मंच सजा है, हम तैयार हैं!
आई घड़ी बड़ी सुहानी,
लेकर आई नई कहानी।
मंच सजा है, दीप जले हैं,
खुशियों के बादल से ढले हैं।
छोटे-छोटे हम नादान,
पर रखते हैं पक्का मान।
गीत सुनाने, ताल बजाने,
आए हैं हम हुनर दिखाने।
कोई बने नटखट सा बंदर,
कोई वीर सिपाही अंदर।
नृत्य करें हम, ताल मिलाएँ,
सबकी सुंदर तालियाँ पाएँ।
डर को दिल से दूर भगाकर,
मंच पे आएं शान बढ़ाकर।
प्यारे गुरुजी, माता-पिता को,
शीश झुकाकर नमन करें हम सबको।
अब तो बस यह जोश जगा है,
जीत का सूरज सामने खड़ा है।
तालियों से गूँज उठे यह संसार,
बोलो बच्चों— जय हो, जय हो मेरे यार!