"बरसों बाद तुम..." का एपिसोड 18
🖋️ एपिसोड 18: "जब अजनबी कुछ अपना सा कह जाए..."
> "कुछ चुप्पियाँ होती हैं, जो सब कह जाती हैं…
और कुछ मुलाकातें होती हैं, जो उम्र भर साथ रह जाती हैं।"
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स्थान: जयपुर — एक शाम की हल्की बारिश
रेहाना खिड़की के पास बैठी थी। हाथ में कॉफी का प्याला और सामने वो डायरी, जिसमें अब आरव के शब्दों से ज्यादा उसकी मौजूदगी बस चुकी थी।
बारिश की बूंदें शीशे पर गिरती रहीं, जैसे हर बूँद उसके भीतर कुछ नया जगा रही थी।
आरव कुछ दिनों से शहर से बाहर था — ऑफिस के एक आर्ट प्रोजेक्ट पर। लेकिन उनकी बातचीत अब हर रात की आदत बन चुकी थी।
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फोन कॉल — रात 9:47
> आरव: "सुनो..."
रेहाना: "हाँ..."
आरव: "वो जगह याद है? कॉलेज के पीछे वाली खाली दीवार, जहाँ तुमने मेरा नाम लिखा था… उल्टा?"
रेहाना (हँसते हुए): "ताकि कोई पढ़ न सके… पर तुम समझ जाओ!"
आरव: "मैं अब भी समझता हूँ। उस दीवार के सामने खड़ा हूँ। लगता है जैसे सब कल ही हुआ हो।"
रेहाना: "और मैं यहाँ बैठी, उस पल को फिर से जी रही हूँ…"
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Scene Cut — अगले दिन, जयपुर के एक आर्ट गैलरी में
रेहाना और उसकी दोस्त माही एक आर्ट एग्ज़िबिशन में आई थीं।
हर पेंटिंग कुछ कह रही थी — रंग, भाव, और अधूरी सी कहानियाँ।
लेकिन तभी… एक पेंटिंग के सामने रेहाना ठिठक गई।
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उस पेंटिंग में था… एक लड़की और एक लड़का —
बारिश में भीगते हुए, एक ही छतरी में…
लड़की की आँखें बंद थीं, लड़के की निगाहें बस उसी पर टिकी थीं।
> "ये… ये तो हमारी पहली बारिश जैसी है!"
माही: "कहीं ये आरव की पेंटिंग तो नहीं?"
रेहाना: "हो भी सकती है… उसने कहा था कि एक खास प्रोजेक्ट पर है…"
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Gallery Owner से बात
रेहाना उस पेंटिंग के पास गई और वहाँ नीचे छोटा सा नाम लिखा था —
“Unknown Love | By: A. Raaz”
> रेहाना: "Excuse me, ये पेंटिंग किसने बनाई?"
Owner: "ये एक नए आर्टिस्ट का काम है — 'A. Raaz'. लेकिन कोई भी उसकी असली पहचान नहीं जानता। सिर्फ ऑनलाइन काम भेजता है।"
रेहाना मुस्कुराई।
उसे पता था — 'A. Raaz' मतलब आरव... और उसका 'Raaz' — अब भी उसके साथ था।
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उसी रात — व्हाट्सएप पर एक मैसेज
> 🖼️ “तुमने मेरी पेंटिंग देखी…?”
🕯️ “हाँ, और फिर से भीग गई…”
❤️ “अब भी हर रंग में सिर्फ तुम्हें ही भरता हूँ।”
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Scene Shift — एक नया किरदार
नाम: आदित्य
पहचान: माही का कज़िन, जो हाल ही में लंदन से वापस आया है।
कलाकार, पर लिखने में विश्वास करता है।
वो रेहाना से पहली बार मिलता है — एक कैफे में, जब माही उन्हें मिलवाती है।
> आदित्य: "तुम वो हो ना… जिसकी आँखों में कहानियाँ ठहरी होती हैं?"
रेहाना (हैरान): "और तुम?"
आदित्य (मुस्कुराते हुए): "बस… एक अजनबी, जो कुछ अपना सा महसूस कर रहा है।"
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रेहाना का मन डगमगाया नहीं, लेकिन सोच में जरूर गया।
क्या किसी अजनबी को इतनी आसानी से कोई पहचान सकता है?
क्या शब्दों के बिना कोई मन के दरवाज़े तक पहुंच सकता है?
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अगले कुछ दिन — आदित्य का बार-बार मिलना
वो दोस्त बना, फिर करीबी…
रेहाना को कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि कोई उसकी बातों को इतने ध्यान से सुन सकता है।
पर वो आरव को भूली नहीं थी।
हर रात की कॉल, हर सुबह का 'Good Morning'…
उनकी कहानी अब अधूरी नहीं लगती थी — लेकिन कहीं न कहीं असुरक्षित जरूर।
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एक रात — जब आदित्य ने पूछ लिया…
> "क्या तुम्हारा दिल अब भी बीते वक़्त में अटका है?"
रेहाना चुप रही।
"क्योंकि अगर हाँ… तो मैं उस बीते वक़्त से लड़ नहीं सकता।
लेकिन अगर नहीं… तो शायद मैं कुछ नया बन सकता हूँ — तुम्हारे साथ।”
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रेहाना का जवाब था... एक मुस्कुराहट — लेकिन खाली सी।
> "कभी-कभी किसी को पाने के लिए, सिर्फ नज़दीक होना काफी नहीं होता…
ज़रूरी होता है उस वक़्त का हिस्सा होना, जिसमें उसने खुद को खोया था।"
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अंतिम दृश्य: एक चिट्ठी — जो आदित्य ने रेहाना को दी, बिना खोले चले गया।
"तुम्हें चाहना मेरी गलती नहीं थी…
लेकिन तुम्हें खोने का डर, मेरी हार बन गया।
फिर भी, जब कभी भी तुम्हें लगे कि कोई तुम्हारे शब्दों को सुन सकता है…
तो जान लेना, मैं अब भी वहीं हूँ — बिना शोर, बिना उम्मीद… बस अपनेपन के साथ।
— आदित्य”
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🔚 एपिसोड समाप्त।
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📝 एपिसोड 19 Preview: “जब अतीत और वर्तमान टकराए…”
> क्या आरव को आदित्य की मौजूदगी का अहसास होगा?
क्या रेहाना का दिल अब भी दोराहे पर है?
या मोहब्बत को फिर से परखना पड़ेगा।।