समय का कालचक्र
समय के कालचक्र ने,
न जाने इंसान को कहाँ से कहाँ पहुँचा दिया।
जो कल अपनी राहों पर चलता था,
आज वही अपनी अंतिम यात्रा को विदा हो गया।
चलते-चलते जीवन ने,
न जाने कितने रूप दिखाए।
कभी खुशियों के पल दिए,
तो कभी अनुभवों के दीप जलाए।
इंसान सोचता रहा अपनी मंज़िलों को,
पर समय अपनी गति से चलता रहा।
हर पड़ाव पर कुछ सिखाता रहा,
और जीवन का अर्थ समझाता रहा।
अंत में यही सत्य रह जाता है,
कि समय का चक्र कभी रुकता नहीं।
इंसान आता है, अपनी कहानी लिखता है,
और फिर समय के साथ विदा हो जाता है।