Mout ki Dastak - 26 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 26

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 26

चुड़ैल का श्राप 

एक छोटे से पहाड़ी गाँव में, जहाँ घने जंगल चारों ओर फैले हुए थे, चुड़ैल का नाम सुनते ही लोग काँप जाते थे। गाँव के बाहर पुराना मंदिर था, जिसे 'चुड़ैल मंदिर' कहा जाता था। वहाँ रात में काली परछाईं भटकती, लंबे बाल उड़ते, और डरावनी हँसी गूँजती।राहुल, दिल्ली से आया नौजवान इंजीनियर, गाँव में अपनी नानी के पास छुट्टियाँ मनाने आया था। नानी ने चेतावनी दी, "बेटा, जंगल में मत जाना। वहाँ चुड़ैल रहती है—काली रानी। सौ साल पहले गाँव वालों ने उसे जिंदा जला दिया था। अब वह बदला लेती है।" राहुल हँसा, "नानी, ये सब अंधविश्वास है। आजकल साइंस का जमाना है।"जंगल की शुरुआतअगली सुबह राहुल के दोस्त विक्रम ने कहा, "चल, जंगल में ट्रेकिंग करें। मंदिर देखेंगे।" राहुल मान गया। दोपहर को वे जंगल में घुसे। हवा ठंडी हो गई, पेड़ों की डालियाँ अपने आप हिलने लगीं। रास्ते में पुरानी हड्डियाँ पड़ी थीं। विक्रम बोला, "ये जानवरों की हैं। डर मत।"शाम ढलते-नलते वे मंदिर पहुँचे। मंदिर टूटा-फूटा, दीवारों पर काले निशान। अंदर मूर्ति के पास काली साड़ी का टुकड़ा पड़ा था। राहुल ने फोटो खींची तो कैमरे में धुंधला साया दिखा। "हवा का खेल," उसने कहा। लेकिन विक्रम डर गया, "चल, लौटते हैं।"रास्ते में अजीब आवाज़ आई—एक औरत की हँसी, लेकिन खीख जैसी। पीछे मुड़कर देखा तो दूर एक काली आकृति। लंबे बाल, पीला चेहरा, आँखें लाल। वे भागे, लेकिन रास्ता गुम हो गया। रात हो चुकी थी।चुड़ैल का आगमनरात के 12 बजे जंगल में सन्नाटा था। राहुल और विक्रम एक गुफा में छिपे। अचानक हवा तेज चली, पत्तियाँ उड़ीं। गुफा के बाहर कदमों की आहट। "कोई है?" राहुल चिल्लाया। जवाब में हँसी—"हा हा हा... आ गए मेरे जाल में।"चुड़ैल प्रकट हुई। उसका चेहरा भयानक—दाँत नुकीले, नाखून लंबे। "मैं काली रानी हूँ। गाँव वालों ने मुझे धोखा दिया। मेरे पति को मार दिया, मुझे चुड़ैल कहा। अब तुम्हें ले लूँगी।" राहुल ने पत्थर फेंका, लेकिन वह हवा बन गई। विक्रम बेहोश हो गया।चुड़ैल ने राहुल को पकड़ लिया। उसके स्पर्श से ठंडक फैली। "तुम्हारी नानी ने मुझे जला दिया था। अब तुम्हारा बदला लूँगी।" राहुल को पुरानी यादें दिखीं—चुड़ैल का जीवन। वह सुंदर थी, गाँव के ठाकुर से शादी हुई। ठाकुर ने धोखा दिया, गाँव वालों ने आग लगा दी। उसकी चीखें आज भी गूँजतीं।भयानक रातचुड़ैल राहुल को जंगल के बीच ले गई, जहाँ पुराना बरगद का पेड़ था। पेड़ की जड़ों में हड्डियाँ दबी थीं। "यहाँ मेरी कब्र है। तुम्हें दफना दूँगी।" राहुल चीखा, "मुझे छोड़ दो! मैं गाँव को सच बताऊँगा।" चुड़ैल हँसी, "कोई नहीं मानता।"विक्रम जागा, भागा। लेकिन चुड़ैल ने उसे पकड़ लिया। दोनों को पेड़ से बाँध दिया। रात भर भयानक दृश्य—चुड़ैल उड़ती, चमगादड़ इकट्ठे हुए। सुबह होने को था। राहुल ने सोचा, "भगवान बचाओ।"अचानक नानी की आवाज़ गूँजी। वह जंगल आई थी। हाथ में तावीज। "काली रानी, तेरा बदला पूरा हो गया। ये निर्दोष हैं। जा, मुक्ति पा।" चुड़ैल चीखी, लेकिन तावीज की रोशनी में गायब हो गई। पेड़ की जड़ें ढीली पड़ गईं। राहुल और विक्रम बच गए।गाँव का रहस्यसुबह गाँव लौटे। नानी ने बताया, "काली रानी निर्दोष थी। ठाकुर ने झूठ बोला। मैंने उसे जलने नहीं दिया, लेकिन देर हो गई। तावीज में उसकी राख है।" गाँव वालों ने मंदिर बनवाया, चुड़ैल को शांति दी।राहुल कभी निडर नहीं रहा। जंगल अब शांत है, लेकिन रात में हल्की हँसी सुनाई देती है। चुड़ैल चली गई, लेकिन उसका श्राप याद दिलाता है—अन्याय का फल भयानक होता है।