तारे फलक के सभी जगमगाने लगे
चाँद निकला तो सभी के चेहरे मुस्कुराने लगे
हमने उफ तक न की ये जाँ निकलने पे
हाँ मर गये तब, जब रुठकर वो जाने लगे
एक ठोकर क्या लगी उनकें पाँव को
राह के तमाम पत्थर हटाने लगे
अन्धेरों के खौफ से हमने जलाये थेे चिराग
तनहा पाकर हमें ये उजाले सताने लगे
मुझे घर याद आ गया परदेश में
परिंदें लौट के शाम को जब घर को जानें लगे