✨ एपिसोड 61 — “अधूरी खिताब” ✨
रात गहरी थी…
हवा में हल्की ठंडक, चांदनी खिड़की से कमरे में गिर रही थी।
अयान उस रात बिल्कुल भी सो नहीं पा रहा था।
दिल में कुछ ऐसा उथल-पुथल चल रहा था जिसे वह खुद भी समझ नहीं पा रहा था।
“क्यों… क्यों मैं उसे लेकर इतना बेचैन रहता हूँ…?”
उसने खुद से पूछा, पर जवाब उसके पास नहीं था।
दूसरी ओर—
रिया अपने कमरे में बैठी, सामने खुली डायरी को देख रही थी।
सफेद खाली पन्नों पर उसके आँसू चुपचाप गिरते गए।
वहीं लिखा था—
“अधूरी खिताब… मेरी अधूरी कहानी…”
लेकिन उसे लगता था कि अब ये कहानी सिर्फ उसकी नहीं रही।
---
💫 सुबह का तूफ़ान
सुबह होते ही रिया कॉलेज पहुँची, लेकिन आज उसकी चाल धीमी थी।
चेहरा उतरा हुआ, आँखों में बेचैनी साफ़ दिख रही थी।
जैसे पूरी रात उसके अंदर कोई युद्ध चलता रहा हो।
कॉलेज के गेट पर उसे अयान दिखाई दिया, जो हमेशा की तरह किसी से घिरा हुआ नहीं था।
आज वह अकेला खड़ा था…
और उसकी नज़रें उसी को तलाश रही थीं।
जैसे ही रिया आगे बढ़ी—
अयान ने उसका रास्ता रोक लिया।
अयान: “रिया… बात करनी है तुमसे।”
रिया ने आँखें चुराईं, पर आवाज़ में हल्की काँप थी—
“किस बात पर?”
अयान ने एक गहरी सांस ली, जैसे महीनों से मन में दबा हुआ शब्द बाहर आने को तड़प रहा हो।
“तुम कल अचानक चली क्यों गई थी? मैंने तुम्हें बुलाया था।”
रिया ठिठक गई।
दिल ने धड़धड़ाना शुरू कर दिया।
“मैं… मुझे काम था।”
अयान को उसका जवाब एक झूठ जैसा लगा।
वह एक कदम और पास आया—
इतना पास कि रिया को उसकी सांस तक महसूस हुई।
“रिया… मुझसे झूठ मत बोलो। तुम मुझसे दूर क्यों हो रही हो?”
रिया की आँखों में डर और दर्द दोनो दिखाई दिए।
“क्योंकि… तुम मेरे नहीं हो अयान…”
अयान पहली बार सचमुच चौंक गया।
---
⚡ दिल की उलझनें
अयान: “क्या मतलब?”
रिया: “मतलब ये कि तुम जैसी जिंदगी जीते हो… मैं उसमें नहीं फिट बैठती।”
अयान: “और तुम कौन हो ये तय करने वाली कि मेरी जिंदगी में कौन फिट है?”
रिया ने नजरें झुका लीं।
उसे डर था…
दूरी बनाने की वजह वही "अधूरी खिताब" थी—
वही बिता हुआ दर्द…
वही तिरस्कार…
वही वह वादा जो उसने खुद से किया था कि वह फिर कभी नहीं टूटेगी।
लेकिन अयान जैसे उसके दिल की दीवारों पर हाथ से दरारें डाल रहा था।
अयान ने उसका हाथ पकड़ना चाहा—
रिया ने झटके से हाथ खींच लिया।
“प्लीज अयान… मुझे परेशान मत करो।”
अयान का चेहरा सख़्त हो गया, लेकिन आँखों में बेचैनी थी।
“तुम परेशान हो रही हो… या मैं तुम्हें पसंद आने लगा हूँ इसलिए डर रही हो?”
