कविता
नारी तेरी यही कहानी,
आँचल में दूध और आँखों में पानी।
पर यह तो हुई बात पुरानी,
बदल गया समय, बदल गई नारी।
शिक्षा में वह अव्वल आए,
आसमान में ऊँची उड़ती जाए।
भारत के निर्माण कार्य में,
जीवन-शक्ति बन बहती जाए।
जात-पात सब पीछे छूटी,
अब सबको मिलता है सम्मान।
जो नारी पहले पिछड़ी थी,
आज बढ़ा रही देश की शान।
घर की नींव है हर एक बेटी,
भ्रूण हत्या फिर क्यों कराएँ?
जिसे बेटी नहीं अपनानी,
वह पहले अपनी सोच बदलाए।
संदेश:
"बेटी बचाएँ, बेटी पढ़ाएँ। नारी का सम्मान करें, क्योंकि जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं सुख, समृद्धि और सफलता का वास होता है।"
कवयित्री शालिनी गौतम