पुरुष जिन्होंने अपनी इच्छाओं को बाण शय्या पर लिटा दिया यह जानते हुए कि इस कलयुग के कुरुक्षेत्र में कोई कृष्ण नहीं खड़ा जो उनकी प्रतिज्ञाओं, अकेलेपन का मोल समझे,वे बिना किसी शिकायत फर्ज़ की ढाल बने और अपनी खुशियों की इच्छामृत्यु देकर परिवार के साम्राज्य को चुपचाप सींच रहे हैं...