एक पत्थर की कहानी (Hindi)
मैं एक साधारण पत्थर था,
राहों में यूँ ही पड़ा था।
हर आने-जाने वाला मुझ पर चलता,
फिर भी मैं चुपचाप खड़ा था।
एक दिन एक शिल्पकार आया,
उसने मुझमें भगवान देखा।
छेनी-हथौड़ी के हर प्रहार में,
उसने मेरा नया सम्मान लिखा।
दर्द बहुत था, चोट भी गहरी,
पर मैंने हिम्मत नहीं हारी।
हर प्रहार ने मुझे सँवारा,
यही थी मेरी असली तैयारी।
आज मैं मंदिर में विराजमान हूँ,
लोग श्रद्धा से शीश झुकाते हैं।
जो कभी ठोकर का कारण था,
उसे आज भगवान कहकर बुलाते हैं।
सीख:
जीवन की कठिनाइयाँ हमें तोड़ने नहीं, बल्कि तराशकर बेहतर इंसान बनाने आती हैं.