🖤 माफ़िया की नज़र में –
Part 13: "आखिरी बलिदान"
"कभी-कभी बलिदान सिर्फ़ जान का नहीं, बल्कि दिल का होता है। और वो दर्द ज़िंदगी से भी भारी पड़ता है।"अहाना का दिल अब जैसे थम सा गया था। पुरानी मिल का अंधेरा, गोलियों की गूंज, और रायान का खून से लथपथ ज़मीन पर गिरना—सब कुछ एक दर्दनाक हकीकत बन चुका था। निहारिका और विक्रम की नफ़रत भरी नज़रें, मायरा का अचानक आना, और पापा की आखिरी चिट्ठी—“मैंने ये दुनिया चुनी। तुम इसे मत चुनना”—उसे एक ऐसी राह पर खींच रही थी, जहाँ हर कदम का मतलब था जिंदगी या मौत।अहाना रायान के पास झुकी, उसकी आँखों में आँसू थे। “रायान, तुम… तुम ठीक हो ना?” उसकी आवाज़ काँप रही थी। रायान का चेहरा पीला पड़ चुका था, लेकिन उसकी आँखों में वही तेज़ी थी। “अहाना… भाग जाओ,” उसने कमज़ोर आवाज़ में कहा। “मेरे लिए… अपने पापा का वादा पूरा करो।”विक्रम ने ठंडी हँसी हँसी, उसकी बंदूक अब भी तनी थी। “वादा? तुमने उसके पापा का वादा तोड़ा, रायान। और अब ये लड़की तुम्हारी गलती की कीमत चुकाएगी।”मायरा ने रॉड को और कसकर पकड़ा, उसकी नज़रें निहारिका पर थीं। “अहाना को छूने की कोशिश भी मत करना!” उसने चिल्लाया।लेकिन अहाना का दिमाग अब सिर्फ़ एक बात पर अटक गया था—पापा की चिट्ठी। “रायान पर भरोसा करो… लेकिन उसकी गलती को माफ़ मत करना।” “क्या गलती?” उसने मन में सोचा। उसे सच चाहिए था, चाहे उसकी कीमत उसकी जान ही क्यों न हो।
🌌 मिल में खूनी जंग
मिल का अंधेरा अब और गहरा हो गया था। बारिश की बूँदें टूटी छत से टपक रही थीं, और गोलियों की आवाज़ें हवा में गूंज रही थीं। विक्रम के आदमियों ने रायान के बॉडीगार्ड्स पर हमला कर दिया था। अहाना ने रायान को सहारा दिया और उसे एक टूटी मशीन के पीछे खींच लिया।“रायान, मुझे सच बताओ,” उसने कहा, उसकी आँखों में गुस्सा और दर्द था। “वो डील… मेरे पापा की मौत… तुमने क्या गलती की?”रायान ने दर्द से कराहते हुए कहा, “अहाना… मैंने विक्रम पर भरोसा किया। तुम्हारे पापा ने मुझे चेतावनी दी थी कि वो धोखा देगा, लेकिन मैंने नहीं माना। मैंने सोचा… मैं सब संभाल लूँगा। लेकिन उस रात… विक्रम ने तुम्हारे पापा को फँसाया। और मैं… मैं वहाँ नहीं था जब उन्हें ज़रूरत थी।”अहाना की आँखों में आँसू थे, लेकिन अब वो गुस्से में बदल रहे थे। “तो तुमने उन्हें अकेला छोड़ दिया? मेरे पापा को मरने दिया?”रायान ने उसका हाथ पकड़ा, उसकी साँसें भारी थीं। “नहीं, अहाना। मैंने कोशिश की। लेकिन… वो लोग पहले ही उनके पास पहुँच चुके थे। मैं आज तक उस गुनाह का बोझ ढो रहा हूँ।”तभी एक गोली अहाना के पास से गुज़री, और वो नीचे झुक गई। विक्रम और निहारिका अब करीब आ रहे थे। मायरा ने निहारिका पर रॉड से हमला किया, लेकिन निहारिका ने तेज़ी से उसे धक्का दिया। “मायरा, ये तुम्हारी लड़ाई नहीं है!” निहारिका ने चिल्लाया।मायरा ने गुस्से से कहा, “अहाना मेरी दोस्त है! और तू… तूने उसे धोखा दिया!”अहाना ने मायरा की तरफ देखा, उसका दिल भारी था। “मायरा मेरे लिए अपनी जान जोखिम में डाल रही है। मुझे कुछ करना होगा।”
🌃 अहाना का बलिदान
