एक मरा हुआ इंसान या तो
मैं सोच रही हु
मैं खुद के बारे में किसी से कहूं
किसी और के नजरिया से तो
मैं खुद के बारे में या कहूंगी
उसे देखकर लगता है
कुछ भी नहीं है उसके लिए जहां में
मैंने उसे उतना करीब से नहीं जाना
कभी उसकी हंसी नायाब होती है तो
कभी उसके खामोशी जिंदगी की आंत को दर्शाता है
कोई ईच्छा नहीं कोई ओप्कीच्छा नहीं
ना कोई जीने की ख्वाहिश
बस जिंदा है
जिंदगी को बोझ समझ कर ढोते हुए
एक मारता हुआ इंसान
जो उधार पर जिंदगी जी रही हो
जिंदगी से कोई उम्मीद नहीं
जीने का कोई ईच्छा नहीं
फिर भी सासें चल रही है
न जाने क्यों
किस आश पर अब तलाक धड़कन धड़क रही है
मुझे कभी-कभी बिल्कुल समझ नहीं आता
उसके अन्दर बस गहरी खामोशी है या
उसके दिल के गहराई में कहीं कोई हलचल
जो उसे अब भी सांस लेने पर मजबूर कर रहा है
धीरे-धीरे ही ऐसे ही कदम बढ़ाने पर मजबूर कर रहा है
इस बेकार जिंदगी को जीते रहने पर मजबूर कर रहा है
मैं उससे ज्यादा तो नहीं जानता
पर वह मुझे समझ में भी नहीं आती
कभी-कभी लगता है कि
उसके खामोशी के पीछे तूफान है
कभी-कभी लगता है कि वह एक मर चुका इंसान है
जिसकी बस सांसे चल रही है
I don't know
सच में उसकी आंखें और उसकी ख़ामोशी
मुझे उलझा देता है
मुझे समझ में नहीं आता कि
वह किस तरह का इंसान है
उसका खुद का कोई एनर्जी नहीं है
जिसे देखकर मैं यह सोच सकूं कि
वह क्या है
वह एक ऐसा इंसान है
या तो वह टूट चुकी है
फिर भी खुद को संभाले बैठी है
या तो
वह मर चुकी है वह मान चुकी है
और मुर्दे का कोई ख्वाहिश नहीं होता