मैं और मेरे अह्सास
दम तोड़ दिया
हौसलों के आगे तकलीफों ने दम तोड़ दिया l
आने वाली मुसीबत को ख़ुदा ने दूर किया ll
मजबूत और अडिग मन करके आनेवाली l
हर परिस्थिति को आसानी से ले लिया ll
गम के आसू पिए ओ खुशी के आसू पिए l
शहर में जिसने जो भी पिलाया वो पिया ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह