एक ही धारा के हैं ये दो अलग प्रवाह,
एक ही सीने की हलचल से होते हैं जवान;
एक संजोता है सपनों की खूबसूरत राह,
दूजा उजाड़ देता है दिल का ही आशियाना।
प्रेम आता है तो खुले हाथ साथ लाता है,
एक धीमा खिंचाव जो हमें पास खींचता है,
बंजर ज़मीन में भी वो उम्मीद उगाता है,
और धीमे से कहकर हर डर को जीतता है।
पर ठीक पीछे इसके, एक साया भी पलता है,
जब नफ़रत उसी आग पर हक़ जताती है,
बर्फ़ के नीचे एक कड़वा सा कोहरा चलता है,
जो मरे हुए अरमानों की राख से जनम पाती है।
ये दोनों अलग रास्तों के मुसाफ़िर नहीं हैं,
ये एक ही तलवार की दो धार हैं, ज़हरीली और हसीं।