Dil ne jise chaha - 18 in Hindi Love Stories by R B Chavda books and stories PDF | दिल ने जिसे चाहा - 18

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दिल ने जिसे चाहा - 18

उस रात का सन्नाटा...

उस रात रुशाली के कमरे में खामोशी थी,
पर उसके ज़ेहन में एक तूफान चल रहा था।

"क्या मयूर सर मुझे पसंद करते हैं?"
"अगर हाँ, तो मेरे उस सवाल का जवाब क्यों नहीं दिया उन्होंने?"
"क्यों बस चुप रह गए?"

दिल बार-बार वही सवाल कर रहा था,
और दिमाग हर बार नए-नए जवाब ढूंढता।

वो सोचती रही —
"क्या उनकी चुप्पी में कोई इकरार छुपा था?"
"या फिर इनकार?"

एक और सोच...

"अगर वो मुझे पसंद नहीं भी करते,
तो भी जब तक उनकी सगाई नहीं होती,
मैं अपनी तरफ से कोशिश करूँगी
कि मैं उन्हें भी पसंद आऊं
और उनके परिवार को भी।"

"पर उनका परिवार?"
"हम एक ही जाति से नहीं हैं, और में डॉक्टर भी नहीं हूं!..
क्या वो मुझे अपनाएंगे?"

लेकिन फिर वो खुद से बोल उठी —
"मुझे पहले ये जानना होगा कि
मयूर सर के दिल में मेरे लिए क्या है..."


रात के क़रीब 12 बजे, उसने मोबाइल उठाया,
बहुत देर तक स्क्रीन पर नाम घूरती रही —
Dr. Akdu

फिर दिल कड़ा कर के एक छोटा सा मैसेज टाइप किया:

“सर, मैं कल से 10 दिनों तक नहीं आउंगी!"

बस इतना ही।

ना कोई वजह बताई,
ना कोई explanation दी।

उसे भेजते ही दिल ज़ोरों से धड़कने लगा।

उधर... मयूर सर उस वक़्त अपने लैपटॉप पर कोई रिपोर्ट देख रहे थे।
फोन की टोन बजी — उन्होंने तुरंत उठाया।
रुशाली का मैसेज।

आँखें कुछ पल वहीं अटक गईं।
मन जैसे ठहर सा गया।

उन्होंने रिप्लाई में सिर्फ एक ही शब्द लिखा —
“Ok.”

बस।

ना कोई सवाल किया,
ना कुछ और लिखा।

लेकिन क्या उन्हें फर्क नहीं पड़ा...?

बहुत पड़ा।

पर वो ये जताना नहीं चाहते थे।

उनके भीतर एक अजीब सी बेचैनी दौड़ गई।
सोचने लगे —

“क्या रुशाली मुझसे दूर जाना चाहती है?”
“क्या वो इस जॉब को छोड़ने वाली है?”
“क्या मैंने कोई ऐसा संकेत दे दिया जिससे उसे ऐसा लगा?”

उनके दिल में कई सवाल उभर रहे थे,
पर उन्होंने खुद को शांत रखा।

मयूर सर का आत्मसंवाद – (अंदर की आवाज़)

"मुझे उससे बात करनी चाहिए थी...." पर मैं अपनी चाहत का इकरार भी नहीं कर सकता हूं..."
शायद मैं उससे दूर रहकर उसकी रिस्पेक्ट कर रहा हूं ... या मैं उसे खुद से दूर कर रहा हूं ..."

डायरी में मयूर सर कुछ लिखते है!....

जो कहा नहीं, वही सबसे गहरा था,
जो रुका रहा, वही सबसे सच्चा था।
तेरे मैसेज की वो खामोशी,
मेरे मन की आंधी को और भी बढ़ा गई।

अगली सुबह – हॉस्पिटल में

सुप्रिटेंडेंट ने एक मेल दिखाया:

“रुशाली ने leave के लिए application भेजा है — दस दिन की छुट्टी, college exams की वजह से।”

मयूर सर ने थोड़ी राहत की साँस ली।
उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान उभरी,
जिसे उन्होंने छुपा लिया।

"तो वो कहीं नहीं जा रही..."
"वो वापस आएगी..."

मन के अंदर एक सुकून था,
पर चेहरे पर अब भी वही गंभीरता।

उधर रुशाली...

