एक गोल है सर्कस का
एक दायरा है सर्कस का,
जानवरों के करतबों का।
बंदर की गुलाटी,
शेर का पिंजरा,
भालू की दहाड़,
रिंगमास्टर का हंटर,
दर्शकों की तालियाँ,
गड़गड़ाहट और चटकारेदार प्रहार।
हर पशु का जीवन सर्कस,
बचपन, किशोरावस्था से मृत्यु तक सर्कस।
पढ़ा-लिखा ठेठ उल्लू-सा निर्देशक,
शेष सभी करते हैं सर्कस।
आग के गोले से गुजरना,
आज बचे, कल मरे, तय है निपटना।
शोर और चाबुक से छिलती चमड़ी,
मुट्ठी भर अन्न से पेट भरे, और हास्य करे।
कौन राजा, कौन रंक?
सब नियमित काज करें।
एक दायरा है सर्कस का,
जानवरों के करतबों का।
©DSR