मैं और मेरे अह्सास
रंग
रंग नीली सी आँखों का भा गया हैं l
पहेली नजर में दिल पे छा गया हैं ll
तीर जैसे चुभ गया पहला ही वार l
ना मिटने वाला ज़ख्म लगा गया हैं ll
रंगबेरंगी दुनिया की जगमगा कर l
मोहब्बत की दुनिया सजा गया हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह