दो इलतिदा उसे, वो खाब मे मेरे,
दिल की हर धड़कन और सांस मे मेरे,,
वो खुशनसीब है, जिसका नसीब वो,
वो उम्मीद है मेरी, वो हर आस मे मेरे,,
चल पड़े कभी, वो रुकी घड़ी कभी,
दुआ है हर घड़ी, वो पास हो मेरे,,
हो गर कभी, लफ्ज़ साथ दे मेरे,
उसे बता सकू, क्यू दिल में बसी मेरे,,
काश उसका भी दिल इतना बेचन हो,
वो भी कभी कहे, वो बस इन्तेजार मे मेरे,,
-MASHAALLHA