तेरा चेहरा देखकर प्यार आता है
और तेरी बातें सुनकर दिल तार तार हो जाता है
एक भर पुराना महफिल
किसी की पार्टी चल रही है
वही उस पार्टी में एक लड़का
जो देखने में पीछे से भी बड़ा प्यारा लग रहा है
वह किसी लड़के से हाथ मिलाते हुए
स्माइल करते हुए बात कर रहे हैं
और वही उस लड़के के पीछे 10 15 कदम दूर
एक लड़की अपने दोनों हाथों की उंगलियां एक दूसरे हाथों से पकढ़ते हुए
उस लड़के की तरफ देख रही है
चुपचाप खामोश होठ के साथ
और उसे देखते हुए मन में कुछ सोच रही है
भोला सा सूरत
मासूम सा चेहरा
आंखें गहरी समुद्र जैसा
कटक काठी बॉडी ऐसी कि नजदीक जाकर छूने का मन करे
सीने पर हाथ रखने का मन करे
ड्रेसिंग सेंस ऐसा कि किसी को भी दीवाना बना दे
बिना मुड़ के देखे तुम्हें कोई रह नहीं सकता
अपनी राहों पर चलते हुए
बिना देखे तुम्हें
कोई चलकर सीधा जा भी नहीं सकता
क्या जितने प्यारे तुम लगते हो
इतने ही प्यार तुम सबके साथ हो
जैसे तुम मेरे साथ हो
कठोर निर्णय भावनाएं हीन
मुझे नहीं लगता तुम सबके साथ वैसे ही हो
मैंने तुमको करीब से देखा है
सबसे हंसते बातें करते हुए
सलीके से पेश आते हैं
और मैं तुमको अपने भी करीब देखा है
सीरियस होकर रूड बातें करते हुए
कठोर पेश आते हुए
मुझे समझ में नहीं आता
तुम मेरे साथ ऐसे क्यों हो
हर बार खुद से सवाल करती हूं
आखिर क्यों
तुम्हें पसंद नहीं
क्यों तुम्हें मुझसे नफरत होती है
क्या मैं इतनी बुरी हूं
तुम्हें देखना और बस देखते रेहना
और ख्यालों में ही तुम्हें चाहते रहना
क्या मैं जिंदगी भर यही करती रहूं
मैं बार-बार पीछे लौट कर अपनी जिंदगी को देखती हूं
अपनी गलतियों को ढूंढने की कोशिश करती हूं
तुम्हारी व्यवहार से उठी मेरे सीने की दर्द को डटोलती हूं
और सोचती हूं
आखिर मैं ने तुम्हारा क्या बिकर है
कुछ तो ऐसा हुआ होगा ना
जिसके वजह से तुम्हें मुझसे नफरत है
पर मुझे याद नहीं
मेरी गलतियां तुम्हारे साथ की गई बुरी व्यवहार
इस वजह से मैं बेचैन हूं
पागलों की तरह रिएक्ट करती हूं
चिखती हूं चिल्लाती हूं और खुद से सवाल करती हूं
आखिर क्यों
तो कभी-कभी सोचती हूं
कि हिम्मत करू तुमसे पूछने की
की आखिर तुम्हें मैं पसंद क्यों नहीं
पर तुम्हें देखते ही दिल धड़क सा जाता है
और मैं वहीं थम जाती हूं
और तुम्हारा मेरे साथ की गई
रूट बताओ सोच कर
मेरी हिम्मत भी नहीं होती
की जाकर तुम्हें पूछूं
कि आखिर क्यों
तुम्हें मुझसे इतनी नफरत है कि
जहां मैं होती हूं
वहां तुम ठहरते भी नहीं
रोज मैं बार-बार खुद से सवाल करती हूं
ऐसा क्यों मैंने किया है
ठीक से नींद नही आती तुम्हें सोच कर
बेचैन बेताब रहती हूं तुमसे मिलने के लिए
पर अफसोस तुम्हारे सामना भी नहीं कर शकती
यह सोचकर कि
तुम्हें फिर मुझसे नफरत ना हो
मेरे सामने से उल्टे पैर पीछे हट कर चले ना जाओ
मैं बस सोचती रहती हूं और रोती रहती हुं
पर मुझे तुम्हारी रूड बताओ की
कोई सही जवाब नहीं मिलता मेरे अंदर
मैं क्या करूं
हर वक्त मेरे अंदर क्यों है
बस तुम्हें सोच कर
सचमुच में इंसान अजीब होते हैं
ऐसे इंसान पर मरते हैं
जो उनसे नफरत करता है
और मुझे लगता है कि मैं पागल हूं
ऐसे इंसान के पीछे भाग रही हूं
जिसके चेहरे को तो क्या सायों को भी नहीं छू सकती