क्या है बनारस
सिर्फ़ घाट की सीढ़ियाँ नहीं,
समय की गोद में बैठी
एक अनंत कथा है बनारस...
हर पाप, हर पीड़ा को
अपने आँचल में समेटती,
माँ गंगा है बनारस.....
हर साँस में मंत्र,
हर मौन में विश्वास,
सब कुछ समेटा है बनारस...
काशी की पवित्रता,
अस्सी घाट का शोर,
शिव की नागरी है बनारस...
जहाँ चिता की आग भी
सिखा दे जीवन का पाठ,
वहीं मोक्ष का द्वार है बनारस...
हर गली, हर कोना
अपनी कहानी सुनाता है,
हर दीवार में लिपटा
इतिहास है बनारस...
सुबह की पहली रोशनी में
घंटियों की गूंज,
शाम के जलते दीपों में
आसमान की मुस्कान है बनारस...
हवा के झोंके में छुपा,
ज़िंदगी का गीत है बनारस...
शहर नहीं, प्रेम का दूसरा
नाम है बनारस...