शर्मा परिवार शहर के एक शांत से मोहल्ले में रहता था। घर में ज़्यादा शोर-शराबा नहीं था, सब कुछ समय पर चलता था। सुबह 7 बजे चाय, 9 बजे ऑफिस, 10 बजे घर में सन्नाटा।
घर के सदस्य थे—
रमेश शर्मा – सख़्त लेकिन दिल के अच्छे
सुनीता जी – हर किसी की फिक्र करने वाली माँ
अमित – बड़ा बेटा, ऑफिस और मोबाइल का गुलाम
नेहा – अमित की पत्नी, समझदार लेकिन अनुशासन पसंद
सब कुछ बिल्कुल ठीक चल रहा था…
जब तक एक दिन दरवाज़े पर ज़ोर से बेल नहीं बजी।
🚪 देवर जी की एंट्री
दरवाज़ा खोला तो सामने खड़ा था एक मुस्कुराता हुआ लड़का—
कंधे पर बड़ा बैग, आँखों में सपने और मुँह में आत्मविश्वास।
“नमस्ते भाभी! पहचान नहीं पाईं? मैं राहुल… आपका देवर!”
नेहा चौंकी—
“अरे राहुल! तुम अचानक?”
राहुल हँसते हुए बोला—
“अब यहीं रहूँगा भाभी। शहर में कुछ बड़ा करने आया हूँ!”
पीछे से सुनीता जी की आवाज़ आई—
“अरे मेरा लाडला आ गया!”
रमेश जी ने चश्मा ठीक करते हुए पूछा—
“कितने दिन के लिए?”
राहुल ने मासूमियत से जवाब दिया—
“जब तक किस्मत ना चमक जाए, पापा।” 😄
नेहा के मन में एक ही सवाल गूंज रहा था—
“ये कितने दिन चलेगा?”
☕ देवर जी की दिनचर्या
अगले ही दिन से घर का माहौल बदल गया।
राहुल सुबह 11 बजे उठता और सबसे पहले आवाज़ लगाता—
“भाभी… चाय!”
नेहा चिढ़कर बोली—
“नाश्ता भी कर लो।”
“नाश्ता बाद में, पहले चाय से आत्मा जागेगी।”
चाय पीकर राहुल मोबाइल निकालता और रील्स बनाने लगता।
कभी माँ के साथ डांस,
कभी पापा को डायलॉग सिखाता—
“पापा बोलिए— मैं कूल हूँ!”
रमेश जी गुस्से में बोले—
“मैं 30 साल नौकरी करके भी कूल नहीं हुआ!” 😂
📱 घर बना शूटिंग लोकेशन
अब घर में हर जगह कैमरा ही कैमरा।
किचन, हॉल, छत, यहाँ तक कि पूजा घर के बाहर भी।
एक दिन नेहा झाड़ू लगा रही थी।
अचानक राहुल बोला—
“भाभी, ऐसे ही झाड़ू लगाते रहो… ये रियल कंटेंट है!”
नेहा ने झाड़ू पटक दी—
“मैं तुम्हारा कंटेंट नहीं हूँ!”
घर में हँसी छूट गई, लेकिन नेहा का सब्र धीरे-धीरे खत्म हो रहा था।
😤 झगड़े की शुरुआत
एक रात फ्रिज से नेहा ने केक रखा था।
सुबह देखा— केक गायब!
नेहा गुस्से में—
“केक कहाँ गया?”
राहुल ने मुँह पोंछते हुए कहा—
“भाभी, वो एक्सपायर होने वाला था।”
“कल ही लाया था!”
“तो मैंने समाज सेवा कर दी।” 😄
यही नहीं—
टीवी पर सिर्फ कॉमेडी चैनल,
नेहा की साड़ी पर कॉफी,
और ऊपर से रोज़ का डायलॉग—
“भाभी, आप बहुत सीरियस हो।”
आख़िरकार नेहा फट पड़ी।
💥 बड़ा टकराव
“राहुल, तुम यहाँ मेहमान बनकर आए थे या घर संभालने?”
घर में सन्नाटा छा गया।
सुनीता जी चुप, अमित मोबाइल से नज़रें हटाकर देखने लगा।
राहुल बिना कुछ बोले उठकर छत पर चला गया।
🌙 इमोशनल मोमेंट
रात को नेहा छत पर गई।
राहुल अकेला बैठा था, बिना मोबाइल के।
नेहा ने धीरे से पूछा—
“बुरा लगा?”
राहुल बोला—
“भाभी, मैं सबको हँसाता हूँ… क्योंकि खुद डरा हुआ हूँ।
मुझे नहीं पता मैं ज़िंदगी में कुछ बन पाऊँगा या नहीं।”
पहली बार नेहा ने राहुल को मज़ाक से बाहर देखा।
उसे एहसास हुआ—
ये लड़का मस्ती में अपनी चिंता छुपाता है।
🌱 बदलाव की शुरुआत
नेहा ने कहा—
“हँसी अच्छी बात है राहुल, लेकिन मेहनत के साथ।”
अगले दिन से राहुल बदला।
टाइम पर उठने लगा
घर के काम में हाथ बँटाने लगा
कंटेंट को सीरियस तरीके से सीखने लगा
उसने घर के अनुभवों पर वीडियो बनाने शुरू किए—
“Devar Ji Ghar Par Hain”
🌟 सफलता
धीरे-धीरे वीडियो वायरल होने लगे।
लोगों को परिवार की सच्ची हँसी पसंद आई।
एक दिन राहुल चिल्लाया—
“भाभी! पहला पेमेंट आया!”
पूरा परिवार खुश हो गया।
रमेश जी बोले—
“तो ये मोबाइल सच में काम का है।”
❤️ खुशहाल अंत
राहुल ने सबको मिठाई खिलाई।
नेहा मुस्कुराकर बोली—
“अब तुम देवर नहीं, घर की शान हो।”
राहुल हँसते हुए बोला—
“लेकिन चाय आप ही बनाओगी।”
नेहा ने जवाब दिया—
“सुबह 8 बजे!” 😄
घर फिर से हँसी से भर गया।
🌸 कहानी की सीख
हर हँसी के पीछे एक संघर्ष होता है।
और जब परिवार साथ दे, तो हर सपना सच हो सकता है।
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