यथार्थसंजना एकदम से हडबडाहठ में बिस्तर से नीचे उतरी दबे पाँव हाॅल में पहुंची देखा कि हर्षवर्धन तो वहां नहीं है | महौल खाली देख वो बोली ", ये आदमी कहा गया ( आवाज लगाते हुए ) हैलो..... संजना कि कई बार आवाज लगाई लेकिन उसे मालूम हुआ कि हर्षवर्धन शायद वहां नहीं था | ये देख संजना बडी खुश हुई और वो तुरंत ही सामने के खुले दरवाजे से बाहर निकली देख कि सामने तो एक भयानक जंगल था | उसे डर लग रहा था| सोच रही थी कि कही कोई जंगली जानवर मिल गया तो लेकिन उसने हिम्मत करी और जंगल में चल पडी, भयानक जंगल में रोमांटिक और डरावना सीन
संजना की साँसें तेज़ चल रही थीं। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसने हिम्मत करके जंगल में कदम रखा था, लेकिन जैसे ही सामने एक बड़ा, डरावना शेर आया, उसकी सारी हिम्मत टूट गई। शेर की आँखें चमक रही थीं, उसकी गुर्राहट से संजना का शरीर कांप उठा। वह दौड़ने लगी, पर अंधेरे में एक जड़ से टकराकर गिर पड़ी।
शेर उसकी ओर झपटा। संजना ने चीखने के लिए मुँह खोला, लेकिन आवाज़ गले में ही अटक गई। तभी अचानक, हवा में एक चीख गूंज उठी— "संजना!!"
हर्षवर्धन बिजली की तरह आया और शेर के सामने खड़ा हो गया। उसकी आँखों में बेखौफ गुस्सा था। शेर कुछ पल हर्षवर्धन को घूरता रहा, फिर गुर्राते हुए अंधेरे में गायब हो गया।
संजना काँपती हुई वहीं पड़ी थी। हर्षवर्धन ने झुककर उसे अपने मजबूत बाजुओं में उठा लिया।
"तुम पागल हो क्या? यहाँ क्या कर रही थी?" उसकी आवाज़ में गुस्सा और चिंता दोनों थे।
संजना ने कुछ कहने की कोशिश की, लेकिन डर के मारे बोल नहीं पाई। उसने बस अपने कांपते हाथ हर्षवर्धन की शर्ट को कसकर पकड़ लिया और उसके सीने से लग गई।
"श्श्श… अब सब ठीक है," हर्षवर्धन ने धीरे से कहा, उसकी पीठ सहलाते हुए।
वह उसे लेकर वेयरहाउस में पहुँचा और हॉल के सोफे पर बैठाया। संजना के घुटने छिल गए थे, उसके हाथ कांप रहे थे। हर्षवर्धन ने फर्स्ट एड बॉक्स उठाया और धीरे-धीरे मरहम लगाने लगा।
जब उसकी उँगलियाँ संजना की त्वचा को छूतीं, तो उसकी धड़कन और तेज़ हो जाती। वह दर्द भूलकर बस हर्षवर्धन को देख रही थी। उसकी आँखों में अब भी डर था, लेकिन कहीं ना कहीं एक सुकून भी था— कि वह अब सुरक्षित थी, उसके साथ थी।
हर्षवर्धन ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "डर तो बहुत रही थी, पर जंगल में जाने की हिम्मत कहाँ से आई?"
संजना ने धीमे से कहा, "मुझे लगा... मुझे लगा कि तुम कहीं चले गए। तो मैं...
हर्षवर्धन उसकी आँखों में झाँकते हुए बोला, "मैं कभी तुम्हें अकेला नहीं छोड़ूंगा।"
उसकी गहरी, परवाह भरी आवाज़ सुनकर संजना की आँखें नम हो गईं। वह फिर से उसके गले से लग गई, और इस बार हर्षवर्धन ने भी उसे कसकर अपनी बाहों में भर लिया।
बाहर जंगल की ठंडी हवा थी, लेकिन अंदर... उनके बीच की गर्माहट ने सब कुछ भुला दिया।
संजना के अंदर कुछ तो ऐसा था कि जिसे हर्षवर्धन दर्द देने लाया था अब उसकी फ्रिक कर रहा था | वही हर्षवर्धन कि हरकत से जहां संजना नराज थी लेकिन फिर भी उसकी ओर एक एटरेक्शन महसूस कर रही थी | दोनों एक दुसरे कि आंखों में खोकर किन्हीं ओर ख्याल में चले गई | वही दूसरी तरफ संजना के घर में जब उसके डैड का फोन आया तो सुषमा मासी ने संजना के गायब होने कि खबर दी | संजना के डैड तुरंत ही एक डिटक्टीव हायर किया और सीधे उसे इंडिया दिल्ली भेज दिया |और अब वो ही संजना को ढूंढने में लग चुका था | वही वैसे हाऊस में हर्षवर्धन संजना एक दुसरे में खोए चूके थे एक नई दुनिया में जा चूके थे एक नई कहानी के साथ सपना देखने लगे खुली आंखों से |