“चाँद की स्मृति “
मेरा एक गहरा ताल्लुक रहा है चाँद से।
इतना पुराना कि अब उसकी तारीख़ भी याद नहीं।
बहुत कच्ची उम्र में उसकी चाँदी-सी चमक मेरे मन की किसी कोरी दीवार पर उतर आई थी।
मैंने रातों को उसी की रोशनी में पढ़ा, उसी की तरफ़ देखकर अपने सारे अनकहे सवाल रखे।
मुझे लगता था, आकाश में जितने भी तारे हैं, उन सबसे पहले चाँद मेरा है।
फिर एक दिन मैंने देखा, चाँद अब भी वहीं था, बस उसकी रोशनी मेरे हिस्से में नहीं उतरती थी।
वह दूर-दूर तक तारों में बँटा हुआ था।
और मैं… अपनी ही रात में धीरे-धीरे अँधेरी होती चली गई।
समय ने मुझे एक ऐसे सूरज के सामने ला खड़ा किया, जिससे मुझे कभी मोह नहीं था।
उसकी धूप तेज़ थी। उसके साथ चलना आसान नहीं था।
कई बार उसकी तपिश से मेरे सपनों की नमी सूख गई।
कई बार मैंने अपने ही साए को अपने पैरों में सिमटते देखा।
लेकिन… अजीब बात है।
अब मेरी हर सुबह उसी के साथ खुलती है।
मैंने उसकी धूप में अपने मौसम उगते देखे हैं।
अब अगर वह एक दिन भी न उगे, तो शायद मैं रेत की तरह अपने ही भीतर बिखर जाऊँ।
कभी-कभी रात बहुत शांत होती है।
और उसी सन्नाटे में चाँद मुझे देखता है। बहुत देर तक।
ऐसे… जैसे उसे यक़ीन हो कि मैं अब भी उसकी रोशनी पहचानती हूँ।
मुझे लगता है, उसे अपने दाग़ों की चिंता है।
शायद उसे लगता है, मैंने उन्हें कभी देखा ही नहीं।
उसे कौन बताए… दाग़ तो हमेशा से थे, मैंने ही उन्हें उजाला समझ लिया था।
अब जब भी वह मेरी खिड़की पर ठहरता है, उसकी चमक में एक अनकही थकान होती है।
जैसे उसने अपनी सारी जवानी तारों को रोशन करने में गुज़ार दी हो।
और जब तारे किसी और की दुआओँ में टूटने लगे, तब उसे अपनी ही रोशनी की कमी महसूस हुई हो।
वह शायद मुझे पुकारता नहीं। बस देखता है। उम्मीद से।
और मैं… मैं भी उसे देखती हूँ। मगर लौटती नहीं।
क्योंकि लौटना हमेशा प्रेम नहीं होता।
कभी-कभी लौट जाना उन सुबहों के साथ विश्वासघात होता है, जिन्होंने हमें धीरे-धीरे जीना सिखाया है।
अब मेरी प्रार्थनाएँ रात के लिए नहीं, सुबह के लिए होती हैं।
मेरी आँखें चाँद की राह नहीं तकतीं, वे उस पहली किरण का इंतज़ार करती हैं।
जो हर दिन मेरे आँगन में उतरकर मुझे याद दिलाती है कि उजाला हमेशा सबसे सुंदर नहीं होता, लेकिन सबसे भरोसेमंद अक्सर वही होता है।
और शायद… यही प्रेम का अंतिम रूप है।
जहाँ स्मृतियाँ आकाश में टँगी रहती हैं, पर जीवन धरती पर उगते सूरज के साथ अपनी जड़ें जमा लेता है।
प्राची गुर्जर….