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मेरी ज़ुल्फ़ें भी फीकी हैं उसके बिखरे बालों के आगे,
चाँद भी फीका लगे उसके चेहरे के उजालों के आगे।
उसकी एक झलक ही काफ़ी है दिल को बहकाने के लिए,
अल्फ़ाज़ भी कम पड़ जाएँ उसकी तारीफ़ में आने के लिए।
उसे लिखने बैठूँ तो पूरी रात भी कम पड़ जाए,
उसके ख़यालों में डूबूँ तो हर शायरी अधूरी रह जाए।
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