अहाना ने एक गहरी साँस ली। उसने रायान की तरफ देखा, फिर मायरा की ओर। “मुझे इस जाल से सबको निकालना होगा।” उसने डायरी को बैग में डाला और GPS ट्रैकर को कसकर पकड़ा।“विक्रम!” अहाना ने चिल्लाकर कहा, अपनी आवाज़ को मज़बूत करते हुए। “तुम्हारा बदला मुझसे है, तो मुझे ले लो। लेकिन रायान और मायरा को छोड़ दो!”रायान ने कमज़ोर आवाज़ में कहा, “अहाना, नहीं… ऐसा मत करो…”विक्रम ने ठंडी मुस्कान दी। “बलिदान? ठीक है, अहाना। लेकिन तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हें ज़िंदा छोड़ दूँगा?”निहारिका ने हस्तक्षेप किया। “विक्रम, इसे खत्म करो। रायान को मारो, और इस लड़की को ले चलो।”लेकिन तभी मिल के बाहर एक और गाड़ी की आवाज़ गूंजी। अहाना ने खिड़की से झाँका—एक पुलिस की गाड़ी थी। सायरन की आवाज़ हवा में गूंज रही थी।विक्रम का चेहरा सख्त हो गया। “पुलिस? ये कैसे?”मायरा ने हँसते हुए कहा, “मैंने GPS ट्रैकर का सिग्नल पुलिस को भेजा था। अब तुम सब फँस चुके हो!”विक्रम ने गुस्से से मायरा की तरफ बंदूक तानी, लेकिन अहाना ने तेज़ी से उसके सामने कूदकर मायरा को धक्का दिया। “मायरा, भाग!” उसने चिल्लाया।तभी एक और गोली चली। अहाना ने आँखें बंद कर लीं, लेकिन दर्द की जगह उसे रायान का हाथ महसूस हुआ। उसने उसे ज़मीन पर खींच लिया था। “अहाना, मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा,” उसने कहा, उसकी साँसें अब और कमज़ोर थीं।पुलिस की गाड़ियाँ अब मिल के चारों ओर थीं। विक्रम और निहारिका ने अपने आदमियों को इशारा किया और भागने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने मिल को घेर लिया।अहाना ने रायान को कसकर पकड़ा। “रायान, तुम्हें कुछ नहीं होगा,” उसने कहा, उसकी आँखों में आँसू थे।रायान ने मुश्किल से मुस्कुराया। “अहाना… मैंने तुम्हारे पापा का वादा तोड़ा। लेकिन तुम… तुम उनकी तरह हो। बहादुर।”
🌫️ एक नया रहस्य
पुलिस ने विक्रम और निहारिका को पकड़ लिया। मायरा अहाना के पास दौड़ी और उसे गले लगा लिया। “तू ठीक है?” उसने चिंता से पूछा।अहाना ने सिर हिलाया, लेकिन उसकी नज़रें रायान पर थीं। पुलिस ने उसे स्ट्रेचर पर ले जाया, और एम्बुलेंस की सायरन गूंजने लगी।तभी अहाना की नज़र उस बक्से पर गई, जिसमें उसे पापा की चिट्ठी मिली थी। उसने उसे फिर से खोला। अंदर एक और कागज़ था, जिस पर लिखा था:“अहाना, अगर तुम ये पढ़ रही हो, तो तुमने सच ढूंढ लिया। लेकिन एक आखिरी सच बाकी है। रवि को ढूंढो। वो तुम्हें मेरी आखिरी सलाह देगा।”अहाना का दिल रुक गया। “रवि? वो तो हवेली में घायल हो गया था। क्या वो ज़िंदा है?”तभी उसका फोन वाइब्रेट हुआ। एक अनजाना नंबर से मैसेज था:
“अहाना, मैं रवि हूँ। मैं ज़िंदा हूँ। कल रात, सेंट जेवियर्स कॉलेज के पीछे। आखिरी सच तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है।”
💥 To Be Continued…अहाना ने रायान को बचा लिया, लेकिन क्या वो खुद को बचा पाएगी?
रवि का आखिरी सच क्या है?
विक्रम और निहारिका की हार के बाद क्या कोई नया खतरा इंतज़ार कर रहा है?
Part 14 में होगा:अहाना और रवि की मुलाकात।पापा का आखिरी सच, जो सब कुछ बदल देगा।रायान और अहाना के बीच एक ऐसा पल, जो उनके रिश्ते को हमेशा के लिए परिभाषित करेगा।अगर ये हिस्सा आपके दिल की धड़कनें बढ़ा गया, तो फॉलो करना न भूलें। क्योंकि अब कहानी का हर पल एक नया तूफ़ान लाएगा।
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