रिया के कदम रुक गए…
दिल थम गया…
हवा तक ठहर गई।
उसे पता था कि अयान सच बोल रहा है।
उसे डर था…
डर था कि कहीं ये कहानी भी उसकी पिछली कहानी जैसी “अधूरी” ना रह जाए।
---
💥 अचानक हुआ टकराव
तभी एक आवाज़ आई—
“रिया!!”
रिया के बचपन का दोस्त निशांत वहाँ आ गया।
वह रिया की हालत देखकर घबरा गया।
निशांत: “तुम ठीक हो? ये तुम्हें परेशान कर रहा है क्या?”
अयान की आँखों में गहरा गुस्सा उतर आया।
“तुम बीच में क्यों आ रहे हो?”
“क्योंकि रिया मेरी दोस्त है।”
अयान ने कड़वाहट भरी हंसी हँसी—
“दोस्त? या तुम उससे कुछ और चाहते हो?”
निशांत ने रिया के सामने खड़े होकर कहा—
“रिया को ऐसे लड़कों से बचाना ही पड़ेगा।”
अयान का खून खौल उठा।
वह गुस्से से निशांत के बिल्कुल सामने जा खड़ा हुआ।
“मेरे बारे में एक और शब्द कहा, तो अच्छा नहीं होगा।”
निशांत भी पीछे हटने वालों में से नहीं था।
“रिया रो रही थी… और ये सब तुम्हारी वजह से है। अब समझ गया मैं।”
---
🔥 रिया का फट पड़ना
दोनों एक-दूसरे को धक्का देने वाले थे कि रिया चिल्ला पड़ी—
“बस!! दोनों बस करो!!”
उसकी आँखें नम थीं…
आवाज़ काँप रही थी।
“मैं कोई चीज़ नहीं हूँ जिसके लिए तुम दोनों लड़ो।”
अयान तुरंत शांत हो गया।
निशांत भी एक कदम पीछे हट गया।
रिया ने सीधे अयान की तरफ देखा—
उसकी आँखों में दुख था, तड़प थी… लेकिन थोड़ी उम्मीद भी।
“अयान… तुम मेरी ज़िंदगी में क्यों आए हो? तुम मुझसे क्या चाहते हो?”
अयान कुछ पल चुप रहा।
फिर धीमे लेकिन साफ़ शब्दों में बोला—
“सच?”
“हाँ… सिर्फ सच।”
अयान उसके पास आया।
चांदनी में उसकी आँखें झील की तरह गहरी लग रहीं थीं।
“मैं तुम्हें दूर नहीं होने दूँगा।
क्योंकि… मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता।”
रिया का दिल जोर से धड़का।
उसके होंठ काँपे—
“क्यों अयान… क्यों?”
अयान ने गहरी सांस लेते कहा—
“क्योंकि… तुम मेरी अधूरी खिताब नहीं… मेरी पूरी कहानी बन रही हो।”
रिया वहीं खड़ी रह गई।
उसके पैरों में जैसे जान ही नहीं रही।
ये वही शब्द थे…
जो उसने कभी अपनी डायरी में अपने लिए लिखे थे।
पर कभी सोचा नहीं था कि कोई और उसके लिए ऐसा कहेगा।
---
🌙 रात की बेचैनी
उस रात रिया घर पहुँचकर बहुत देर तक रोती रही।
डायरी का वही पन्ना खोला—
“अधूरी खिताब…”
लेकिन आज उसने उसके नीचे लिखा—
“शायद अब ये कहानी अधूरी नहीं रहेगी।”
दूसरी ओर अयान भी छत पर बैठा था, आसमान की ओर देखते हुए।
उसके मन में सिर्फ एक ही ख्वाहिश थी—
“रिया… मुझे मौका दे दो।
मैं तुम्हें कभी अधूरा नहीं छोड़ूँगा।”
कहानी अब एक नए मोड़ पर थी—
जहाँ दोनों दिलों में चाहत थी…
लेकिन डर भी उतना ही गहरा।
---