Exams की पढ़ाई के साथ-साथ दिल का तूफान भी जारी था।

हर कुछ घंटे में उसका मन करता कि मयूर सर को फिर से मैसेज करे...
पूछे, “क्या आपको मेरे 10 दिनों तक हॉस्पिटल ना आने के मैसेज से कोई फर्क नहीं पड़ा?"

डायरी के पन्नों पर रुशाली की बेचैनी...

"आज उनका सिर्फ 'OK' पढ़ा...
पर उस OK में कितनी चुप्पियाँ थीं..."

"क्या वो भी डरते हैं?
या फिर मैं ही इस रिश्ते को बढ़ा चढ़ा के देख रही हूँ?"

तीसरा दिन... चौथा दिन...

मयूर सर रोज़ OPD में काम करते,
पर हर दिन की शुरुआत एक ही सोच से होती —
“क्या रूशाली के exams अच्छे जा रहे होंगे? 
“क्या वो खुश होगी...? या मुझे ही याद कर रही है?”

उसी दिन......

डॉ. कुणाल: " यार मयूर, तू आजकल काफ़ी silent है? कुछ प्रॉब्लम है क्या?"

मयूर सर: "नहीं... बस work pressure hai..."

कुणाल (मुस्कुराकर): "शायद रुशाली नहीं है, इसलिए तुझे उसकी याद आ रही होगी, है ना?....

मयूर सर (थोड़ा चौंक कर): " क्या मतलब?.."

कुणाल: " अबे सबको पता चले या ना चले लेकिन मुझे पता चल गया है कि रूशाली तुझे पसंद है... पर तू यह उससे और बाकी सब लोगो से छुपा रहा है...!

मयूर सर चुप रह गए।
कई बार सच सामने हो,
तो इंसान चुप ही रह जाता है।

उधर रुशाली की अपनी माँ से बात - 

माँ: "बेटा, तू थोड़ा परेशान लग रही है... exam का stress है क्या?"
रुशाली: "नहीं माँ... बस थोड़ी उलझन है..."
माँ: "दिल की?"
रुशाली (आश्चर्य से): "माँ, आपको कैसे पता?"
माँ (मुस्कुराकर): "जो आँखें रोज़ किसी की तलाश करती हों,
वो सिर्फ किताबें नहीं ढूंढ रहीं होतीं बेटा..."

नवां दिन...

अब दोनों ही अधीर हो चुके थे।

रुशाली हर दिन सोचती —
"क्या वो मुझे मिस कर रहे होंगे?"

और मयूर सर हर रोज़ सोचते —
"क्या वो वापस आएगी?"

दसवां दिन – दिल की हलचल

मयूर सर सुबह-सुबह हॉस्पिटल जल्दी पहुँच गए।
हर आती लड़की को एक नज़र देखते,
पर रुशाली नहीं थी।

"शायद आज उसका exam खत्म होगा..."
"क्या वो कल आएगी?"
"या... अब कभी नहीं?"


रुशाली की योजना...

Exams के आखिरी पेपर के बाद,
उसने अपने दिल से एक वादा किया —

"कल से मैं फिर से हॉस्पिटल join करूंगी...
मयूर सर से मिलूंगी...
और उनके सामने खड़ी होकर पूछूंगी —
क्या मेरी कोई जगह है आपके दिल में?"

अंत में एक कविता – दोनों के लिए

तेरी चुप्पियों से डरती हूं मैं,
पर फिर भी तेरे पास रहना चाहती हूं।
तेरे हर ‘OK’ में जो दूरी है,
उसे तोड़ना चाहती हूं।
अगर तू कुछ ना भी कहे,
तो भी तुझे महसूस करना चाहती हूं।
क्योंकि जो दिल ने चाहा है,
वो सिर्फ तू है... सिर्फ तू।
---
जारी रहेगा...

अगले भाग में पढ़िए —
जब रुशाली हॉस्पिटल लौटती है,
तो क्या मयूर सर अपने जज़्बात ज़ाहिर कर पाएंगे?
या फिर एक और चुप्पी दिलों को और दूर ले जाएगी?
या फिर क्या कुछ ऐसा होगा जिससे रुशाली और मयूर सर दोनों ही एकदूसरे से हमेशा के लिए दूर हो जाएंगे?
या फिर मयूर सर रुशाली को अपनी चाहत का इकरार करेंगे?

जल्द ही ......