⭐ एपिसोड 60 — “हवेली का पहला हिसाब”
कहानी — अधूरी किताब
किताब के गिरते ही पूरा कमरा एक अजीब-सी ठंडक से भर गया।
जैसे किसी ने हवा में बर्फ का धुआँ घोल दिया हो।
दीवारों पर टंगी पुरानी तस्वीरें हल्की-हल्की हिलने लगीं,
मानो कोई अनदेखी शक्ति उन्हें जगा रही हो।
निहारिका ठहर गई।
उसकी सांसें तेज़ थीं, दिल धड़कनों से बाहर आ रहा था।
आर्यन ने धीमे स्वर में कहा—
“ये हवेली… जिंदा हो चुकी है।”
अभिराज ने अपनी आँखें किताब पर टिकाए रखीं—
“किताब की आखिरी लाइन…
‘खून का हिसाब’—
ये मज़ाक नहीं है।
ये हवेली अब एक-एक पाप का कर्ज वसूल करेगी।”
सिया एक कदम पीछे हटी, उसकी आवाज़ काँप रही थी—
“लेकिन निहारिका ने कौन-सा पाप किया है?
वह तो बस… इस खून का हिस्सा है!”
अभिराज धीरे से बोला—
“हवेली खून को नहीं देखती…
वह वंश को देखती है।
और वंश में छिपा हर पाप वारिस का ही बोझ बनता है।”
निहारिका के दिल पर जैसे किसी ने पत्थर रख दिया हो।
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🕯 पुराने कमरे की दीवार पीछे सरकती है…
अचानक जमीन हिली।
दीवार के एक हिस्से में दरारें पड़ीं और वह अचानक पीछे की ओर सरकने लगी—
मानो कोई गुप्त रास्ता खुल रहा हो।
गहरे अंधेरे के बीच एक पतली नीली रोशनी चमकी।
वहाँ एक संकीर्ण रास्ता था…
जिसके दोनों ओर दीवारों पर खून से बने हाथों के निशान थे।
सिया डर गई—
“ये कैसा रास्ता है?”
अभिराज की आँखें गंभीर थीं—
“पहली वारिस की बहन को इसी रास्ते से ले जाया गया था…
जहाँ उसके साथ…”
वह रुक गया।
वह सच्चाई बोल भी नहीं पाया।
निहारिका की उंगलियाँ ठंडी पड़ गईं।
“शायद…
उसी का हिसाब मुझसे लिया जाएगा।”
आर्यन तुरंत विरोध में बोला—
“नहीं! हम तुम्हें अकेले जाने नहीं देंगे!”
उसी पल किताब हल्के से चमकी और उसके पन्ने हवा में खुद-ब-खुद खुल गए।
एक नई पंक्ति उभरी—
“पहला हिसाब… वारिस को ही देना होगा।”
अभिराज निहारिका की ओर मुड़ा—
“हवेली तुम्हें बुला रही है, निहारिका।
और अगर तुम नहीं गई…
तो हवेली हम तीनों को इसकी कीमत चुकवाएगी।”
कमरे का तापमान अचानक गिर गया।
दीवारों पर सफेद धुंध जैसे उभर आई।
समझते देर नहीं लगी—
हवेली इंतज़ार नहीं करेगी।
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🌑 निहारिका गुप्त रास्ते में कदम रखती है
उसने गहरी सांस ली और आगे बढ़ी।
जैसे ही निहारिका ने उस गुप्त मार्ग में कदम रखा—
नीली रोशनी उसके पैरों के नीचे दौड़ गई।
दीवारें जैसे फुसफुसाने लगीं:
“वारिस… वारिस…”
उसके पीछे अभिराज, सिया और आर्यन भी अंदर आए।
रास्ता बहुत संकरा था,
और अंदर हवा ठंडी… खतरनाक।
अचानक रास्ते के बीचोंबीच कोई भारी चीज़ गिरने की आवाज़ आई।
सब चौकन्ने हो गए।
सिया फुसफुसाई—
“कोई… यहाँ है।”
अभिराज ने हाथ उठाकर सबको रुकने का इशारा किया।
