🙏🙏आप अन्य को त्याग करने को कह सकते हो,
उसमें ना नहीं है।
कुछ 'अच्छा हो रहा हो तो त्याग करना' चाहिए,
अच्छी बात है।
बस वह त्याग प्रथम हमें करना चाहिए
बाद में किसी ओर को कहना चाहिए,
तभी तो एक उदाहरण बनेगा नहीं तो फिर व्यर्थ बातें।
सच्ची और अच्छी बातों का कोई भी कभी खुलकर विरोध नहीं कर पाएगा,
क्यूंकि सच सच ही होता है।
हमारी कथनी ओर करनी में साम्यता होनी चाहिए।
बुद्ध, महावीर, गांधी को उनके समर्थक तो ठीक है विरोधीयों भी ऐसे ही प्रणाम नहीं करते होंगे।🦚🦚