शायद मेरी कामयाबियाँ ईश्वर के लिए कोई मायने नहीं रखतीं,क्योंकि उनमें मेरा अभिमान छुपा होता है पर मेरी नाकामियाँ वो ही तो हैं जो मुझे उनके और करीब ले आती हैं,हर ठोकर के बाद जब मैं थककर सिर्फ उनका नाम लेता हूँ,तो लगता है यही मेरी सबसे सच्ची भेंट है मेरा हारना,मेरा टूटना,और उस टूटन में उनका आसरा ढूँढ लेना क्योंकि जीत तो दुनिया के लिए होती है,लेकिन हार सिर्फ ईश्वर के लिए...!