शीर्षक: हवेली की आख़िरी रात
दरभंगा शहर से कुछ दूर एक पुरानी हवेली थी। लोग उसे काली हवेली कहते थे। दिन में भी उसके पास से गुजरते समय लोगों की चाल तेज़ हो जाती थी। रात में तो कोई उस रास्ते से गुजरने की हिम्मत ही नहीं करता था।
कहते हैं कि कई साल पहले उस हवेली में एक अमीर ज़मींदार रहता था। उसकी एक बेटी थी—नैना। बेहद खूबसूरत, लेकिन उतनी ही रहस्यमयी। एक रात अचानक हवेली में आग लगी और उसके बाद से वह जगह हमेशा के लिए सूनी हो गई। कुछ लोगों का दावा था कि उन्होंने आधी रात को हवेली की खिड़कियों में किसी लड़की की परछाईं देखी है।
पटना से आया एक लड़का था—आरव। उसे रहस्यमयी जगहों की सच्चाई जानने का शौक था। लोग उसे डराने की कोशिश करते, लेकिन वह हंस देता।
एक दिन उसने गांव के चाय वाले से पूछा,
“यह हवेली सच में भूतिया है या लोगों की बनाई कहानी?”
चाय वाला धीरे से बोला,
“बाबू, रात में मत जाना। कई लोग गए… वापस नहीं आए जैसे गए थे।”
आरव मुस्कुराया।
“मतलब?”
“मतलब… उनका दिमाग बदल गया था।”
यही बात आरव के अंदर जिज्ञासा जगा गई।
उसने तय कर लिया—आज रात वह हवेली में जाएगा।
रात के करीब 11 बजे वह टॉर्च, कैमरा और बैग लेकर हवेली पहुंच गया। आसमान में बादल थे और हवा तेज़ चल रही थी। हवेली का बड़ा लोहे का गेट आधा टूटा हुआ था।
जैसे ही उसने गेट धक्का दिया—
कर्ऱर्ऱर्र…
आवाज़ पूरे सन्नाटे में गूंज गई।
अंदर घुसते ही उसे अजीब सी ठंड महसूस हुई। जैसे किसी ने अचानक तापमान गिरा दिया हो।
“बस पुरानी बिल्डिंग है,” उसने खुद से कहा।
हवेली के अंदर धूल, जाले और टूटी हुई चीजें थीं। दीवारों पर पुराने चित्र लटके थे। एक चित्र पर उसकी नज़र अटक गई।
एक लड़की का चित्र।
आरव ठिठक गया।
चित्र में बनी लड़की की आँखें… जैसे उसे देख रही हों।
“अजीब है…” वह बुदबुदाया।
अचानक पीछे से पायल की हल्की आवाज़ आई।
छन… छन… छन…
आरव ने तुरंत टॉर्च पीछे घुमाई।
कोई नहीं।
हवा बंद हो गई थी। पूरा माहौल भारी हो गया था।
“शायद कोई जानवर होगा।”
लेकिन तभी फिर वही आवाज़।
इस बार ऊपर की मंज़िल से।
छन… छन…
अब उसका दिल थोड़ा तेज़ धड़कने लगा।
फिर भी जिज्ञासा डर से बड़ी थी।
वह धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ने लगा।
सीढ़ियाँ पुरानी थीं और हर कदम पर आवाज़ करती थीं।
टक… टक… टक…
ऊपर पहुंचकर उसने देखा—एक लंबा गलियारा।
गलियारे के आखिर में एक कमरा खुला था।
कमरे के अंदर हल्की रोशनी थी।
“यह कैसे हो सकता है…?” उसने सोचा।
वह धीरे-धीरे कमरे की तरफ बढ़ा।
जैसे ही दरवाज़े के पास पहुंचा—
कमरे के अंदर किसी लड़की की परछाईं हिली।
आरव का गला सूख गया।
उसने हिम्मत करके अंदर टॉर्च मारी।
कमरा खाली था।
लेकिन कमरे के बीचोंबीच एक कुर्सी थी… जो धीरे-धीरे हिल रही थी।
जैसे अभी कोई वहां से उठा हो।
अब उसे सच में डर लगने लगा।
तभी उसके पीछे से किसी ने फुसफुसाया—
“तुम… क्यों आए हो…?”
आरव बिजली की तरह पलटा।
कोई नहीं।
उसकी सांस तेज़ हो गई।
“क…कौन है?”
कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा।
फिर अचानक कमरे का दरवाज़ा धड़ाम से बंद हो गया।
आरव दौड़कर दरवाज़ा खोलने गया—
लेकिन दरवाज़ा हिल भी नहीं रहा था।
तभी पीछे से फिर वही पायल की आवाज़ आई।
इस बार बिल्कुल उसके पास।
छन… छन…
उसने धीरे-धीरे पीछे देखा।
और उसका खून जम गया।
उसके पीछे एक लड़की खड़ी थी।
सफेद कपड़े… लंबे बाल… और जल चुकी त्वचा।
उसकी आँखें काली थीं।
“तुम… यहां क्यों आए…?” उसने धीमी आवाज़ में पूछा।
आरव का शरीर कांप रहा था।
“म…मैं बस… सच्चाई जानना चाहता था…”
लड़की मुस्कुराई।
लेकिन वह मुस्कान इंसानी नहीं थी।
“सच्चाई…?”
कमरे की हवा अचानक ठंडी हो गई।
दीवारों पर परछाइयाँ हिलने लगीं।
लड़की धीरे-धीरे उसके पास आने लगी।
“लोग कहानी सुनते हैं…
लेकिन कोई हमारी कहानी नहीं सुनता…”
आरव पीछे हटने लगा।
“तुम… नैना हो?”
लड़की अचानक रुक गई।
कुछ पल के लिए उसकी आँखों में दर्द झलक गया।
“हाँ…”
कमरे में अचानक फुसफुसाहट गूंजने लगी।
जैसे कई लोग एक साथ बोल रहे हों।
“हम सब यहाँ हैं…”
आरव ने चारों तरफ देखा।
अब कमरे में सिर्फ एक नहीं… कई परछाइयाँ थीं।
तभी नैना ने उसका हाथ पकड़ लिया।
उसका हाथ बर्फ जैसा ठंडा था।
“अब तुम भी हमारी कहानी का हिस्सा बनोगे…”
आरव चिल्लाया—
“नहीं!”
अचानक उसकी टॉर्च नीचे गिर गई।
कमरा अंधेरे में डूब गया।
कुछ सेकंड बाद हवेली फिर से शांत हो गई।
अगली सुबह गांव वालों ने देखा—
हवेली का गेट खुला हुआ था।
अंदर ज़मीन पर एक कैमरा पड़ा था।
कैमरे में आखिरी तस्वीर थी।
एक अंधेरा कमरा…
और आरव के पीछे खड़ी एक लड़की।
जिसकी आँखें सीधे कैमरे की तरफ देख रही थीं।
उस दिन के बाद गांव वालों ने एक और बात कहना शुरू कर दिया—
अब हवेली में एक और परछाईं दिखाई देती है।
और कभी-कभी रात में किसी लड़के की आवाज़ भी सुनाई देती है—
“कोई है… यहाँ…?”
लेकिन जवाब में सिर्फ पायल की आवाज़ आती है…
छन… छन… छन… 👣