली शाम, अर्जुन अपनी जीप लेकर हवेली पहुँचा। सूरज ढल रहा था। हवेली का मुख्य द्वार जंग लगे ताले से बंद था, लेकिन बगल की दीवार टूटी हुई थी। वह अंदर घुस गया। अंदर धूल और मकड़ियों के जाले हर तरफ थे। दीवारों पर पुरानी तस्वीरें टंगी थीं – एक सुंदर औरत की, जिसकी आँखें जैसे जिंदा थीं। उसका नाम था रानी लक्ष्मी। नीचे लिखा था, '1890'।अर्जुन ने कैमरा निकाला और फोटो लेने लगा। अचानक हवा का एक झोंका आया। दरवाजा बंद हो गया। "कौन है?" उसने चिल्लाया। कोई जवाब न मिला। वह आगे बढ़ा। पहली मंजिल पर एक बड़ा हॉल था। बीच में एक पुराना पियानो खड़ा था। अर्जुन ने छुआ, तो अचानक धुन बजने लगी – एक उदास धुन। वह पीछे हटा। "ये कैसे?"रात हो चुकी थी। बाहर बारिश शुरू हो गई। अर्जुन को लगा कि अब लौटना मुश्किल है। वह ऊपर के कमरे में गया। वहाँ एक पुराना बिस्तर था, जिस पर सफेद चादर पड़ी थी। चादर हिली। अर्जुन का दिल धक् से रह गया। "कौन?" उसने टॉर्च जलाई। कुछ न था। लेकिन आईने में उसकी परछाईं के पीछे एक औरत की परछाईं दिखी – वही रानी लक्ष्मी। लंबे बाल, सफेद साड़ी, आँखें लाल।अर्जुन भागा। सीढ़ियाँ उतरते हुए कदमों की आवाज सुनाई दी। पीछे मुड़कर देखा – कोई नहीं। हॉल में पहुँचकर वह रुका। पियानो फिर बज रहा था। धुन के साथ एक आवाज आई, "मुझे छोड़ न जाओ... अर्जुन..." उसका नाम? कैसे?वह डर गया लेकिन उत्सुक भी। उसने मोबाइल निकाला। सिग्नल न था। कैमरे में रिकॉर्डिंग ऑन की। "कौन हो तुम?" उसने पूछा। हवा में फुसफुसाहट हुई, "मैं रानी लक्ष्मी... 1890 में मेरे पति ने मुझे मार डाला... यहाँ कैद हूँ मैं।"अर्जुन को यकीन न हुआ। "झूठ! ये हवा का खेल है।" लेकिन तभी कमरे की लाइटें झपकने लगीं – बिजली तो कटी हुई थी। दीवार से खून की तरह लाल रंग टपकने लगा। अर्जुन भागा, लेकिन दरवाजा न खुला। पीछे से ठंडी साँस महसूस हुई। मुड़कर देखा – रानी खड़ी थी। चेहरा पीला, आँखें खाली। "तुम्हें मैंने बुलाया है... मेरी मदद करो।"अर्जुन चीखा। वह कमरे के कोने में जा गिरा। रानी बोली, "मेरा पति राजा विक्रम था। वह क्रूर था। उसने मुझे दीवार में चुनवा दिया। मेरी चूड़ियाँ अभी भी दीवार में हैं। उन्हें निकालो, तो मैं मुक्त हो जाऊँगी।" कहते हुए वह गायब हो गई।अर्जुन को नींद आ गई। सपने में वह 1890 में पहुँच गया। हवेली सजी हुई थी। रानी नाच रही थी। राजा ने जहर दिया। रानी गिर पड़ी। मजदूरों ने उसे जिंदा दीवार में चुन लिया। चूड़ियाँ खनक रही थीं। अचानक सपना टूटा। सुबह हो रही थी। अर्जुन उठा। हवेली सामान्य लग रही थी। लेकिन दीवार पर खून के निशान थे।वह बाहर निकला। जीप स्टार्ट की और भागा। घर पहुँचकर कैमरे की रिकॉर्डिंग देखी। आवाज साफ थी – रानी की। दोस्तों को बताया। वे हँसे, "भूतिया कहानी बना दी!" लेकिन अर्जुन को चैन न था। रात को सपने आने लगे। रानी कहती, "वापस आओ... चूड़ियाँ निकालो।"एक हफ्ते बाद, अर्जुन दोस्त रोहन के साथ लौटा। रोहन नास्तिक था। "देखते हैं क्या होता है।" वे अंदर गए। वही पियानो, वही तस्वीर। रोहन ने दीवार टटोली। अचानक एक चूड़ी गिरी। सोने की, पुरानी। फिर दूसरी। रोहन हँसा, "ये तो पुरानी चीजें हैं।"लेकिन तभी कमरा काँपने लगा। दीवार फट गई। अंदर एक कंकाल – रानी का। चूड़ियाँ पहने हुए। कंकाल हिला। रानी की आत्मा प्रकट हुई। "धन्यवाद... अब मैं मुक्त हूँ। लेकिन राजा का बदला लूँगी।" वह राजा की तस्वीर की ओर गई। तस्वीर जल गई। हवेली हिलने लगी। दोनों भागे। बाहर आते ही हवेली ढह गई। धूल का गुबार छा गया।अर्जुन और रोहन साँस लेते रहे। चूड़ियाँ उनके हाथ में थीं। पुलिस आई। जांच हुई। कंकाल मिला – 1890 का। डीएनए टेस्ट से साबित हुआ कि वो रानी लक्ष्मी था। राजा विक्रम का कंकाल भी मिला, जहर से मरा हुआ। गाँव वाले दंग रह गए। अर्जुन की कहानी अखबारों में छपी।लेकिन अर्जुन को शांति न मिली। रातों को चूड़ियों की खनक सुनाई देती। एक रात चूड़ियाँ गायब हो गईं। सुबह खबर आई – राजा के वंशज, एक अमीर व्यापारी की मौत हो गई। हार्ट अटैक। अर्जुन समझ गया – रानी मुक्त हुई, लेकिन उसका बदला पूरा हुआ।अब भूतिया हवेली का नाम बदल गया। लोग कहते, "रानी मुक्त हो गई। लेकिन सावधान, चूड़ियाँ अभी भी भटकती