अगर चल सकता है तो चल, ये नखरे मुझे पसंद नहीं,
मिज़ाज में जो हो बरहमी, वो लहजे मुझे पसंद नहीं।
वफ़ा की राह पर सीधा निकलना सीख ले पहले,
ये टेढ़े-मेढ़े रास्तों के, चक्कर मुझे पसंद नहीं।
ख़ुदा ने दिल दिया है तो उसे आईना सा साफ़ रख,
दिखावे की ये चमक-दमक, ये चेहरे मुझे पसंद नहीं।
मैं अपना हम-सफ़र खुद हूँ, मुझे तन्हा ही रहने दे,
जो पल में साथ छोड़ दें, वो साये मुझे पसंद नहीं।
सलीके से जो निभ जाए, वही रिश्ता मुकम्मल है,
जो सर पे बोझ बन जाए, वो रिश्ते मुझे पसंद नहीं।