आज वापस ले आया डाकिया खत मेरा
*वर्जन 1 - दर्द वाला:*
आज वापस ले आया डाकिया खत मेरा
बोला पता सही था लेकिन लोग बदल गए..
वो खिड़की अब भी वही है,
वो नाम की तख्ती भी वही है,
बस दस्तक देने वाला अब कोई नहीं रहा..
*वर्जन 2 - शायराना:*
आज वापस ले आया डाकिया खत मेरा
बोला पता सही था लेकिन लोग बदल गए..
स्याही अभी गीली थी मेरे आंसुओं से,
और लिफाफे पर अब भी तुम्हारे नाम की खुशबू थी..
पर तुम अब उस घर में नहीं रहते थे।
- कुशल पवार...