धीमे स्वर में बोला—
“यह आवाज़ इंसानी नहीं थी…”
निहारिका ने आँखें बंद कीं।
उसे इस हवेली की आवाज़ें अब पहले से ज्यादा साफ सुनाई दे रही थीं—
मानो हवेली उसके दिमाग में बोल रही हो।
फिर उसने सुना—
“पहला पाप… पहली जगह…”
उसकी आँखें खुल गईं—
“वो… हमें सामने वाले कमरे में बुला रही है।”
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🩸 पुराना तहखाना — सच का पहला हिस्सा
गुप्त रास्ते के अंत में एक लोहे का दरवाज़ा था—
जंग लगा, टूटा हुआ…
पर जब निहारिका करीब गई,
दरवाज़ा खुद-ब-खुद चरमराता हुआ खुल गया।
तहखाने के अंदर अंधेरा था।
हल्की-सी मोमबत्ती एक कोने में जल रही थी—
जैसे किसी ने बहुत पहले उसे जलाया हो and वो अब भी बुझने से इंकार कर रही थी।
कमरे के बीचोंबीच एक लकड़ी की मेज़ थी।
और उस पर पड़ा था—
खून से सना एक रेशमी दुपट्टा।
निहारिका का दिल थम गया।
“यह… वही दुपट्टा है…”
उसके स्वर में डर था, लेकिन पहचान भी।
“दर्पण में दिखाई देने वाली लड़की का।”
अभिराज ने गंभीर स्वर में कहा—
“पहला हिसाब शायद उसी दुपट्टे से जुड़ा है।”
सिया ने दुपट्टे को छूने की कोशिश की—
लेकिन दुपट्टा अचानक हवा में उठा
और निहारिका के सामने आकर ठहर गया।
अगले ही पल—
दुपट्टा उसके सिर पर खुद से बंध गया।
निहारिका चीख उठी।
अभिराज और आर्यन उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़े,
लेकिन हवेली की तेज हवा ने उन्हें पीछे धकेल दिया।
कमरे में आवाज़ गूँजी—
“वारिस को पहले दर्द का साक्षी बनना होगा…”
निहारिका की आँखों के सामने अचानक अतीत जीवंत हो उठा।
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👁 अतीत का पहला दृश्य — पाप की शुरुआत
उसने देखा—
एक लड़की, बिल्कुल उसकी जैसी।
माथे पर वही लाल निशान।
कांपती हुई…
रोती हुई…
और सामने खड़ा एक आदमी—
उसका भाई।
आदमी ने क्रोध में दुपट्टा उसके हाथ से खींचा
और चीखा—
“तू ही मेरा रास्ता रोक रही है!
अगर तू न होती…
तो हवेली मेरा नाम लेती!”
और अगला ही पल—
दुपट्टा खून में रंग गया।
निहारिका की सांसें रुक गईं।
आवाज़ गूँजी—
**“यही पहला खून…
अब वारिस को समझना होगा।”**
अतीत गायब हुआ।
निहारिका ज़मीन पर गिर पड़ी—
तेज़ सांस लेती हुई।
उसकी आँखें डर और सदमे से फैली हुई थीं।
अभिराज उसके पास भागा—
“निहारिका! क्या हुआ?”
वह काँपते हुए बोली—
“पहला पाप…
खून की शुरुआत…
यही थी…”
उसके हाथ काँप रहे थे।
उसका कंधे वाला निशान और भी चमकने लगा।
आर्यन धीमे स्वर में बोला—
“तो यह… पहला हिसाब था?”
निहारिका ने
सिर हिलाया—
“नहीं…
यह सिर्फ शुरुआत थी।”
मोमबत्ती अचानक बुझ गई।
तहखाने में अंधेरा उतर आया।
और अंधेरे में आवाज़ फुसफुसाई—
“अब दूसरा हिसाब…”
कमरा हिलने लगा।
दरवाज़ा खुद-ब-खुद बंद हो गया।
और हवेली के अगले पाप का रास्ता खुल चुका था—